
*” कथा मनोरंजन के लिए बल्कि मनोमंजन के लिए हैं:सुश्री भावना मार्कण्डेय”*
बांगरदा (खरगोन )- भक्ति दो प्रकार कि होती हैं।पहली श्रद्धा व विश्वास से परिपूर्ण एवं दूसरी समर्पण भाव से परिपूर्ण।हरी सर्वत्र समाया हुवा हैं।जब जीवन से लोभ, मोह, माया एवं अहंकार का पर्दा उठता हैं, तब ईश्वर कि कृपा मिलना प्रारम्भ होती हैं। भगवान कृष्ण के जीवन दर्शन में भक्ति मार्ग, ज्ञान मार्ग, कर्म मार्ग एवं प्रेम मार्ग का समावेश हैं। गोपी एक पद का नाम हैं जिसे जीवन में पात्रता विकसित करके ही प्राप्त किया जा सकता हैं।
उक्त विचार श्री रेवा गुर्जर मांगलिक भवन बांगरदा में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के षष्टम दिवस पर कथा वाचक सुश्री भावना मार्कण्डेय ने व्यक्त किये।उन्होंने द्रोपदी चिर हरण के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुवे कहा जब समर्पण व श्रद्धा – भक्ति के भाव से भक्त, भगवान से जुड़ता हैं,तब अनेक कष्टों एवं समस्याओं से भगवान अपने भक्तों को बचा लेते हैं।जब भक्त पुर्ण विश्वास के साथ भगवान कि ओर एक कदम आगे बढ़ाता हैं। तो भगवान दस कदम आगे बढ़ाकर उसे गले लगा लेते हैं। भक्त जब करुणामयी भाव से एक आँसू निकालता हैं, तो भगवान उसके लिए खुशियों के भंडार खोल देते हैं। जब भगवान के कार्य के लिए भक्त अपनी झोली फैलाकार अंशदान मांगता हैं तो भगवान उसके लिए कुबेर के भंडार खोल देते हैं।नारी शक्ति आदि शक्ति हैं।जहाँ नारियों कि पुजा होती हैं वहाँ देवता भी प्रसन्न रहते हैं।
कथा के प्रारम्भ में हुकुम चंद पटेल एवं मंजुला पटेल द्वारा मुख्य जोड़े के रूप में श्रीमद भागवत पुराण का पूजन किया गया।तत्पश्चात् शुभम पटेल एवं पायल पटेल द्वारा जोड़े से कथावाचक दीदी एवं संगीत टोली का मंगल तिलक करते हुवे पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया गया।कथा के दौरान संगीत टोली द्वारा कृष्ण भगवान के बाल स्वरुप का दर्शन करने आये भगवान शिव के प्रसंग से जुड़ा भजन प्रस्तुत किया गया। जिस पर श्रद्धालु जमकर थिरके।अंत में आभार नानकराम जी पटल्या ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहें।
:- रामेश्वर फुलकर पत्रकार बांगरदा

















