“बाबा साहब पर माला चढ़ाई तो भेज देंगे जेल!” – मध्यप्रदेश के दतिया में दलितों को संविधान निर्माता की जयंती मनाने से रोका गया
🟠 एसडीएम-तहसीलदार और पुलिस ने मिलकर रचाई शर्मनाक साजिश, दलित समाज को घरों में किया नजरबंद 👉 रिपोर्टर: वन्दे भारत लाइव न्यूज़ | स्थान: दतिया, मध्यप्रदेश | दिनांक: 15 अप्रैल 2025
🛑 देश के संविधान निर्माता को सम्मान देना बना ‘अपराध’!
14 अप्रैल 2025 — यह दिन भारत के इतिहास में एक शर्मनाक धब्बे की तरह दर्ज हो गया, जब मध्यप्रदेश के जिला दतिया के ग्राम खिरिया काडौर (पंचायत धनौटी, थाना पंडोखर) में दलित समुदाय को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती मनाने से सरेआम रोका गया।
❌ पुष्पांजलि तक की अनुमति नहीं!
❌ पुलिस ने घरों में किया नजरबंद
❌ कहा: माला चढ़ाई तो फर्जी केस में जेल भेज देंगे!

📌 घटनाक्रम – जब प्रशासन बना उत्पीड़न का औजार
गांव की सरपंच प्रियंका गुर्जर, सचिव दीपक पुरोहित और रोजगार सहायक रविंद्र गुर्जर ने षड्यंत्रपूर्वक SDM संतोष तिवारी, तहसीलदार सुनील प्रभास और पंडोखर थाना पुलिस की मदद से बाबा साहब की प्रतिमा पर श्रद्धा अर्पित करने से रोका।
प्रतिमा स्थल पर पुलिस ने कुर्सियां लगाकर घेराबंदी की, और “कोई दिखा तो जेल जाएगा” जैसी धमकियाँ दी गईं।
पुलिसकर्मी रामजुहार कुशवाहा की स्पष्ट स्वीकारोक्ति – “यह आदेश SDM और तहसीलदार का है।”
⚖️ कानून की धज्जियाँ उड़ाईं गईं – संविधान पर हमला, जातीय उत्पीड़न की चरम सीमा
✴ संविधान के उल्लंघन:
→ अनुच्छेद 14 – समानता का अधिकार
→ अनुच्छेद 15(2) – सार्वजनिक भेदभाव निषेध
→ अनुच्छेद 17 – अस्पृश्यता का निषेध
→ अनुच्छेद 25 – धार्मिक स्वतंत्रता
✴ SC/ST Act के तहत अपराध:
→ धारा 3(1)(r)(s)(z), 3(2)(vii), 4
→ IPC की धाराएं – 295A, 341, 153A, 503, 506, 166, 217, 219
🔥 प्रशासनिक अमानवीयता का नंगा नाच — “हमें घरों में छुपकर मनानी पड़ी अंबेडकर जयंती”
शिकायतकर्ता प्रवीण सिंह, जो अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश प्रभारी और वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़ के सीईओ हैं, ने कहा:
“यह सिर्फ हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का हनन नहीं है, यह संविधान और बाबा साहब के सपनों को मिटाने की साजिश है। दोषी अफसरों पर SC/ST Act और IPC के तहत केस दर्ज कर उन्हें निलंबित किया जाए — नहीं तो दिल्ली तक आंदोलन होगा।”
🧠 क्या भारत के संविधान निर्माता की पूजा अब गैरकानूनी है?
इस घटना ने पूरे देश को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है —
❓ क्या अब भी दलितों को आज़ादी से जीने का हक नहीं?
❓ क्या प्रशासन जातिवादी मानसिकता का एजेंट बन चुका है?
❓ क्या संविधान अब सिर्फ किताबों तक सिमट गया है?
📢 मांगें व चेतावनी:
✔ दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों पर SC/ST Act और IPC की धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।
✔ तत्काल निलंबन कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला चलाया जाए।
✔ राजकीय मुआवजा, सुरक्षा और मानसिक सहायता पीड़ित परिवारों को दी जाए।
✔ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य SC आयोग द्वारा स्थल निरीक्षण करवाया जाए।
🔴 यदि अब भी न्याय नहीं मिला – तो देशभर में उठेगी “संविधान बचाओ – दलित सम्मान यात्रा” की लहर!
📍 यह सिर्फ दतिया की घटना नहीं – यह भारत के संविधान पर हमला है।
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