
+++++ नागपुर, मंगलवार 30सितंबर 2025 ++++++++
प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार कृषि मंत्रालय भारत सरकार ने 13 अगस्त को जारी किए गए उस गजेट नोटिफिकेशन पर पाबंदी लगा दी है जिसमें की पशुओं के चमड़े मांस एवं हड्डियों से बने हुए खाद के उपयोग करने की अनुमति दी गई थी। जानकारी के अनुसार सरकार के अब नये आदेश में पशु स्रोत वाले बायो स्टिमुलेंट खाद के मैन्यूफैक्चरिंग, विक्रम के आयात, बिक्री के लिए प्रस्ताव, स्टॉक व प्रदर्शन आदि पर स्थगन आदेश दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गया है। इससे पूर्व सरकार ने 13 अगस्त को गजेट नोटिफिकेशन जारी करके 1985 फर्टिलाइजर कंट्रोल आर्डर में संशोधन कर स्लॉटर हाउस से निकले हुए अवशेष से बनने वाले खाद को किसानों के खेतों में उपयोग मे लाये जाने के लिए अनूमति दी थी। सरकार के इस आदेश में मछली एवं गोवंशीय स्रोत से बने हुए प्रोटीन हाइड्रोजाइलेट को खाद के रूप में उपयोग में लाये जाने की अनुमति दी गई थी। सरकार के इस आदेश के बाद जैन समुदाय के लोगों काफी नारजगी सामने आई। हिंदू एवं जैन आचार्यों ने भी सरकार के इस निर्णय पर एकबार फिर सोचने विचारने के आग्रह किया था। जानकारी अनुसार इस मामलें में गुजरात के एनिमल वेफेयर बोर्ड के सदस्य राजेंद्र शाह और पुणे के ब्यूटी विदाउट क्रूएलिटी जैसे ऐनजीओ ने इस मामले में ध्यान देने के लिए विस्तार से पत्र भी भेजा था। कृषि मंत्री ने इस मामलें में संज्ञान मे आने बाद से पिछले एक सप्ताह मे देशभर के कंपनियों से बायो स्टिमुलेंट की जांच भी करवाई जिसमे करीब सौ से भी अधिक कंपनियों से बाय स्टिमुलेंट के उत्पादन बिक्री भंडारण पर रोक लगा । जानकारों का यह मानना है कि इस फैसले से फलों सब्जियों के आयात का भी मार्ग खुल गया था, जहां पर उनके उत्पादन में स्लॉटर हाउस के निकले अवशेष से बने हुए खाद का उपयोग होता है।






