
धमतरी के फरसिया में डिस्मेंटल घोषित शासकीय भवन में 2018 से निजी स्कूल संचालित होने के मामले में शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं। दो प्राचार्यों की टीम तीन दिन में रिपोर्ट देगी।
Dhamtari News: जर्जर सरकारी भवन में 8 साल से चल रहा निजी स्कूल, शिक्षा विभाग ने दिए जांच के आदेश
धमतरी। सरकारी स्कूल में अगर प्राइवेट स्कूल संचालित हो… और वो भी एक-दो महीने से नहीं पूरे आठ साल से…तो सवाल भी उठता है और संदेह भी होता है। हैरान करने वाला ये मामले छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी विकासखंड का है। जहां स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फरसिया के जर्जर और डिस्मेंटल घोषित भवन में पिछले आठ वर्षों से निजी स्कूल संचालित हो रहा है।
स्कूल में 70 से ज्यादा बच्चे पढाई करते हैं, जिनकी जान खतरे में है। अब मामले के संज्ञान में आने के बाद शिक्षा विभाग एक्शन में आया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दो वरिष्ठ प्राचार्यों की जांच टीम गठित कर तीन दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
2016 में भवन हुआ था डिस्मेंटल, 2018 से चल रहा निजी स्कूल
जारी आदेश के अनुसार, संबंधित शासकीय भवन को वर्ष 2016 में डिस्मेंटल (असुरक्षित) घोषित किया जा चुका था। इसके बावजूद वर्ष 2018 से उसी भवन में एक निजी विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि जर्जर भवन में आज भी 70 से अधिक बच्चों की पढ़ाई हो रही है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
DEO ने गठित की दो सदस्यीय जांच टीम
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय, नगरी के प्राचार्य संतोष कुमार प्रजापति और शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, नगरी की प्राचार्य श्रीमती मीनाक्षी रामटेके को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दोनों अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फरसिया का स्थल निरीक्षण कर यह स्पष्ट करें कि आखिर किन परिस्थितियों में डिस्मेंटल घोषित सरकारी भवन में निजी स्कूल संचालित हो रहा है। जांच रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सौंपनी होगी।
प्राचार्य पांच साल से भेज रहे नोटिस, फिर भी नहीं हुआ खाली
सूत्रों के मुताबिक, शासकीय विद्यालय के प्राचार्य पिछले करीब पांच वर्षों से निजी स्कूल संचालक को भवन खाली करने के लिए लगातार नोटिस जारी करते रहे हैं। इसके बावजूद अब तक भवन खाली नहीं कराया गया, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आदेश में हादसे की आशंका का भी जिक्र
शिक्षा विभाग के आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि संबंधित शाला भवन काफी जर्जर स्थिति में है और वहां किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे में विभाग यह जानना चाहता है कि असुरक्षित घोषित भवन में निजी विद्यालय का संचालन किसकी अनुमति या लापरवाही से जारी है।अब जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और निजी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।









