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गैस संकट या खेल अंदरूनी? बलौदा बाजार की बम्लेश्वरी गैस एजेंसी पर उठे गंभीर सवाल

अब नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस कथित गड़बड़ी पर अंकुश लगेगा या आम जनता यूं ही परेशान होती रहेगी।


बलौदा बाजार। शहर की चर्चित बम्लेश्वरी गैस एजेंसी एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह सुविधा नहीं बल्कि अव्यवस्था और कथित गड़बड़ी है। इन दिनों गैस सिलेंडर की भारी किल्लत के बीच एजेंसी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
घंटों लाइन, फिर भी नहीं मिलता सिलेंडर
सुबह से ही एजेंसी के बाहर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और रोज कमाने-खाने वाले लोग अपने जरूरी काम छोड़कर सिलेंडर लेने पहुंचते हैं। कई उपभोक्ता 4-5 घंटे तक इंतजार करते हैं, लेकिन अंत में उन्हें “स्टॉक खत्म” कहकर लौटा दिया जाता है।
खास लोगों” के लिए अलग व्यवस्था?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां आम जनता लाइन में खड़ी रहती है, वहीं कुछ चुनिंदा लोगों को एजेंसी के अंदर से ही आसानी से सिलेंडर दे दिया जाता है। यह कथित “बैकडोर सप्लाई” पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रही है और लोगों में आक्रोश बढ़ा रही है।
ब्लैक में खरीदने को मजबूर उपभोक्ता
स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई उपभोक्ता मजबूरी में ब्लैक में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। रसोई गैस जैसी आवश्यक सेवा में इस तरह की स्थिति ने आम परिवारों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।
क्या यह नियमों का उल्लंघन?
अगर वास्तव में सिलेंडर की कमी है, तो फिर कुछ लोगों को अंदर से गैस कैसे मिल रही है? क्या यह एजेंसी की लापरवाही है या फिर जानबूझकर किया जा रहा भेदभाव? ऐसे कई सवाल अब लोगों के मन में उठ रहे हैं।
जनता में गुस्सा, प्रशासन से उम्मीद
लगातार हो रही इस परेशानी से उपभोक्ताओं में गहरा आक्रोश है। लोगों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वे विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।
आम आदमी का दर्द
“हम घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, फिर भी खाली हाथ लौटते हैं… और कुछ लोग सीधे अंदर से सिलेंडर लेकर चले जाते हैं। क्या नियम सिर्फ गरीबों के लिए हैं?” — एक पीड़ित उपभोक्ता की यह बात पूरे हालात को बयां करती है।
अब नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस कथित गड़बड़ी पर अंकुश लगेगा या आम जनता यूं ही परेशान होती रहेगी।

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