डुमरियागंज के नायब तहसीलदार और एसएचओ श्रीप्रकाश यादव पर लगाए गए गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप।
एक सत्ताधारी दल के वरिष्ठ नेता द्वारा सीधे प्रदेश के मुखिया को इस प्रकार का शिकायती पत्र भेजे जाने से जिले के प्रशासनिक और पुलिस गलियारों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि यदि शासन स्तर से इस मामले में संज्ञान लेकर विजिलेंस या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से जांच बैठाई जाती है, तो कई अन्य परतें भी खुल सकती हैं।
अजीत मिश्रा (खोजी)
डुमरियागंज में सियासी और प्रशासनिक घमासान तेज: भाजपा नेता अजय त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को भेजा विस्तृत शिकायती पत्र, भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के गंभीर आरोपों से मचा हड़कंप
- दोनों अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों की उच्च स्तरीय जांच कराने की उठी पुरजोर मांग।
- पत्र में आय से अधिक संपत्ति और प्रशासनिक कार्यों में कथित अनियमितताओं का किया गया उल्लेख।
- एसएचओ श्रीप्रकाश यादव पर पहले भी अवैध वसूली और मनमाने रवैये के लगते रहे हैं आरोप।
- निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराकर सख्त कार्रवाई की मांग से पुलिस और प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप।
सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज क्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी और चर्चित खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय त्रिपाठी उर्फ मुन्ना ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक बेहद गंभीर और विस्तृत शिकायती पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र में उन्होंने डुमरियागंज के नायब तहसीलदार और एसएचओ (थानाध्यक्ष) श्रीप्रकाश यादव पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और अवैध वसूली के संगीन आरोप लगाए हैं। पत्र के सार्वजनिक होने और शासन स्तर पर पहुँचने के बाद से ही स्थानीय प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भूचाल आ गया है।

शिकायती पत्र की मुख्य बातें और लगाए गए गंभीर आरोप
भाजपा नेता अजय त्रिपाठी द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में दोनों अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर कई बड़े बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं:
- चल-अचल संपत्तियों की उच्च स्तरीय जांच की मांग: पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दोनों अधिकारियों ने अपने कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर पद का दुरुपयोग कर अकूत संपत्ति अर्जित की है। भाजपा नेता ने मांग की है कि इन अधिकारियों की संपूर्ण चल और अचल संपत्तियों की किसी निष्पक्ष और उच्च स्तरीय एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि इनकी वास्तविक आय और संपत्तियों का सच सामने आ सके।
- आय से अधिक संपत्ति का मामला: शिकायत में उल्लेख किया गया है कि इन अधिकारियों के पास उनकी वैध आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक अनुपातहीन संपत्ति है। भूमि खरीद, संपत्तियों में निवेश और अन्य माध्यमों से जुटाई गई संपत्ति को लेकर भी कई सवाल खड़े किए गए हैं।
- प्रशासनिक और विभागीय कार्यों में अनियमितताएं: पत्र के अनुसार, क्षेत्र में होने वाले विभिन्न प्रशासनिक, राजस्व और विभागीय कार्यों में नियमों को ताक पर रखकर कथित तौर पर मनमानी और अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे शासन की छवि धूमिल हो रही है।
एसएचओ श्रीप्रकाश यादव की कार्यशैली पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
इस विवाद के केंद्र में आए एसएचओ श्रीप्रकाश यादव का कार्यकाल शुरू से ही स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। सूत्रों और स्थानीय नागरिकों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, उन पर पूर्व में भी विभिन्न मामलों में अवैध वसूली, मनमाने तरीके से मामलों को हैंडल करने और जनता के साथ असहयोगपूर्ण रवैया अपनाने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, इस बार मामला केवल स्थानीय स्तर की शिकायतों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि सत्ताधारी दल के एक जिम्मेदार नेता द्वारा सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराए जाने के कारण यह मामला तूल पकड़ चुका है।
प्रशासनिक और पुलिस महकमे में खलबली
एक सत्ताधारी दल के वरिष्ठ नेता द्वारा सीधे प्रदेश के मुखिया को इस प्रकार का शिकायती पत्र भेजे जाने से जिले के प्रशासनिक और पुलिस गलियारों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि यदि शासन स्तर से इस मामले में संज्ञान लेकर विजिलेंस या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से जांच बैठाई जाती है, तो कई अन्य परतें भी खुल सकती हैं।
फिलहाल, इस सनसनीखेज शिकायत के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन स्तर से इस शिकायती पत्र पर क्या कार्रवाई की जाती है और क्या वाकई इन दोनों अधिकारियों की संपत्तियों की उच्च स्तरीय जांच का आदेश जारी होता है या नहीं।
















