A2Z सभी खबर सभी जिले की

कनखल राजघाट स्थित श्री प्राचीन बद्रीनाथ मंदिर में अखंड रामायण पाठ का समापन हरिद्वार

विजय कुमार बंसल हरिद्वार ब्यूरो

कनखल राजघाट स्थित श्री प्राचीन बद्रीनाथ मंदिर में अखंड रामायण पाठ का समापन हरिद्वार

पावन क्षेत्र कनखल स्थित राजघाट के प्राचीन बद्रीनाथ मंदिर में अखंड रामायण पाठ की पूर्णाहुति के शुभ अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस पावन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। मंदिर परिसर में सुबह से ही भजन-कीर्तन, वेद मंत्रों और राम नाम की मधुर ध्वनि गूंजती रही, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। मंदिर के विद्वान आचार्य पंडित गजेंद्र भूषण जोशी जी ने इस अवसर पर मंदिर की प्राचीन महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि कनखल राजघाट स्थित यह बद्रीनाथ मंदिर अत्यंत पावन और ऐतिहासिक महत्व का केंद्र है। प्राचीन समय में यही वह स्थल था, जहां से चारों धाम और विशेष रूप से बद्रीनाथ धाम की यात्रा प्रारंभ होती थी। उस समय श्रद्धालु यहीं से संकल्प लेकर अपनी कठिन तपस्या रूपी यात्रा पर निकलते थे। उन्होंने बताया कि इस मंदिर में भगवान बद्रीनाथ उसी दिव्य स्वरूप में विराजमान हैं, जैसे वे हिमालय स्थित श्री बद्रीनाथ धाम में विराजते हैं। मान्यता है कि जो पुण्य और फल श्रद्धालुओं को बद्रीनाथ धाम के दर्शन से प्राप्त होता है, वही फल यहां इस प्राचीन मंदिर के दर्शन मात्र से भी प्राप्त होता है। यही कारण है कि यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। बद्रीनाथ धाम स्वयं भगवान विष्णु के प्रमुख धामों में से एक है, जहां वे तपस्वी रूप में नर-नारायण पर्वतों के मध्य अलकनंदा नदी के तट पर विराजमान हैं। यह धाम केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि मोक्ष और आत्मिक शांति का द्वार माना जाता है। यहां की पवित्रता, हिमालय की गोद में स्थित दिव्यता और भगवान की कृपा श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। कनखल स्थित इस प्राचीन बद्रीनाथ मंदिर की महिमा भी किसी से कम नहीं है। यह मंदिर उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है जो किसी कारणवश हिमालय स्थित धाम तक नहीं पहुंच पाते। यहां आकर वे उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाते हैं। अखंड रामायण पाठ की पूर्णाहुति के इस पावन अवसर पर संत-महात्माओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रामायण का श्रवण और पाठ मनुष्य के जीवन को पवित्र करता है और उसे धर्म, सत्य और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया और सेवा का पुण्य अर्जित किया। इस प्रकार यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में एकता, सेवा और भक्ति भाव का भी संदेश दे गया। कनखल राजघाट स्थित प्राचीन बद्रीनाथ मंदिर की यह महिमा सदियों से श्रद्धालुओं के हृदय में आस्था का दीप प्रज्वलित करती आ रही है और आगे भी करती रहेगी।

Back to top button
error: Content is protected !!