
अजीत मिश्रा (खोजी)
प्रसव कक्ष में ‘गुंडाराज’: लेबर रूम में घुसकर तोड़फोड़, सहमी प्रसूता, पर डिगा नहीं ANM का हौसला
- अस्पताल या अखाड़ा? बीच प्रसव उपद्रवियों ने दी गालियां, फोड़ी बैटरी; खौफ में रही प्रसूता।
- सलाम है ऐसी जांबाज ANM को! गालियों और तोड़फोड़ के बीच नहीं थमे हाथ, कराया सुरक्षित प्रसव।
- दबंगों की ईंट से ईंट बजाने वाला साहस: ANM समरिका ने उपद्रव के बीच निभाया अपना राजधर्म।
- बांसी पुलिस की परीक्षा: लेबर रूम में घुसकर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले कब होंगे सलाखों के पीछे?
- आरोग्य मंदिर में असुरक्षा का अंधेरा! क्या अब प्रसव कक्ष में भी सुरक्षित नहीं हैं महिलाएँ?
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल सिद्धार्थनगर | 16 अप्रैल, 2026
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य सिस्टम को चुनौती देते हुए सिद्धार्थनगर जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खेसरहा के अंतर्गत रिठिया आयुष्मान आरोग्य मंदिर से एक रूह कँपा देने वाली और शर्मनाक घटना सामने आई है। जहाँ एक तरफ सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दम भर रही है, वहीं दूसरी ओर अराजक तत्वों ने प्रसव कक्ष (लेबर रूम) जैसी संवेदनशील जगह को अखाड़ा बना दिया।
अराजकता की पराकाष्ठा: बीच प्रसव में हंगामा
घटना तब हुई जब तैनात एएनएम समरिका एक महिला का प्रसव करा रही थीं। एक तरफ प्रसूता दर्द से कराह रही थी और एएनएम एक नई जिंदगी को दुनिया में लाने के संघर्ष में जुटी थीं, तभी कुछ दबंग और अनाधिकृत व्यक्ति मर्यादाओं को ताक पर रखकर प्रसव कक्ष के भीतर घुस आए। आरोपियों ने न केवल एएनएम के साथ अभद्रता और गाली-गलौज की, बल्कि प्रसव कक्ष में लगे इनवर्टर और बैटरी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
बड़ा सवाल: क्या अब अस्पतालों के प्रसव कक्ष भी सुरक्षित नहीं हैं? लेबर रूम में जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहाँ उपद्रवी घुसकर तोड़फोड़ कैसे कर गए?
कर्तव्यनिष्ठा को सलाम: खौफ के बीच कराया सुरक्षित प्रसव
आरोपियों के तांडव से अस्पताल परिसर में दहशत फैल गई। प्रसूता और उसके परिजन खौफ के साये में थे, लेकिन एएनएम समरिका ने जो मिसाल पेश की, वह काबिल-ए-तारीफ है। गाली-गलौज और भारी तोड़फोड़ के बीच, बिना विचलित हुए उन्होंने अपना ‘राजधर्म’ निभाया और महिला का सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया। समरिका का यह साहस उन गुंडों के चेहरे पर एक करारा तमाचा है जो सरकारी कार्य में बाधा डालने पहुँचे थे।
पुलिसिया कार्रवाई की बाट जोहता सिस्टम
इस दुस्साहस के बाद एएनएम समरिका और प्रसूता के परिजन मोहम्मद यूसुफ ने थाना बांसी में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया है। पुलिस ने मामले की जांच तो शुरू कर दी है, लेकिन सवाल वही है— क्या जांच के नाम पर खानापूर्ति होगी या इन उपद्रवियों को ऐसी सजा मिलेगी कि दोबारा कोई अस्पताल की मर्यादा लांघने की हिम्मत न करे?
मुख्य बिंदु:
- सुरक्षा पर सवाल: संवेदनशील प्रसव कक्ष में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश प्रबंधन की बड़ी लापरवाही है।
- स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल: यदि ऐसे अपराधियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई (जैसे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की धाराएं) नहीं हुई, तो स्वास्थ्यकर्मियों का सुरक्षा से भरोसा उठ जाएगा।
- जनता की मांग: क्षेत्र के लोगों ने एएनएम के साहस की सराहना करते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है।
निष्कर्ष: यह हमला सिर्फ एक एएनएम या अस्पताल पर नहीं, बल्कि समूची मानवता और कानून व्यवस्था पर है। सिद्धार्थनगर प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘आरोग्य के मंदिर’ में असुरक्षा का यह अंधियारा दोबारा न फैले।

















