बस्ती के दो निजी अस्पतालों पर आयुष्मान योजना में वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप
निजी अस्पताल फर्जी क्लेम, कागजी मरीजों और बिना इलाज के बिल पास कराने के खेल में संलिप्त पाए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर देश के टैक्सपेयर्स के पैसों की खुली लूट है।
अजीत मिश्रा (खोजी)
आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े का खेल या कागजी पर्दा? बस्ती के दो अस्पतालों पर उठे गंभीर सवाल
- स्टार हॉस्पिटल (पचपेड़िया रोड) और प्रकाश मेडिकल सेंटर (कैली रोड) के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच की मांग
- शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के CEO को भेजा पत्र, आरटीआई (RTI) के तहत जानकारी देने से इनकार करने पर उठे सवाल
- मजीजों के उपचार, आधार प्रमाणीकरण और क्लेम प्रक्रिया की पारदर्शी जांच कराने की मांग
बस्ती जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे खेल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पचपेड़िया रोड स्थित स्टार हॉस्पिटल और कैली रोड (जामडीह) स्थित प्रकाश मेडिकल सेंटर पर आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। मामला सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि योजना के नाम पर चल रहे कथित फर्जीवाड़े की परतें उघाड़ने के लिए अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
जब देश और प्रदेश की सरकारें गरीब और जरूरतमंदों के इलाज के लिए सरकारी तिजोरी का मुंह खोल रही हैं, तब इस तरह की योजना का दुरुपयोग आम जनता के विश्वास के साथ सीधा छल है। 
आरटीआई (RTI) से पर्दा डालने की कोशिश?
इस पूरे प्रकरण का सबसे संदिग्ध पहलू अस्पतालों का जवाब है। जब एक सतर्क नागरिक ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम-2005 के तहत इन अस्पतालों से योजना के अंतर्गत हुए उपचार, क्लेम और वित्तीय लेन-देन का ब्योरा मांगा, तो दोनों ही अस्पतालों ने लगभग एक जैसी भाषा में जानकारी देने से इनकार कर दिया।
अस्पतालों का तर्क था कि मांगी गई सूचनाएं मरीजों की निजता (Privacy) से जुड़ी हैं। यह तर्क अपने आप में कई सवाल खड़े करता है—
- क्या प्रशासनिक, वित्तीय और सरकारी अनुदान से जुड़े क्लेम की पारदर्शिता मांगना मरीज की निजता का हनन है?
- क्या ‘निजता’ के आड़ में सरकारी धन के दुरुपयोग को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है?
- जब दोनों अस्पतालों के जवाब शब्द-दर-शब्द लगभग समान थे, तो क्या इसके पीछे कोई सुनियोजित पर्दादारी है?
जनता की गाढ़ी कमाई की लूट?
आयुष्मान भारत योजना का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना है। लेकिन यदि निजी अस्पताल फर्जी क्लेम, कागजी मरीजों और बिना इलाज के बिल पास कराने के खेल में संलिप्त पाए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर देश के टैक्सपेयर्स के पैसों की खुली लूट है।
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री योजना के CEO के समक्ष जो चार प्रमुख मांगें रखी हैं, वे आज के समय की सबसे बड़ी मांग हैं:
- स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच: दोनों अस्पतालों के पूरे रिकॉर्ड की पारदर्शी जांच हो।
- दस्तावेजों का सत्यापन: आधार प्रमाणीकरण, उपचार अभिलेख और भुगतान की फाइलों को खंगाला जाए।
- कठोर कार्रवाई: यदि अनियमितता या फर्जीवाड़ा साबित होता है, तो अस्पतालों के लाइसेंस रद्द करने और दंडात्मक कार्रवाई में कोई कोताही न बरती जाए।
- जवाबदेही: जांच के परिणामों से शिकायतकर्ता और जनता को अवगत कराया जाए।
समय आ गया है कड़े संदेश का
बस्ती के लोग अब स्वास्थ्य माफियाओं और कागजी दस्तावेजों पर पलने वाले अस्पतालों के कारनामों से तंग आ चुके हैं। यदि स्वास्थ्य विभाग और शासन स्तर पर इस मामले में त्वरित, निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह न सिर्फ भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा बल्कि जरूरतमंदों के अधिकारों पर भी कुठाराघात होगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस सनसनीखेज शिकायत पर कब तक और क्या प्रभावी कार्रवाई करता है, या फिर यह फाइल भी फाइलों के ढेर में दबकर दम तोड़ देगी? बस्ती की जनता को निष्पक्ष जांच और दूध का दूध, पानी का पानी होने का इंतजार है।













