लोकसभा में मंगलवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। राम मंदिर और 1990 के कारसेवक गोलीकांड का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश ने सत्ता पक्ष पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार योजनाओं के नाम में “राम” जोड़ रही है, लेकिन लोकसभा में अभिनेता और भाजपा सांसद अरुण गोविल को सबसे पीछे बैठाया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर राम का सम्मान है तो उन्हें आगे की पंक्ति में बैठाया जाना चाहिए।
इसी दौरान सत्ता पक्ष के कुछ सांसदों ने टिप्पणी की कि कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले आज राम की बात कर रहे हैं। इस पर अखिलेश यादव भड़क गए और जवाब में कहा कि “जिन लोगों ने गोलियां चलवाईं, वही आज राम मंदिर बनवा रहे हैं। अगर जानकारी नहीं है तो जाकर पता कर लीजिए।”
अखिलेश का इशारा राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की ओर माना जा रहा है। नृपेंद्र मिश्रा वर्ष 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के प्रमुख सचिव थे, जब अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाने की घटना हुई थी।
हालांकि नृपेंद्र मिश्रा इस मुद्दे पर पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्होंने विवादित स्थल पर कारसेवकों को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई का विरोध किया था। उनके अनुसार निर्णय प्रशासनिक स्तर पर लिया गया था।
लोकसभा में इस बयानबाजी के दौरान कुछ देर के लिए माहौल गरम हो गया। राजनीतिक बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।