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बस्ती की कानून व्यवस्था पर रसूख का ‘बुलडोजर’: पोल को बाउंड्री में घेरा, बीडीए ने फेरा मुंह।

बीडीए का दोहरा चरित्र: गरीबों पर चलता है 'हथौड़ा', रसूखदारों के आगे झुक गया 'घुटने'।

अजीत मिश्रा (खोजी)

रसूख के आगे नतमस्तक बस्ती विकास प्राधिकरण? बड़ेवन में पोल को बाउंड्री में घेरा, ‘खास’ के लिए खामोश जिम्मेदार!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।

  • नियमों की ‘बलि’ और रसूख की ‘बिल्डिंग’: बड़ेवन में कानून को ठेंगा दिखा रहा अवैध निर्माण।
  • क्या सत्ता के दबाव में ‘अंधा’ हो गया है विभाग? बिजली के पोल पर कब्ज़ा, फिर भी अधिकारी मौन!
  • घरसोहिया में सख्ती, बड़ेवन में चुप्पी… क्या रसूखदारों के लिए बदल गए बीडीए के नियम?
  • साहब! ये कैसा विकास? सरकारी खंभे को बनाया अपनी जागीर, बीडीए को नहीं दिख रहा अवैध घेरा।
  • सांठगांठ का ‘अवैध’ खेल: बिना नक्शा खड़ा हुआ 10 फीट का ढांचा, बीडीए की फाइलों में सब ‘चंगा’।
  • बस्ती विकास प्राधिकरण: जहाँ ‘रसूख’ ही सबसे बड़ा नक्शा और ‘पैसा’ ही सबसे बड़ी अनुमति है!
  • पोल भी कैद, कानून भी बेबस: संतकबीर हॉस्पिटल के सामने दबंगई की नई मीनार।

बस्ती। नियम और कानून क्या सिर्फ गरीबों की झोपड़ियों और मध्यम वर्ग के आशियानों पर बुलडोजर चलाने के लिए बने हैं? यह सवाल आज बस्ती की जनता बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) के अधिकारियों से पूछ रही है। बड़ेवन रोड स्थित संतकबीर आई हॉस्पिटल के सामने सत्ता और रसूख की हनक में नियमों की जो धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, उसने बीडीए की कार्यशैली को संदिग्ध बना दिया है।

बिजली के पोल पर कब्ज़ा: विकास या विनाश को दावत?

हैरानी की बात यह है कि इस अवैध निर्माण में दबंगई की सारी सीमाएं लांघ दी गई हैं। निर्माणकर्ता ने बिजली के पोल को ही अपनी बाउंड्री वॉल के अंदर कैद कर लिया है।

  • खतरा: यह न केवल विद्युत विभाग के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना या शॉर्ट सर्किट की स्थिति में जन-धन की हानि का कारण बन सकता है।
  • सवाल: क्या बीडीए के इंजीनियरों को सड़क किनारे खड़ा 10 फीट का ढांचा और बाउंड्री में कैद पोल दिखाई नहीं दे रहा?
  • दोहरा मापदंड: घरसोहिया में ‘टाइगर’ और बड़ेवन में ‘सरेंडर’?

अभी कुछ ही दिन पहले बीडीए ने घरसोहिया क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर अपनी ‘सख्ती’ का प्रदर्शन किया था। तब अधिकारियों ने नियम-कायदों की लंबी चौड़ी दुहाई दी थी। लेकिन बड़ेवन रोड पर बिना मानचित्र स्वीकृति के धड़ल्ले से हो रहे इस निर्माण पर विभाग ने ‘धृतराष्ट्र’ की तरह अपनी आँखों पर पट्टी बांध ली है।

“क्या बीडीए का बुलडोजर सिर्फ बेसहारा लोगों के लिए है? रसूखदारों के सामने आते ही विभाग की फाइलें और फुर्ती क्यों गायब हो जाती हैं?” — आक्रोशित स्थानीय नागरिक

सत्ता का ‘कवच’ और अधिकारियों की चुप्पी

चर्चा आम है कि इस निर्माण को सत्तापक्ष के एक प्रभावी व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है। शायद यही कारण है कि शिकायतों के बावजूद अब तक न तो कोई नोटिस जारी हुआ और न ही काम रुकवाया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पैसे और रसूख के दम पर शहर की नियोजन व्यवस्था का गला घोंटा जा रहा है।

ज्वलंत सवाल जिनका जवाब बीडीए को देना होगा:

  • क्या इस निर्माण का मानचित्र स्वीकृत है? यदि नहीं, तो 10 फीट ऊंचा ढांचा कैसे खड़ा हो गया?
  • बिजली के पोल को बाउंड्री के भीतर लेना किस नियम के तहत वैध है?
  • क्या विभाग अपनी साख बचाने के लिए इस निर्माण पर कार्रवाई करेगा या रसूख के आगे घुटने टेक देगा?

निष्कर्ष: शहर की सूरत बिगाड़ने वाले ऐसे अवैध निर्माणों पर यदि समय रहते लगाम नहीं लगी, तो बस्ती ‘कंक्रीट के अवैध जंगल’ में तब्दील हो जाएगी। अब देखना यह है कि बीडीए उपाध्यक्ष इस मामले में निष्पक्ष जांच कर बुलडोजर मंगवाते हैं या फिर यह मामला ‘ठंडे बस्ते’ और ‘सांठगांठ’ की भेंट चढ़ जाएगा।

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