

अवैध कब्जे, स्थानीय रोजगार और समान वेतन जैसे बड़े मुद्दों पर कंपनी के खिलाफ फूटा जनप्रतिनिधियों का गुस्सा; कांग्रेस नेता शैलेश नितिन त्रिवेदी समेत सैकड़ों लोग डटे
हिरमी/सिमगा।
जनहित और स्थानीय मजदूरों के अधिकारों को लेकर अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी हिरमी के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब बेहद आक्रामक रूप ले चुका है। विभिन्न जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में पिछले तीन दिनों से जारी इस भव्य प्रदर्शन को अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) का पूर्ण रूप से समर्थन मिल गया है।
आंदोलनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि कंपनी प्रबंधन ने जल्द ही मांगें पूरी नहीं कीं, तो प्रदर्शन को उग्र करते हुए कंपनी का मुख्य गेट बंद किया जाएगा और रेलवे लाइन पर चक्का जाम कर दिया जाएगा।
आंदोलन के मुख्य मुद्दे: किन वजहों से ठन गई है रार?
प्रदर्शनकारियों ने अल्ट्राटेक सीमेंट प्रबंधन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए निम्नलिखित मुद्दों पर मोर्चा खोला है:
सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा: कंपनी प्रबंधन द्वारा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप।
मजदूरों का शोषण: ‘समान काम-समान वेतन’ नीति का उल्लंघन और स्थानीय मजदूरों को अलग-अलग बहाने बनाकर काम से निकालना।
रोजगार में अनदेखी: स्थानीय युवाओं और निवासियों को रोजगार देने में आनाकानी करना।
CSR फंड में गड़बड़ी: कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के पैसों का ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में सही उपयोग न होना।
कच्चे माल की अवैध सप्लाई: क्लिंकर (Clinker) जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल की अवैध सप्लाई का मुद्दा।
शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का मिला साथ
इस आंदोलन को धार देने के लिए राजनीतिक दलों के बड़े चेहरे और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि मैदान में उतर आए हैं:
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) से प्रमुख उपस्थिति:
प्रदेश सचिव मनहरण साहू एवं प्रदेश सचिव गंगोत्री साहू
रेखा साहू, भारती धीवर, कोमल साहू, गब्बर मारकंडे, दीपक वर्मा, छोटू यादव, और विक्की सावरा।
कांग्रेस एवं प्रमुख नेतृत्वकर्ता:
शैलेश नितिन त्रिवेदी (पूर्व विधायक प्रत्याशी, कांग्रेस)
डॉ. मोहनलाल वर्मा (जिला पंचायत सदस्य – आंदोलन के मुख्य नेतृत्वकर्ता)
दौलत पाल (जनपद अध्यक्ष, सिमगा)
जनपद व ग्राम पंचायत प्रतिनिधि:
सविता हेमंत यादव (जनपद सदस्य), उमा अनंत (जनपद सदस्य), पुष्पा चेलक (जनपद सदस्य), खोमलाल साहू (जनपद सदस्य), पूनऊ राम भारती (सरपंच, हिरमी), प्रेमलाल ध्रुव (सरपंच, परसवानी), डोमार मारकंडे (सरपंच, नवापारा), दिनेश चौरे (अध्यक्ष, सरपंच संघ), तारिणी जवाहर वर्मा (सरपंच, मोहरा), रिकेश साहू, वेद प्रकाश वर्मा, लव कुमार साहू, रूपेश साहू, भूमिका ध्रुव सहित सैकड़ों की संख्या में प्रभावित ग्रामीण और श्रमिक उपस्थित रहे।
आर-पार की जंग का ऐलान!
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कंपनी स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल कर मुनाफा कमा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों और मजदूरों के हितों को कुचल रही है। अब यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है; मांगें पूरी होने तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा।





