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शामली में जमीन विवाद के बीच 22 वर्षीय आदित्य ने खुद को लगाई आग, ₹50 हजार रिश्वत के आरोप से मचा हड़कंप

वीरमाला और आदित्य कुमार के बीच खसरा नंबर 647/2 की जमीन को लेकर विवाद

शामली में जमीन विवाद के बीच 22 वर्षीय आदित्य ने खुद को लगाई आग, ₹50 हजार रिश्वत के आरोप से मचा हड़कंप

वीरमाला और आदित्य कुमार के बीच खसरा नंबर 647/2 की जमीन को लेकर विवाद; एसडीएम के आदेश के बाद राजस्व टीम बाउंड्री हटाने पहुंची थी मौके पर

शामली। उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के थाना आदर्श मंडी क्षेत्र के ग्राम गोहरनी में जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद ने उस समय गंभीर रूप ले लिया, जब 22 वर्षीय आदित्य कुमार पुत्र मनोज निवासी ग्राम गोहरनी, थाना आदर्श मंडी, जनपद शामली ने कथित तौर पर अपने शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर खुद को आग लगा ली।

घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने आदित्य को तत्काल उपचार के लिए गोदावरी अस्पताल, शामली में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने उसकी हालत को देखते हुए बेहतर उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली रेफर कर दिया। प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, उपचाराधीन आदित्य की स्थिति फिलहाल सामान्य बताई गई है।

मामले में एक ओर आदित्य पक्ष की ओर से राजस्व विभाग के कानूनगो अमरीश शर्मा पर ₹50 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया जा रहा है, वहीं प्रशासन ने पूरे मामले की पृष्ठभूमि को जमीन के मालिकाना हक और बाउंड्री वॉल हटाने की कार्रवाई से जुड़ा विवाद बताया है।


🔴 खसरा नंबर 647/2 की जमीन को लेकर चल रहा था विवाद

प्रशासन के अनुसार, ग्राम गोहरनी में स्थित खसरा नंबर 647/2 की भूमि के मालिकाना हक को लेकर श्रीमती वीरमाला पत्नी स्वर्गीय रामनरेश निवासी ग्राम गोहरनी, थाना आदर्श मंडी, जनपद शामली और आदित्य कुमार पुत्र मनोज निवासी ग्राम गोहरनी, थाना आदर्श मंडी, जनपद शामली के बीच विवाद चल रहा था।

प्रशासन के अनुसार, वीरमाला और आदित्य कुमार एक ही परिवार से हैं।

इस भूमि को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था।


⚖️ 2013 से चल रहा था वाद

प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, उक्त भूमि के संबंध में उप जिलाधिकारी, सदर शामली के न्यायालय में वाद संख्या 146/2013 विचाराधीन था।

इस मामले में उप जिलाधिकारी, सदर शामली द्वारा 3 जून 2026 को आदेश पारित किया गया।

प्रशासन के अनुसार, इस आदेश में श्रीमती वीरमाला के पक्ष में निर्णय हुआ।

इसके बाद भूमि पर कब्जे को लेकर आगे की कार्रवाई शुरू हुई।


📜 27 जुलाई 2026 को राजस्व टीम गठित

प्रशासन के मुताबिक, 27 जुलाई 2026 को उप जिलाधिकारी, सदर शामली के आदेश के क्रम में श्रीमती वीरमाला की भूमि पर कथित अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई के लिए राजस्व टीम का गठन किया गया।

इस टीम को मौके पर जाकर भूमि की स्थिति की जांच करने और आदेश के अनुपालन में आवश्यक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई।


📏 14 अगस्त को दोनों पक्षों की मौजूदगी में हुई पैमाइश

प्रशासन के अनुसार, 14 अगस्त 2026 को राजस्व टीम द्वारा दोनों पक्षों की मौजूदगी में विवादित भूमि की पैमाइश की गई।

पैमाइश के दौरान मौके पर लगी एक तरफ की बाउंड्री वॉल को हटवा दिया गया।

प्रशासन का कहना है कि दूसरी तरफ की बाउंड्री वॉल को भी हटाने के संबंध में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी और आदित्य कुमार द्वारा शेष बाउंड्री वॉल स्वयं हटाने की बात कही गई थी।

लेकिन प्रशासन के अनुसार बाद में आदित्य कुमार ने शेष बाउंड्री वॉल नहीं हटाई।


📄 17 अगस्त को वीरमाला ने तहसील दिवस में दिया प्रार्थना पत्र

प्रशासन के मुताबिक, शेष बाउंड्री वॉल नहीं हटाए जाने के कारण श्रीमती वीरमाला पत्नी स्वर्गीय रामनरेश ने 17 अगस्त 2026 को तहसील दिवस में पुनः प्रार्थना पत्र दिया।

प्रार्थना पत्र के बाद पूर्व में गठित राजस्व टीम को शेष बाउंड्री वॉल हटाने की कार्रवाई के लिए मौके पर भेजा गया।


🚨 राजस्व टीम पहुंची तो पहले से मौजूद था आदित्य

प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, जब राजस्व टीम मौके पर पहुंची तो आदित्य कुमार पहले से ही घटनास्थल पर मौजूद था।

टीम द्वारा आदित्य से कथित कब्जा हटाने और शेष बाउंड्री वॉल हटाने के लिए कहा गया।

प्रशासन के मुताबिक, आदित्य ने बाउंड्री हटाने से मना कर दिया।

इसके बाद अचानक उसने कथित तौर पर अपने शरीर पर पहले से डाला हुआ ज्वलनशील पदार्थ आग के हवाले कर दिया।

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।


🏥 गोदावरी अस्पताल से सफदरजंग अस्पताल दिल्ली रेफर

मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल आदित्य को उपचार के लिए गोदावरी अस्पताल, शामली पहुंचाया।

अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बेहतर उपचार के लिए उसे सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली रेफर कर दिया।

प्रशासन की ओर से जारी जानकारी में बताया गया है कि उपचाराधीन आदित्य कुमार की स्थिति सामान्य है।


💰 अब सामने आया ₹50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप ₹50 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगने को लेकर सामने आया है।

आरोप है कि कानूनगो अमरीश शर्मा ने आदित्य से बाउंड्री वॉल नहीं गिराने के एवज में ₹50 हजार रुपये की मांग की थी।

आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि पैसे नहीं देने के बाद राजस्व टीम कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची।

हालांकि, ₹50 हजार की रिश्वत मांगने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई विस्तृत रिपोर्ट में कानूनगो अमरीश शर्मा द्वारा रिश्वत मांगने का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। प्रशासन ने घटना की वजह को भूमि विवाद, पूर्व न्यायिक आदेश और बाउंड्री वॉल हटाने की कार्रवाई से जोड़कर बताया है।

इसलिए रिश्वत के आरोप की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


🎥 दरोगा के वीडियो बनाने के दावे ने भी खड़े किए सवाल

घटना को लेकर यह दावा भी सामने आया है कि मौके पर मौजूद एक दरोगा घटना का वीडियो बना रहा था।

यदि ऐसा हुआ है तो यह भी जांच का विषय है कि घटना के दौरान पुलिसकर्मी की वास्तविक भूमिका क्या थी और क्या तत्काल बचाव के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए थे।

हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से अभी विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

यदि घटनास्थल की CCTV या मोबाइल वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है तो उसकी जांच से घटना के वास्तविक क्रम को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।


⚖️ अब जांच में खुलेंगे कई राज

इस मामले में अब कई महत्वपूर्ण सवाल सामने हैं—

पहला सवाल: खसरा नंबर 647/2 की जमीन पर वास्तविक मालिकाना हक किसके पक्ष में है?

दूसरा सवाल: वाद संख्या 146/2013 में 3 जून 2026 को पारित आदेश में क्या निर्देश दिए गए थे?

तीसरा सवाल: 27 जुलाई 2026 को गठित राजस्व टीम को किस आदेश के तहत कार्रवाई करनी थी?

चौथा सवाल: 14 अगस्त को हुई पैमाइश के दौरान दोनों पक्षों के बीच क्या सहमति बनी थी?

पांचवां सवाल: 17 अगस्त को वीरमाला द्वारा तहसील दिवस में दिए गए प्रार्थना पत्र के बाद टीम को मौके पर भेजने की प्रक्रिया क्या थी?

छठा सवाल: क्या कानूनगो अमरीश शर्मा ने वास्तव में ₹50 हजार की मांग की थी?

सातवां सवाल: घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या रही?

आठवां सवाल: घटना के दौरान बनाया गया कथित वीडियो क्या उपलब्ध है और उसमें क्या रिकॉर्ड हुआ?


प्रशासन और आरोप—दोनों पक्ष सामने

इस पूरे मामले में पत्रकारिता की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि प्रशासन और आरोप लगाने वाले पक्ष की कहानी में अंतर दिखाई दे रहा है।

प्रशासन का पक्ष

प्रशासन के अनुसार मामला वीरमाला और आदित्य कुमार के बीच खसरा नंबर 647/2 की जमीन के मालिकाना हक का विवाद है। एसडीएम के आदेश के बाद राजस्व टीम गठित हुई, 14 अगस्त को पैमाइश हुई और 17 अगस्त को दोबारा शिकायत मिलने के बाद टीम बाउंड्री हटाने पहुंची। प्रशासन का दावा है कि आदित्य ने स्वयं अपने शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाई।

आरोप लगाने वाले पक्ष का दावा

दूसरी ओर, आदित्य पक्ष की ओर से कानूनगो अमरीश शर्मा पर ₹50 हजार मांगने का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है। आरोप है कि रकम नहीं देने के बाद राजस्व टीम कार्रवाई के लिए पहुंची।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।


पुलिस कार्रवाई में जुटी

थाना आदर्श मंडी पुलिस द्वारा मामले में वैधानिक कार्रवाई किए जाने की बात प्रशासन की ओर से कही गई है।

अब जांच में यह सामने आना महत्वपूर्ण होगा कि घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और क्या किसी अधिकारी द्वारा कथित रूप से रिश्वत की मांग की गई थी।

फिलहाल आदित्य कुमार दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचाराधीन है और प्रशासन के अनुसार उसकी स्थिति सामान्य बताई गई है।

यह मामला केवल एक किसान के खुद को आग लगाने की घटना नहीं, बल्कि भूमि विवाद, राजस्व कार्रवाई, कथित रिश्वत मांग और पुलिस की भूमिका से जुड़े कई गंभीर सवालों को सामने लाता है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।


🔴 बड़ी खबर | शामली | विशेष रिपोर्ट

22 वर्षीय आदित्य ने खेत में खुद को लगाई आग
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दरोगा द्वारा वीडियो बनाए जाने के दावे पर भी सवाल
थाना आदर्श मंडी पुलिस कर रही वैधानिक कार्रवाई

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✍️ विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक: वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
सहारनपुर

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