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सहारनपुर/देवबंद: थाना से निराश पीड़िता इंसाफ की आस में एसएसपी कार्यालय पहुंची, चौकी प्रभारी से जांच न कराने की लगाई गुहार

जिले के देवबंद थाना क्षेत्र से एक बेहद मार्मिक मामला सामने आया है, जिसमें इंसाफ की आस लगाए एक पीड़िता थाना और चौकी स्तर पर हो रही अनदेखी के चलते अब सीधे एसएसपी कार्यालय का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर हो गई।

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सहारनपुर/देवबंद: थाना से निराश पीड़िता इंसाफ की आस में एसएसपी कार्यालय पहुंची, चौकी प्रभारी से जांच न कराने की लगाई गुहार

सहारनपुर, उत्तर प्रदेश: जिले के देवबंद थाना क्षेत्र से एक बेहद मार्मिक मामला सामने आया है, जिसमें इंसाफ की आस लगाए एक पीड़िता थाना और चौकी स्तर पर हो रही अनदेखी के चलते अब सीधे एसएसपी कार्यालय का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर हो गई।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसने अपनी समस्या को लेकर कई बार देवबंद थाना और संबंधित चौकी में गुहार लगाई, लेकिन हर बार उसे सिर्फ आश्वासन ही मिला। आरोप है कि चौकी प्रभारी ने उसकी शिकायत की निष्पक्ष जांच करने में गंभीरता नहीं दिखाई। ऐसे में थक-हारकर पीड़िता सोमवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची, जहां उसने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गुहार लगाई।

थाने और चौकी के चक्कर काट रही पीड़िता

पीड़िता ने बताया कि उसकी शिकायत कई दिनों से थाना देवबंद में लंबित पड़ी है। जब उसने चौकी प्रभारी से मदद की उम्मीद की, तो वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। उसने कहा, “मेरे साथ हुई घटना की जांच चौकी प्रभारी के बजाय किसी दूसरे अधिकारी से कराई जाए। चौकी प्रभारी ने न तो मेरी बात गंभीरता से ली और न ही कोई ठोस कार्रवाई की।”

पीड़िता ने कहा कि थाने में सुनवाई न होने से उसका मनोबल टूट गया। मजबूर होकर उसने एसएसपी कार्यालय में अधिकारियों से मुलाकात की और अपनी व्यथा सुनाई।

एसएसपी कार्यालय में पीड़िता की गुहार

एसएसपी कार्यालय पहुंचे परिजनों ने भी कहा कि उन्हें चौकी प्रभारी की कार्यशैली पर पूरा भरोसा नहीं है। उनका आरोप है कि चौकी प्रभारी ने मामले को हल्के में लिया और सही तरीके से जांच नहीं की। उन्होंने कहा कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच होती तो अब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी होती।

पीड़िता ने एसएसपी कार्यालय में अधिकारियों से निवेदन किया कि उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और किसी निष्पक्ष पुलिस अधिकारी को जांच सौंपी जाए, जिससे उसे न्याय मिल सके।

स्थानीय लोगों में रोष

घटना की जानकारी जब स्थानीय लोगों को हुई, तो उन्होंने भी पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “पीड़ितों को थाना और चौकी के चक्कर काटने पड़ें, यह बेहद शर्मनाक है। पुलिस का काम पीड़ित को न्याय दिलाना होता है, न कि उसे दर-दर भटकाना।”

एसएसपी कार्यालय ने दिया भरोसा

एसएसपी कार्यालय के अधिकारियों ने पीड़िता की पूरी बात सुनी और उसे भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी भी स्तर पर पुलिसकर्मी की लापरवाही या पक्षपात सामने आता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि पीड़ितों की शिकायत को गंभीरता से लेना ही पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


घटना ने उठाए गंभीर सवाल

यह मामला न सिर्फ देवबंद थाना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि जिले में महिला सुरक्षा और पीड़िता की सुनवाई को लेकर भी कई गंभीर चिंताएं पैदा करता है। प्रशासनिक स्तर पर भले ही निष्पक्षता के दावे किए जा रहे हों, लेकिन थानों में पीड़ितों की अनदेखी और टालमटोल रवैया कानून व्यवस्था को कमजोर करता है।

इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि न्याय की आस में लोगों को अब भी उच्चाधिकारियों के दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं।


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एलिक सिंह, संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
उत्तर प्रदेश महामंत्री – भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद
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