
अजीत मिश्रा (खोजी)
हरैया सीएचसी: जहां इलाज नहीं, बीमारियां परोसी जा रही हैं; ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के गाल पर तमाचा है अस्पताल की बदहाली
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
- स्वच्छता अभियान को लगा पलीता: हरैया अस्पताल में गंदगी के बीच दम तोड़तीं सुविधाएं।
- सफेद कोट के पीछे काला सच: हरैया सीएचसी में मरीजों की सेहत से बड़ा खिलवाड़। शौचालय में सड़ांध और हैंडपंप पर कीड़ों का पहरा, आखिर क्या कर रहा है अस्पताल प्रशासन?
- सरकारी बजट की बंदरबांट या लापरवाही? बदबू मारते अस्पतालों में कैसे होगा इलाज? हरैया सीएचसी की खुली पोल: कागजों पर ‘चकाचक’, जमीन पर ‘नरक’।
- सावधान! हरैया सीएचसी जा रहे हैं तो साथ में मास्क और पानी घर से ले जाएं। हरैया अस्पताल का ‘गंदा’ सच: तस्वीरें देख दहल जाएगा आपका दिल।
- बस्ती मंडल ग्राउंड रिपोर्ट: क्या इसी ‘राम राज्य’ की कल्पना स्वास्थ्य विभाग ने की थी? प्रशासन मौन, जनता परेशान: हरैया सीएचसी बनी बीमारियों का अड्डा।
- हरैया सीएचसी का अजूबा: यहाँ इलाज से पहले गंदगी का ‘स्वागत’ अनिवार्य है। स्वच्छ भारत मिशन का ‘शव’ देखना हो तो हरैया अस्पताल आइए!
बस्ती। जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हरैया की सूरत इन दिनों किसी कबाड़खाने या कूड़ाघर से कम नजर नहीं आ रही है। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद, यहाँ का स्थानीय प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन संवेदनहीनता की चादर ओढ़कर सोया हुआ है। जिस परिसर को संक्रमण मुक्त होना चाहिए था, वह आज खुद संक्रमण का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है।

शौचालय नहीं, बदबू का टापू: मरीजों के मौलिक अधिकारों का हनन
अस्पताल परिसर में लाखों की लागत से बने 5 सीटर सामुदायिक शौचालय की स्थिति वर्तमान में नरकीय है। शौचालय के भीतर सफाई की कौन कहे, वहां पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। चारों ओर फैली गंदगी और सड़ांध मारती दीवारों के कारण मरीज अंदर जाने से कतरा रहे हैं। सबसे बुरा हाल महिला मरीजों और उनके साथ आए तीमारदारों का है, जिन्हें मजबूरी में अस्पताल से बाहर अन्य ठिकानों की तलाश करनी पड़ती है। क्या शासन द्वारा शौचालय निर्माण के लिए दिया गया बजट केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित रह गया है?
दूषित पेयजल: हैंडपंपों पर कीड़े-मकोड़ों का पहरा
सीएचसी परिसर में लगे सरकारी हैंडपंपों की तस्वीर जिला प्रशासन को आईना दिखाने के लिए काफी है। हैंडपंप के चारों ओर महीनों से जमा गंदा पानी अब सड़ चुका है, जहाँ मक्खियों और कीड़े-मकोड़ों का भारी जमावड़ा लगा रहता है। अस्पताल में आने वाले गरीब मरीज इसी गंदगी के बीच से पानी पीने को विवश हैं। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिससे टाइफाइड और हैजा जैसी बीमारियों का खतरा अस्पताल के भीतर ही मंडरा रहा है।
प्रशासनिक मौन पर उठते गंभीर सवाल
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की आँखों पर आखिर कौन सी पट्टी बंधी है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। स्वच्छता अभियान के नाम पर फोटो खिंचवाने वाले अधिकारी जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।
जनता की हुंकार: अब आर-पार की लड़ाई
स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग और मरीजों के परिजनों ने दो-टूक शब्दों में स्वास्थ्य विभाग को चेतावनी दी है। उनकी मांग है कि:
- तत्काल सफाई अभियान चलाकर शौचालय और परिसर को संक्रमण मुक्त किया जाए।
- पेयजल स्रोतों के आसपास जलभराव की समस्या का स्थाई समाधान हो।
- लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष: हरैया सीएचसी की यह तस्वीर सरकारी तंत्र की विफलता की कहानी चीख-चीख कर कह रही है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह अस्पताल किसी बड़े हादसे या महामारी का केंद्र बन सकता है। अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटती है या भ्रष्टाचार और लापरवाही का यह खेल इसी तरह जारी रहता है।















