डीएम को तीन सदस्यीय जांच टीम (प्रशासनिक, पुलिस और अभियोजन अधिकारी) से जांच कराने के निर्देश; सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश कुमार श्रीवास्तव और बीडीओ त्रिवमणि की बढ़ी मुश्किलें
वित्त एवं 15वें वित्त आयोग से मिलने वाले धन के दुरुपयोग के लिए क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष और बीडीओ को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जाता है। चूंकि इन सभी भुगतानों पर प्रमुख और बीडीओ के हस्ताक्षर होते हैं, इसलिए सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश कुमार श्रीवास्तव और बीडीओ त्रिवमणि का इस मामले से बचना मुश्किल नजर आ रहा है।
अजीत मिश्रा (खोजी)
भ्रष्टाचार के सैनिक: लोकायुक्त के जाल में फंसे सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश और बीडीओ, जांच के आदेश से हड़कंप
- निर्माण कार्यों में फर्जीवाड़ा: आरसीसी, सीसी सड़क, पुलिया, इंटरलॉकिंग, खड़ंजा और ह्यूम पाइप निर्माण कार्यों की स्वीकृति एवं भुगतान में भारी अनियमितताएं बरती गईं।
- नगर पालिका के कार्यों पर दावा: नगर पालिका द्वारा पूर्व में कराए गए कार्यों को अपना बताकर लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया, जिसके समर्थन में 262 बिल वाउचर पेश किए गए हैं।
- मरम्मत और साज-सज्जा के नाम पर लूट: सदर क्षेत्र में लगाए गए वाटर कूलर, विकास खंड कार्यालय एवं सभागार की मरम्मत, साज-सज्जा, डेकोरेशन और सहकारी समिति भवनों के जीर्णोद्धार पर खर्च की गई धनराशि में भी बड़ा खेल किया गया।
बस्ती: जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐतिहासिक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। पत्रकार फूलचंद चौधरी की शिकायत पर लोकायुक्त ने क्षेत्र पंचायत निधि से कराए गए कार्यों में भारी घोटाले की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह पहला मौका है जब मनरेगा या ग्राम निधि के दायरे से हटकर सीधे ‘क्षेत्र पंचायत निधि’ से कराए गए विकास कार्यों में लोकायुक्त स्तर से जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस कड़े कदम से सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश कुमार श्रीवास्तव और बीडीओ त्रिवमणि की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
262 पन्नों के बिल वाउचर और पुख्ता सबूतों पर मुहर
यह पूरा मामला लगभग 262 पन्नों के बिल वाउचर और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ा है, जो पिछले पाँच माह से लंबित था। गहन छानबीन के बाद, लोकायुक्त ने जिला मजिस्ट्रेट (DM) को तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया है। इस विशेष टीम में एक प्रशासनिक अधिकारी, एक पुलिस अधिकारी और एक अभियोजन अधिकारी को शामिल किया गया है।
विकास कार्यों के नाम पर किस तरह हुआ खेल?
लोकायुक्त को दी गई शिकायत में खुलासा हुआ है कि क्षेत्र पंचायत निधि के राज्य वित्त और 15वें वित्त आयोग से मिले धन का जमकर दुरुपयोग किया गया है। घोटाले के मुख्य बिंदुओं में शामिल हैं:
- निर्माण कार्यों में फर्जीवाड़ा: आरसीसी, सीसी सड़क, पुलिया, इंटरलॉकिंग, खड़ंजा और ह्यूम पाइप निर्माण कार्यों की स्वीकृति एवं भुगतान में भारी अनियमितताएं बरती गईं।
- नगर पालिका के कार्यों पर दावा: नगर पालिका द्वारा पूर्व में कराए गए कार्यों को अपना बताकर लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया, जिसके समर्थन में 262 बिल वाउचर पेश किए गए हैं।
- मरम्मत और साज-सज्जा के नाम पर लूट: सदर क्षेत्र में लगाए गए वाटर कूलर, विकास खंड कार्यालय एवं सभागार की मरम्मत, साज-सज्जा, डेकोरेशन और सहकारी समिति भवनों के जीर्णोद्धार पर खर्च की गई धनराशि में भी बड़ा खेल किया गया।
मुख्य बातें
- शिकायतकर्ता: पत्रकार फूलचंद चौधरी
- मुख्य आरोपी: सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश कुमार श्रीवास्तव और बीडीओ त्रिवमणि
- मामला: क्षेत्र पंचायत निधि से कराए गए कार्यों में घोटाला और वित्तीय अनियमितताएं
- साक्ष्य: 262 पन्ने के बिल वाउचर
- जांच दल: डीएम द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम (एक प्रशासनिक, एक पुलिस और एक अभियोजन अधिकारी)
घोटाले का विवरण
- निधि का दुरुपयोग: वित्त एवं 15वें वित्त आयोग से मिले धन तथा क्षेत्र पंचायत निधि के राज्य वित्त का जमकर दुरुपयोग किया गया है।
- फर्जीवाड़ा: आरसीसी, सीसी सड़क, पुलिया, इंटरलाकिंग, खड़ंजा, ह्यूम पाइप निर्माण कार्यों की स्वीकृति एवं भुगतान में गड़बड़ी की गई।
- अन्य मामले: नगर पालिका द्वारा कराए गए कार्यों को अपना बताकर लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया, जिसके समर्थन में 262 बिल वाउचर प्रस्तुत किए गए हैं। इसके अलावा सदर क्षेत्र में लगाए गए वाटर कूलर, विकास खंड कार्यालय एवं सभागार की मरम्मत, साज-सज्जा, डेकोरेशन और सहकारी समिति भवनों की मरम्मत जैसे कार्यों में भी अनियमितताएं पाई गईं।
बड़ी प्रशासनिक और कानूनी चुनौतियाँ
- पहली बार बड़ी कार्रवाई: यह पहली बार है जब मनरेगा या ग्राम निधि के बजाय सीधे क्षेत्र पंचायत निधि से कराए गए कार्यों की जांच के आदेश लोकायुक्त द्वारा दिए गए हैं।
- मुश्किलें: चूंकि भुगतान पर प्रमुख और बीडीओ के हस्ताक्षर होते हैं, इसलिए सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश कुमार श्रीवास्तव और बीडीओ त्रिवमणि की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
- पारदर्शिता और निगरानी: आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर मामले में लीपापोती करना आसान नहीं होगा। यदि जांच टीम ने क्लीन चिट दी भी, तो पुनः जांच के आदेश दिए जा सकते हैं जो लोकायुक्त की निगरानी में होंगे। शिकायतकर्ता के अपनी शिकायत पर अडिग रहने से दोषियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
जिम्मेदारों की घेराबंदी और प्रशासनिक मुश्किलें
वित्त एवं 15वें वित्त आयोग से मिलने वाले धन के दुरुपयोग के लिए क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष और बीडीओ को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जाता है। चूंकि इन सभी भुगतानों पर प्रमुख और बीडीओ के हस्ताक्षर होते हैं, इसलिए सदर ब्लॉक प्रमुख राकेश कुमार श्रीवास्तव और बीडीओ त्रिवमणि का इस मामले से बचना मुश्किल नजर आ रहा है।
जानकारों का मानना है कि यदि जांच के दौरान लीपापोती करने या बचाने की कोशिश भी की गई, तो आरटीआई के तहत पहले ही पर्याप्त दस्तावेज सार्वजनिक हो चुके हैं। यदि स्थानीय स्तर पर क्लीन चिट दी भी जाती है, तो लोकायुक्त की सीधी निगरानी में पुनः जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। चूँकि शिकायतकर्ता अपनी शिकायत पर पूरी तरह अडिग हैं, इसलिए इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।















