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विकास से कोसों दूर सगमा प्रखंड — जनता पूछ रही, “आखिर कब बदलेगी सगमा की तस्वीर?”

गढ़वा जिले का सगमा प्रखंड आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संघर्ष कर रहा है। प्रखंड बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, बैंकिंग, सुरक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं का विस्तार होगा, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी सगमा विकास की मुख्यधारा से काफी पीछे दिखाई देता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज भी कई आवश्यक सरकारी कार्यालय और सुविधाएँ यहाँ उपलब्ध नहीं हैं। जनता का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की अनदेखी के कारण सगमा लगातार पिछड़ता जा रहा है।
सड़क और यातायात व्यवस्था बदहाल
सगमा प्रखंड की सबसे बड़ी समस्याओं में सड़क व्यवस्था शामिल है। गांवों को जोड़ने वाली कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। बरसात के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं। कीचड़ और गड्ढों के कारण लोगों का आवागमन मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि मरीजों को अस्पताल ले जाने में परेशानी होती है, स्कूली बच्चों को आने-जाने में कठिनाई होती है और किसानों को अपनी फसल बाजार तक पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बिजली व्यवस्था पर भी सवाल
प्रखंड क्षेत्र में नियमित बिजली आपूर्ति आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई गांवों में घंटों बिजली कटौती होती है। लो-वोल्टेज की समस्या के कारण घरेलू कार्य, पढ़ाई और छोटे व्यवसाय प्रभावित होते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल इंडिया की बात तो होती है, लेकिन सगमा के कई इलाकों में अब भी बिजली व्यवस्था पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाई है।
शिक्षा व्यवस्था की कमजोर स्थिति
स्थानीय लोगों के अनुसार सगमा में आज तक समुचित सरकारी हाई स्कूल और उच्च विद्यालय की सुविधा विकसित नहीं हो सकी है। छात्र-छात्राओं को दूर-दराज़ के क्षेत्रों में पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है।
लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कस्तूरबा विद्यालय की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होने से क्षेत्र का भविष्य बदल सकता है।
थाना नहीं, सुरक्षा व्यवस्था कमजोर
प्रखंड बनने के बावजूद सगमा प्रखंड में थाना की सुविधा नहीं होना लोगों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। छोटी-बड़ी शिकायतों और कानूनी कार्यों के लिए लोगों को दूसरे क्षेत्रों का सहारा लेना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि थाना नहीं होने के कारण कई मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती और लोगों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है।
वन विभाग का कार्यालय नहीं होने से बढ़ रही परेशानी
सगमा क्षेत्र जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा इलाका माना जाता है, लेकिन यहां आज तक वन विभाग का समुचित कार्यालय स्थापित नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की स्थानीय ऑफिस नहीं होने के कारण जंगल से जुड़े मामलों, वन संरक्षण, लकड़ी तस्करी, वन भूमि विवाद और ग्रामीणों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पाता।
वन क्षेत्र से जुड़े ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी दूर जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सगमा में वन विभाग का कार्यालय स्थापित हो, तो जंगलों की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीणों को भी सुविधा मिलेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से मिल सकेगा।
बैंकिंग सुविधा का अभाव
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा सगमा में स्थापित नहीं हो सकी है। लोगों को बैंकिंग कार्यों के लिए दूर-दराज़ के क्षेत्रों में जाना पड़ता है।
छात्रवृत्ति, पेंशन, किसान योजना और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों में ग्रामीणों को काफी परेशानी होती है। बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
किसान भी परेशान
सगमा की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन किसानों के लिए पर्याप्त सिंचाई और कृषि सुविधा उपलब्ध नहीं है। समय पर पानी नहीं मिलने से खेती प्रभावित होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार सिंचाई योजना, कृषि केंद्र और किसानों के लिए आधुनिक संसाधनों की व्यवस्था करे, तो क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों में विधायक, मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति नाराज़गी दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में क्षेत्र की समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
लोगों का आरोप है कि न जनप्रतिनिधि सगमा की आवाज़ को मजबूती से उठा रहे हैं और न ही अधिकारी विकास कार्यों के लिए गंभीर दिखाई दे रहे हैं।
जनता की प्रमुख माँगें
सगमा की जनता सरकार और प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग कर रही है। लोगों की मुख्य माँगें हैं —
थाना की स्थापना
कस्तूरबा विद्यालय का निर्माण
सरकारी हाई स्कूल और उच्च विद्यालय की सुविधा
बेहतर सड़क और पुल निर्माण
नियमित बिजली आपूर्ति
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा की स्थापना
वन विभाग का स्थानीय कार्यालय
किसानों के लिए सिंचाई और कृषि सुविधा
स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
“विकास केवल भाषणों में नहीं, ज़मीन पर दिखना चाहिए”
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह उपेक्षा होती रही, तो आने वाले वर्षों में भी सगमा प्रखंड विकास की दौड़ में पीछे ही रहेगा।
अब सगमा की जनता सरकार और जनप्रतिनिधियों से यही सवाल पूछ रही है —
“आखिर कब मिलेगा सगमा को उसका अधिकार और कब बदलेगी इस प्रखंड की तस्वीर?”

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