

बलौदाबाजार।
जिले में शराब की ओवररेटिंग और कोचियों के बढ़ते प्रभाव को लेकर पहले से ही माहौल गर्म था। कोचिया पार्षद गौतम चौहान से जुड़े मामले की चर्चा अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि एक और घटना ने पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। इस बार एक युवक को सिर्फ इसलिए मारपीट का शिकार होना पड़ा क्योंकि उसने शराब की कीमत में हो रही खुली लूट का विरोध किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राहुल बंजारे नामक युवक स्थानीय शराब दुकान पर देशी शराब (मसाला) लेने पहुंचा था। वहां उसे निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब दी जा रही थी। जब उसने इस ओवररेटिंग पर आपत्ति जताई और विरोध दर्ज कराया, तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि मौके पर मौजूद लोगों ने उसके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी।
इस हमले में राहुल बंजारे को गंभीर चोटें आईं, खासकर उसके सिर पर चोट लगने से खून बहने लगा। आसपास मौजूद लोगों के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह स्थिति संभली, लेकिन घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित ने घटना के बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
ओवररेटिंग का खेल, जिम्मेदार बेखबर या लाचार?
बलौदाबाजार जिले में शराब दुकानों पर ओवररेटिंग कोई नई बात नहीं रह गई है। लंबे समय से उपभोक्ता निर्धारित कीमत से अधिक भुगतान करने को मजबूर हैं। इसके साथ ही कोचियों का नेटवर्क भी लगातार सक्रिय है, जो इस पूरे अवैध तंत्र को बढ़ावा देता नजर आता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग दोनों को है, इसके बावजूद ठोस और कड़ी कार्रवाई का अभाव साफ नजर आता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतें बार-बार की जाती हैं, लेकिन उन पर या तो ध्यान नहीं दिया जाता या फिर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है।
छोटी धाराओं में कार्रवाई, आरोपियों के हौसले बुलंद
लोगों का आरोप है कि जब भी ऐसे मामलों में कार्रवाई होती है, तो आरोपियों पर केवल हल्की धाराएं लगाई जाती हैं। नतीजतन, वे जल्द ही जमानत पर छूट जाते हैं और दोबारा वही गतिविधियां शुरू कर देते हैं। इससे उनके हौसले और बढ़ रहे हैं, जबकि आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।
जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग तेज
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने आम लोगों के बीच गुस्सा और असंतोष बढ़ा दिया है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुई मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है—जहां नियमों की अनदेखी, अवैध वसूली और विरोध करने वालों के साथ हिंसा आम होती जा रही है।
अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या इस बार कोई ठोस कदम उठाया जाता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ दबकर रह जाएगा।








