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गन्ना भुगतान न होने से आक्रोशित किसानों ने बरखेड़ा बजाज चीनी मिल पर दिया धरना-प्रदर्शन।

पीलीभीत। पिछले वर्ष के गन्ना भुगतान को लेकर आक्रोशित बरखेड़ा व नवाबगंज क्षेत्र के तमाम गांव के हजारों किसानों ने बजाज फैक्ट्री के सामने धरना प्रदर्शन किया। तीन दिन से चल रहे इस धरने में सुबह प्रशासन ने किसानों का धरना समाप्त कराने के लिए प्रशासन ने धरने का टेंट उखाड़ कर फेंक दिया। तब किसानों ने पैनी नजर सामाजिक संस्था की अध्यक्ष व रुहेलखंड प्रांत की उपाध्यक्ष पीलीभीत प्रभारी आम आदमी पार्टी एडवोकेट सुनीता गंगवार को सारी जानकारी दी। जानकारी मिलते ही एडवोकेट सुनीता गंगवार तत्काल बरेली से किसानों के समक्ष पहुंची। वहां से किसानों को लेकर बजाज फैक्ट्री पहुंचकर पुनः धरना आरंभ किया। सुनीता गंगवार ने कहा देश का अन्नदाता आज भूखा प्यासा अपनी फसल के मूल्य की मांग को लेकर अगर धरने पर बैठा है तो उसकी फसल का मूल्य न देने वाले अपराधी नहीं है। लेकिन मांग करने वाला किसान कब से अपराधी हो गया। यह दर्शाती है सरकार की किसान विरोधी नीतियों को। देश में चल रहे उस सिस्टम की नीतियों को जिसके तहत हकदार का गला दबाया जाता है।

सुनीता गंगवार ने कहा किसान वह ताकत है जो किसी भी देश की सत्ता का तख्ता पलट सकता है। किसानों का सम्मान सरकार को भी करना चाहिए। प्रशासन को भी करना चाहिए पूरे देश को करना चाहिए जो किसान पूरे देश को रोटी खिलाता है आज वह अपमानित भी हो रहा है और अपने हक की लड़ाई में पुलिस के लठ्ठ खा रहा है। सुनीता गंगवार के समक्ष बजाज फैक्ट्री के वाइस प्रेसिडेंट आए उन्होंने किसानों के समक्ष कहा कि हम मजबूर है हमारे पास पैसा नहीं है इसलिए हम आपको पेमेंट नहीं दे पा रहे हैं। इस पर सुनीता गंगवार ने कहा कि यह मजबूर किसान आपके पास आए हैं आप अपनी मजबूरियां लेकर यहां आए हैं इससे तो अच्छा है कि आप भी किसानों के साथ धरने पर बैठ जाइए अगर आप इतने लाचार हैं तो इस देश का पैसा कहां जा रहा है किसके पास जा रहा है इसका जवाब कौन देगा इन किसानों का हक कौन देगा। तमाम प्रशासन की कवायत चलती रही। धरने को समाप्त करने के लिए किसान टस से मस होने को तैयार नहीं थे। अंत में सिटी मजिस्ट्रेट ने आकर भुगतान की तारीखों का शेड्यूल किसानों के सामने रखकर कैमरे पर आश्वासन दिया कि 15 दिसंबर तक समस्त भुगतान कर दिया जाएगा। इस पर सुनीता गंगवार ने कहा कि अगर यह पेमेंट नहीं किया निर्धारित तारीखों पर तो उसके बाद यह किसान फैक्ट्री में ताला लगाएंगे। अगर यह बात प्रशासन को मंजूर हो तो ही किसान अपने धरने को समाप्त करेंगे। किसानों ने यह भी कहा की ताले के साथ-साथ हम फैक्ट्री को अपना गन्ना नहीं देंगे। सुनीता गंगवार ने कहा कि मैं किसान की इस हक की लड़ाई में सदा उनके साथ हूं। तब जाकर किसान धरने से उठे।

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