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“बस्ती में ‘खाकी’ का खेल: चौकी के सामने से टैम्पो पार, तीन दिन बाद भी मुकदमा ‘फरार’!”

"त्रिनेत्र के 'अंधे' चश्मे: करोड़ों के कैमरों के नीचे से चोर ले उड़े टैम्पो, नगर पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल।"

अजीत मिश्रा (खोजी)

विशेष रिपोर्ट: खाकी का ‘झूठा’ इकबाल और ‘त्रिनेत्र’ के अंधे चश्मे!

  • “पैर में जूट का बोरा और जुबां पर झूठी वाहवाही: एनकाउंटर स्पेशलिस्ट साहब के राज में सुरक्षित नहीं गरीब की कमाई।”
  • “साहब को चमकाना है ‘जीरो ग्राफ’, इसलिए नहीं दर्ज हो रहे इंसाफ; फुटहिया चौकी के सामने हुई चोरी ने खोली पोल।”
  • “चोरों से याराना या काम से किनारा? कप्तान के आदेश ठेंगे पर, नगर थाना अध्यक्ष की लापरवाही की भेंट चढ़ा पीड़ित।”

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

बस्ती। जनपद में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं या फिर पुलिस की मिलीभगत? यह सवाल आज बस्ती की जनता पूछ रही है। जहां एक ओर जिले के आला अधिकारी अपराध मुक्त प्रदेश का दावा ठोक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर थाना क्षेत्र की फुटहिया चौकी के ठीक सामने से चोरों ने एक गरीब का निवाला (टैम्पो) उड़ा दिया और पुलिस तीन दिनों से गहरी नींद में सोई है।

मिशन ‘त्रिनेत्र’ की उड़ी धज्जियां, कैमरे निकले ‘शोपीस’

हैरानी की बात यह है कि जिस चौराहे पर ‘मिशन त्रिनेत्र’ के तहत करोड़ों के सीसीटीवी कैमरों का ढिंढोरा पीटा जाता है, वहां पुलिस का दावा है कि कैमरे खराब हैं। क्या यह चोरों को दिया गया खुला संरक्षण है या पुलिस की लापरवाही? चौकी के नाक के नीचे से UP 51 AT 6566 नंबर की टैम्पो गायब हो जाना और पुलिस का हाथ पर हाथ धरे बैठना खाकी की कार्यशैली पर कालिख पोत रहा है।

साहब को ‘जीरो ग्राफ’ चमकाना है, चाहे फरियादी के चप्पल घिस जाएं

पीड़ित रोहित सिंह तीन दिनों से थाने के चक्कर काट रहा है, लेकिन ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ कहलाने वाले थाना प्रभारी को शायद मुकदमा दर्ज करने में डर लग रहा है।

  • खेल क्या है? दरअसल, कागजों पर अपराध का ग्राफ ‘जीरो’ दिखाने की होड़ मची है।
  • तरीका क्या है? मुकदमे दर्ज मत करो, फरियादी को इतना दौड़ाओ कि वह खुद थक कर घर बैठ जाए।

जूट का बोरा और बनावटी बहादुरी!

शहर में चर्चा आम है कि पैरों में जूट का बोरा बांधकर फर्जी वाहवाही लूटने वाले ये ‘शूरवीर’ असली चोरों के सामने नतमस्तक हैं। क्या कप्तान साहब के आदेशों की धज्जियां उड़ाना ही अब नगर थाना प्रभारी का मुख्य काम रह गया है?

बड़ा सवाल: क्या बस्ती पुलिस का चोरों से पुराना ‘याराना’ है? अगर नहीं, तो चौकी के सामने से हुई चोरी का मुकदमा दर्ज करने में तीन दिन की देरी क्यों?

अगर पुलिस का यही रवैया रहा तो जनता का कानून से विश्वास उठना तय है। एक तरफ एनकाउंटर का शोर और दूसरी तरफ एक गरीब की टैम्पो न ढूंढ पाना—यह बस्ती पुलिस के चेहरे पर लगा वो दाग है जिसे मिटाना अब उनके बस की बात नहीं लग रही।

  • मिशन त्रिनेत्र के कैमरों को बताया जा रहा खराब, चोरों को मिल रहा खुला संरक्षण।
  • मुकदमा दर्ज करने के बजाय शिकायतकर्ता को थाने के चक्कर कटवा रही पुलिस।
  • फुटहिया चौकी के सामने से टैम्पो गायब, पुलिस की ‘एनकाउंटर’ वाली बहादुरी पर भारी पड़े चोर।

बस्ती की जनता पूछती है: साहब, ये ‘एनकाउंटर’ वाली बहादुरी सिर्फ कागजों और जूट के बोरों तक ही सीमित है क्या?

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