
अजीत मिश्रा (खोजी)
🎯संत कबीर नगर: आबकारी विभाग की ‘मूक सहमति’ या बड़ी लापरवाही? शराब दुकानों पर ओवररेटिंग का ‘खुला खेल’!🎯
- भ्रष्टाचार का ‘नशा’: संत कबीर नगर में सरकारी रेट लिस्ट बेअसर, ₹10 से ₹20 की एक्स्ट्रा वसूली बना ‘नया कानून’।
- लूट का सिंडिकेट: विरोध करने पर मारपीट, ओवररेटिंग से कराह रहे शराब उपभोक्ता।
- जीरो टॉलरेंस को ठेंगा! संत कबीर नगर में शराब माफियाओं का ‘अपना सिस्टम’, विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल।
- ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
संत कबीर नगर। उत्तर प्रदेश में सुशासन और जीरो टॉलरेंस की बातें भले ही मंचों से गूंजती हों, लेकिन जनपद संत कबीर नगर में सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिले में अंग्रेजी शराब की दुकानों पर ‘ओवररेटिंग का नंगा नाच’ चल रहा है। यहां शराब की बोतलें एमआरपी (MRP) पर नहीं, बल्कि सेल्समैनों की मर्जी के दाम पर बिक रही हैं। हद तो यह है कि लूट का यह काला खेल आबकारी विभाग की नाक के नीचे चल रहा है और जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।
🎯दबंगई के दम पर ‘अवैध वसूली’
जिले भर से मिल रही शिकायतों के अनुसार, शराब माफिया और दुकानदार ग्राहकों की जेब पर सरेआम डकैती डाल रहे हैं। 1 अप्रैल से शुरू हुए इस ‘सिस्टम’ ने अब एक भयावह रूप ले लिया है:
- आईबी (IB) ब्रांड: हाफ बोतल की सरकारी कीमत ₹320 है, लेकिन वसूली ₹330 की जा रही है।
- क्वार्टर और हाफ: हर क्वार्टर पर ₹10 और हाफ पर ₹10 से ₹20 तक की अवैध वसूली अनिवार्य कर दी गई है।
- विरोध पर गुंडागर्दी: यदि कोई जागरूक उपभोक्ता एमआरपी की बात करता है या रसीद मांगता है, तो दुकानदार और उनके गुर्गे मारपीट पर आमादा हो जाते हैं। ग्राहकों के साथ बदसलूकी और गाली-गलौज यहां आम बात हो चुकी है।
🎯आबकारी विभाग: रक्षक या भक्षक?
सवाल यह उठता है कि क्या आबकारी विभाग को इस संगठित लूट की भनक नहीं है? सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल ‘मिलीभगत और कमीशन’ के दम पर टिका हुआ है। जिले के चप्पे-चप्पे पर हो रही ओवररेटिंग यह साबित करने के लिए काफी है कि विभाग की प्रवर्तन टीमें केवल कागजों पर दौड़ रही हैं। आबकारी विभाग की चुप्पी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या इन अवैध रुपयों का हिस्सा ऊपर तक जा रहा है?
🎯प्रशासन की साख पर बट्टा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट निर्देश है कि उपभोक्ताओं का शोषण न हो और अवैध वसूली पर लगाम लगे। लेकिन संत कबीर नगर में ‘सिंडिकेट’ इतना मजबूत है कि उसे न कानून का खौफ है और न ही प्रशासन का। खुलेआम चल रही इस लूट से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है।
“क्या संत कबीर नगर में प्रशासन नाम की कोई चीज बची है? अगर विभाग कार्रवाई नहीं कर सकता, तो क्या हम यह मान लें कि शराब की दुकानों पर सरकारी रेट लिस्ट सिर्फ दिखावा है?” — एक पीड़ित उपभोक्ता
अब देखना यह है कि इस खबर के बाद कुंभकर्णी नींद में सोया आबकारी विभाग जागता है या जिले में शराब माफियाओं की यह समानांतर सरकार यूं ही चलती रहेगी। क्या जिलाधिकारी महोदय इन ‘जेबकतरों’ पर नकेल कसेंगे, या जनता की गाढ़ी कमाई इसी तरह लुटती रहेगी?

















