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देहरादून नहर कांड: संतोष नेगी की बहन पूजा की संदिग्ध मौत मामले में न्याय की मांग, DNA रिपोर्ट और CDR जांच पर टिकी निगाहें

देहरादून क्षेत्र की नहर में मिले अज्ञात महिला के शव और 'काजल' उर्फ पूजा नेगी (संतोष नेगी की बहन) की संदिग्ध मौत के मामले में 2 साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। घटना को करीब 28 महीने (2 साल 4 महीने) बीत चुके हैं, लेकिन आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर घूम रहा है, जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 26 अप्रैल 2024 को मिला था शव मामला 26 अप्रैल 2024 का है, जब देहरादून के नहर क्षेत्र से एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ था। शिनाख्त और फॉरेंसिक जांच के तहत DNA सैंपल लिए गए और ZIP Net (Missing Persons Network) पर भी मामला दर्ज किया गया। SSP कार्यालय के आधिकारिक दस्तावेजों और 22 सितंबर 2025 की प्रविष्टियों के बावजूद, मामले की जांच कछुआ गति से आगे बढ़ रही है। 28 महीने की देरी पर उठे गंभीर सवाल: खुले घूम रहे आरोपी: घटना के इतने लंबे समय बाद भी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होना परिजनों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। DNA और फॉरेंसिक रिपोर्ट में ढिलाई: DNA मिलान और फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट की सुस्त रफ्तार पर परिजनों ने गहरा असंतोष जताया है। CDR और जांच की स्थिति: कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और स्थानीय साक्ष्यों के बावजूद ठोस कानूनी कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद खो रहा है। परिजनों और स्थानीय जनता का आक्रोश संतोष नेगी और उनके परिवार का कहना है कि इतने महीनों के इंतजार के बाद भी उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। पुलिस की इस सुस्ती का फायदा उठाकर आरोपी बेखौफ बाहर घूम रहे हैं। परिजनों ने मांग की है कि: मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट या उच्च स्तरीय जांच टीम (SIT) को सौंपा जाए। DNA परीक्षण की अंतिम स्थिति तुरंत सार्वजनिक की जाए। आरोपी को अविलंब गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाए। यदि प्रशासन ने जल्द ही इस मामले में कड़ा रुख नहीं अपनाया, तो पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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