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बस्ती का ‘अजूबा’: सचिव ने कुएं को ही बना डाला सोखता गड्ढा, भ्रष्टाचार का अनोखा खेल!

धरोहर पर डाका: कप्तानगंज में पुरानी विरासत को 'गटर' बनाने की साजिश, ग्रामीणों में उबाल।

अजीत मिश्रा (खोजी)

सावधान! बस्ती में कुआं हुआ ‘चोरी’, सरकारी फाइलों में सचिव ने बदला कुएं का भूगोल।

  • योगी राज में ‘कलम के कसाई’ सक्रिय: रामगढ़ में बिना काम किए ही डकार लिया सरकारी बजट।
  • भ्रष्टाचार का ‘ब्लैक होल’: कुएं पर ढक्कन, जेब में धन—देखें कप्तानगंज का शर्मनाक कारनामा।
  • धरोहर की हत्या: क्या अब कुओं में गिरेगा गंदा पानी? सचिव के फैसले से भड़के ग्रामीण।
  • ग्राउंड रिपोर्ट: कागजों पर विकास, जमीन पर विनाश—बस्ती मंडल में लूट की खुली छूट?
  • CM दरबार पहुंची कप्तानगंज की लूट: सचिव उदितांशु शुक्ला के ‘कारनामे’ की खुलेगी पोल!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

कप्तानगंज /। बस्ती:: 17 अप्रैल 2026।।‌बस्ती में ‘भ्रष्टाचार का कुआं’: सरकारी धन डकारने के लिए प्राकृतिक धरोहर की ‘बलि’, सचिव का कारनामा देख आप भी रह जाएंगे दंग!

बस्ती। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है, तो दूसरी तरफ बस्ती जिले के विकासखंड कप्तानगंज में बैठे जिम्मेदार अधिकारी सरकार की साख को ‘सोखता गड्ढे’ में डालने पर तुले हैं। कप्तानगंज के ग्राम पंचायत रामगढ़ ऊर्फ जंगल कठर से भ्रष्टाचार का एक ऐसा “अजूबा” सामने आया है जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी और व्यवस्था पर हंसी भी आएगी।

कुआं था धरोहर, बना दिया ‘कागजी’ सोखता गड्ढा

मामला विकासखंड के सचिव उदितांशु शुक्ला के कारनामों से जुड़ा है। यहाँ सदियों पुराने कुएं, जो हमारी प्राकृतिक धरोहर और जल संचय के स्रोत थे, उन्हें रातों-रात सरकारी अभिलेखों में “सामुदायिक सोखता गड्ढा” घोषित कर दिया गया।

बड़ा सवाल: क्या एक जीवित कुआं और गंदा पानी सोखने वाला गड्ढा एक ही होता है? या फिर यह सिर्फ सरकारी बजट को ठिकाने लगाने की एक सोची-समझी साजिश है?

बिना काम किए ‘पेमेंट का बंदरबांट’

जमीनी हकीकत यह है कि पुराने कुएं पर मात्र एक ढक्कन रखकर उसे नया निर्माण दिखा दिया गया। न कोई खुदाई हुई, न कोई तकनीकी मानक पूरे किए गए। आरोप है कि सचिव और विभागीय सांठगांठ के चलते जनता की गाढ़ी कमाई का बंदरबांट कर लिया गया। इसे विकास कहें या विनाश की पटकथा, यह समझ से परे है।

क्या ‘सोखता गड्ढा’ नहीं, अधिकारियों की नीयत ही गंदी है?

कप्तानगंज के रामगढ़ ऊर्फ जंगल कठर का यह मामला सिर्फ एक कुएं का नहीं, बल्कि उस दीमक रुपी भ्रष्टाचार का है जो अंदर ही अंदर विकास की नींव को खोखला कर रहा है। सचिव उदितांशु शुक्ला का यह ‘अजूबा’ साबित करता है कि ब्लॉक स्तर पर बैठे अधिकारियों को न तो सरकार का खौफ है और न ही जनता के प्रति कोई नैतिकता।

भ्रष्टाचार के खेल को ऐसे समझिए:

  • प्राकृतिक हत्या: कुआं जल संरक्षण का प्रतीक है, जिसे सोखता गड्ढा बनाना उसकी पवित्रता और उपयोगिता की हत्या करना है।
  • कागजी बाजीगरी: नया सोखता गड्ढा बनाने के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित होता है। पुराने कुएं को ही गड्ढा दिखाकर खुदाई, ईंट, सीमेंट और मजदूरी का पूरा पैसा डकार लिया गया।
  • तकनीकी धोखाधड़ी: कुआं सीधा भूजल (Groundwater) से जुड़ा होता है। उसमें गंदा पानी डालना पूरे क्षेत्र के वाटर लेवल को जहरीला बनाने जैसा है। यह न सिर्फ आर्थिक अपराध है, बल्कि पर्यावरणीय अपराध भी है।

सिस्टम के ‘सफेदपोश’ इंजीनियर और उनकी चुप्पी

  • हैरानी की बात यह है कि क्या इस बंदरबांट में सिर्फ सचिव ही शामिल है? बिना तकनीकी जांच (Technical Verification) और बिना उच्चाधिकारियों के आशीर्वाद के इतना बड़ा “क्रेडिट” कैसे पास हो गया?
  • क्या जेई (JE) ने मौके पर जाकर जांच की? * क्या बीडीओ (BDO) को इस बात की खबर नहीं कि उनकी नाक के नीचे कुओं को गड्ढा बनाया जा रहा है?
  • कड़वा सच: उत्तर प्रदेश में जहां मुख्यमंत्री ‘बुलडोजर’ से न्याय की बात करते हैं, वहीं बस्ती के इस गांव में ‘कलम के कसाई’ सरकारी योजनाओं का गला घोंट रहे हैं।

ग्रामीणों का ऐलान: “अब आर-पार की जंग”

रामगढ़ ऊर्फ जंगल कठर के ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी धरोहर को गटर नहीं बनने देंगे। आईजीआरएस पर शिकायत तो महज शुरुआत है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि 15 दिनों के भीतर इस फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच कर रिकवरी नहीं की गई और दोषियों को सस्पेंड नहीं किया गया, तो वे जिलाधिकारी कार्यालय (DM Office) का घेराव करेंगे।

सत्ता के गलियारों से सवाल:

  • सवाल नंबर 1: क्या मुख्यमंत्री कार्यालय इस ‘अजूबे’ सचिव के खिलाफ कार्रवाई की मिसाल पेश करेगा?
  • सवाल नंबर 2: विकास खंड के अन्य गांवों में ऐसे कितने कुएं हैं जिन्हें कागजों में ‘सोखता’ बनाकर डकार लिया गया?
  • सवाल नंबर 3: क्या बस्ती मंडल के आला अधिकारी इस मामले में ‘ठंडी जांच’ की फाइल दबा देंगे या दोषियों को जेल भेजेंगे?

ग्रामीणों में भारी आक्रोश, सीधे CM से गुहार

अपनी पौराणिक और ऐतिहासिक विभूति (कुएं) को इस तरह ‘गटर’ बनते देख रामगढ़ ऊर्फ जंगल कठर के ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

  • आईजीआरएस (IGRS): ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है।
  • मांग: ग्रामीणों की मांग है कि इस फर्जीवाड़े की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषी सचिव पर कठोर कार्रवाई की जाए।
  • हमारा तीखा सवाल: क्या जिला प्रशासन इन “अजूबे” सचिव महोदय पर कार्रवाई की हिम्मत दिखाएगा? या फिर कागजों पर कुओं को सोखता गड्ढा बनाकर सरकारी खजाना इसी तरह लुटता रहेगा?
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