
अजीत मिश्रा (खोजी)
धिरौली पाण्डेय में मनरेगा के नाम पर ‘लूटतंत्र’: प्रधान, सचिव और मेट की तिकड़ी कर रही सरकारी खजाने की ‘सफाई’
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल उत्तर प्रदेश | 19 अप्रैल 2026
- विकासखंड विक्रमजोत का धिरौली पाण्डेय बना भ्रष्टाचार का ‘अड्डा’, एपीओ और टीए की चुप्पी पर सवाल!
- गजब का विकास! न काम हुआ न पसीना बहा, फिर भी धिरौली पाण्डेय में मनरेगा की ‘लूट’ रही वाह-वाही!
- प्रधान जी की ‘चुनावी तैयारी’: पंचायत चुनाव से पहले सरकारी खजाना साफ करने का मास्टर प्लान!
- सावधान! धिरौली पाण्डेय में चल रहा है ‘कागजी’ मनरेगा, क्या गहरी नींद में सो रहा है बस्ती प्रशासन?
- फर्जी हाजिरी का ‘महासंग्राम’: धिरौली पाण्डेय के भ्रष्टाचार की जाँच होगी या भ्रष्टाचारियों को मिलेगा अभयदान?
बस्ती। विकासखंड विक्रमजोत की ग्राम पंचायत धिरौली पाण्डेय इस वक्त विकास कार्यों के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए चर्चा में है। यहाँ ग्राम प्रधान यशोदा देवी, सचिव श्याम प्रकाश भारती और महिला मेट राज किशोरी की ‘मजबूत तिकड़ी’ सरकारी धन को ठिकाने लगाने में जुटी है। आलम यह है कि धरातल पर काम का नामोनिशान नहीं है, लेकिन कागजों में मनरेगा मजदूरों की ‘फेस हाजिरी’ के जरिए लूट की बड़ी पटकथा लिखी जा चुकी है।
धरातल पर सन्नाटा, कागजों में ‘विकास’ की बाढ़
स्थानीय ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वर्तमान में पूरी ग्राम पंचायत में कहीं भी कोई मनरेगा कार्य नहीं चल रहा है। इसके बावजूद, महिला मेट राज किशोरी द्वारा मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही है। सवाल यह उठता है कि जब फावड़ा चला ही नहीं, तो हाजिरी किसकी लग रही है? क्या यह आने वाले पंचायत चुनावों के लिए ‘चुनावी फंड’ इकट्ठा करने की सोची-समझी साजिश है?
भ्रष्टाचार के ‘कवच’ बने जिम्मेदार अधिकारी
इस पूरे खेल में सबसे चौंकाने वाली भूमिका एपीओ (APO) मनरेगा और तकनीकी सहायक (TA) की है। नियमानुसार, इन अधिकारियों का काम भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है, लेकिन धिरौली पाण्डेय के मामले में ये अधिकारी मूकदर्शक बनकर भ्रष्टाचार के ‘सहयोगी’ नजर आ रहे हैं।
”जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और एपीओ से लेकर सचिव तक लूट में शामिल हों, तो ग्रामीण विकास की कल्पना करना बेमानी है।”
प्रमुख बिंदु: लूट के खेल के मोहरे
- यशोदा देवी (प्रधान): चुनाव नजदीक देख सरकारी खजाने को खाली करने की मची है होड़।
- श्याम प्रकाश भारती (सचिव): नियमों को ताक पर रखकर फर्जी हाजिरी को दे रहे हैं मौन सहमति।
- राज किशोरी (महिला मेट): फेस हाजिरी के तकनीकी खेल से सरकारी धन पर डाल रही हैं डाका।
- एपीओ व टीए: जाँच के बजाय भ्रष्टाचार को दे रहे हैं मूक संरक्षण।
बस्ती में चर्चा का विषय बना फर्जीवाड़ा
धिरौली पाण्डेय का यह मनरेगा घोटाला अब केवल गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे बस्ती जिले में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीण अब उच्चाधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं कि इस ‘भ्रष्ट तिकड़ी’ और उनके संरक्षक अधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल: यदि इसी तरह विकास कार्यों के नाम पर बंदरबांट होती रही, तो धिरौली पाण्डेय का समुचित विकास कभी संभव हो पाएगा? या फिर गरीब मजदूरों का हक इसी तरह सफेदपोशों की जेबों में जाता रहेगा?
















