
अजीत मिश्रा (खोजी)
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का बदहाल सच
दिनांक: 30 सितंबर, 2025
।। एक सपना जो टूट रहा है: एक्सप्रेसवे पर बदहाली का ग्रहण, जनता परेशान।।
लखनऊ: स्वर्गीय नेताजी मुलायम सिंह यादव का स्वप्निल प्रोजेक्ट, उत्तर प्रदेश की प्रगति का प्रतीक माने जाने वाला आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जिस एक्सप्रेसवे ने देश भर में अपनी गुणवत्ता और सुविधाओं के लिए नाम कमाया था, आज वह बदहाली और अराजकता का शिकार है। यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और सुविधाओं के वादे का प्रश्न है, जिसे यूपीडा (UPEDA) की कथित लापरवाही ने तार-तार कर दिया है।
उखड़ी सड़कें, टूटे वादे
एक्सप्रेसवे के अधिकांश हिस्सों में सड़क की हालत दयनीय है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे वाहन चालकों को भारी असुविधा हो रही है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार मंडरा रहा है। हमारे संवाददाता ने स्वयं देखा कि किलोमीटर 70 से लेकर किलोमीटर 60 तक पिछले 6 माह से वन-वे ट्रैफिक चलाया जा रहा है, जो आए दिन हादसों को न्योता दे रहा है। एक्सप्रेसवे की स्ट्रीट लाइट्स लगभग पूरी तरह से खराब पड़ी हैं, जिससे रात के समय यात्रा करना जानलेवा साबित हो सकता है।
टोल बूथ पर खुली लूट और फास्टैग की विफलता
सबसे बड़ी विडंबना टोल कलेक्शन सिस्टम में है। एक्सप्रेसवे के टोल बूथों पर फास्टैग मशीनें काम नहीं कर रही हैं, जिससे वाहनों को मैनुअल पास किया जा रहा है। यह आधुनिक एक्सप्रेसवे के लिए शर्मनाक स्थिति है। शिकायतें मिल रही हैं कि मशीन खराब होने के बावजूद, लोगों के खाते से गलत और मनमाने ढंग से पैसे काटे जा रहे हैं। लोगों की जेब से 100 किलोमीटर की यात्रा के लिए भी 302 किलोमीटर का शुल्क वसूला जा रहा है!
शिकायतों पर सिर्फ ‘झूठा आश्वासन’
जब पीड़ित यात्री टोल फ्री नंबर पर संपर्क करते हैं, तो उन्हें सिर्फ खोखले और झूठे आश्वासन दिए जाते हैं। दुखद यह है कि आज तक किसी भी यात्री का गलत तरीके से कटा हुआ पैसा वापस नहीं आया है। जनता पूरा टोल टैक्स देती है, लेकिन उन्हें बदले में मिलती है टूटी सड़क, अंधेरी यात्रा और खुली लूट। क्या यह यूपीडा की जिम्मेदारी नहीं है कि वह जनता को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा प्रदान करे?
सत्ता की चुप्पी पर सवाल
आक्रोशित जनता का सवाल है कि क्या यूपीडा और सरकार को इस बदतर स्थिति की जानकारी नहीं है? यह मानना मुश्किल है कि इतना बड़ा एक्सप्रेसवे बदहाल हो और शीर्ष अधिकारियों को पता न हो। यह चुप्पी कहीं न कहीं जनता के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाती है।
हमारी यूपीडा और सरकार से अपील है कि इस गंभीर विषय को प्राथमिकता दें। एक्सप्रेसवे की तुरंत मरम्मत की जाए, गड्ढों को भरा जाए, लाइटिंग व्यवस्था बहाल की जाए और टोल कलेक्शन सिस्टम को दुरुस्त किया जाए। नेताजी के सपने और प्रदेश के गौरव को इस तरह मिट्टी में नहीं मिलने दिया जा सकता।
हम मांग करते हैं: तत्काल कार्रवाई हो! लापरवाही बंद हो! जनता के पैसे की लूट रोकी जाए!

















