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सुखजोरा नाग मंदिर: आस्था, विश्वास और परंपरा का अनुपम संगम

सुखजोरा नाग मंदिर: आस्था, विश्वास और परंपरा का अनुपम संगम

 

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झारखंड का दुमका जिला, का एक ऐसा क्षेत्र जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ धार्मिक आस्था के लिए भी विख्यात है। दुमका जिले के इस क्षेत्र में जरमुंडी प्रखंड अंतर्गत स्थित है सुखजोरा नाग मंदिर जो आस्था और पूर्ण विश्वास का भी प्रतीक माना जाता है। जहां हर वर्ष 22 जून से 7 जुलाई तक 15 दिवसीय विशेष पूजा का आयोजन होता है। जिसे आस पास के क्षेत्र में पण्डार के रूप में जाना जाता है। यह 15 दिनों तक चलने वाला पवित्र समय न केवल धार्मिक उत्साह से भरा होता है। बल्कि यह स्थानीय परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक एकता का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी रविवार, 22 जून 2025 को यह पवित्र उत्सव शुरू हो चुका है। इस दिन मंदिर परिसर भक्तों की भीड़ से गूंज उठता है। भक्त कच्चे दूध और आम को प्रसाद के रूप में नाग बाबा के चरणों मे चढ़ाते हैं और नाग बाबा की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन एक विशेष परंपरा के तहत आस पास के क्षेत्र में लोहे से जमीन की खुदाई पूर्णतः वर्जित होती है। जो प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है। सुखजोरा नाग मंदिर में 22 जून से 7 जुलाई तक चलने वाले इस 15 दिवसीय पूजा के दौरान पूरे क्षेत्र में मांसाहार का सेवन पूरी तरह से वर्जित रहता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। जो न केवल धार्मिक अनुशासन को दर्शाती है। बल्कि सामुदायिक एकता और आत्मसंयम का भी प्रतीक है। इस दौरान भक्त शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं। और अपने जीवन को सात्विकता के साथ जीने का प्रयास करते हैं। यह समय भक्तों के लिए आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है। 7 जुलाई को इस 15 दिवसीय पूजा का समापन एक भव्य मेले के साथ होता है। यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है। बल्कि स्थानीय संस्कृति, और परंपराओं को प्रदर्शित करने का भी एक मंच है। मेले में दूर-दूर से आए भक्त सुखजोरा के नाग मंदिर में नाग बाबा के दर्शन करते हैं। और उनकी कृपा पाने के लिए प्रार्थना करते हैं। मेले का माहौल उत्साह, भक्ति और सामुदायिक एकता से सराबोर होता है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। सुखजोरा नाग मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। यहाँ की परंपराएँ और रीति-रिवाज दुमका जिले की समृद्ध व सांस्कृतिक विरासत को उजागर करते हैं।
सुखजोरा नाग मंदिर का 15 दिवसीय पूजा आस्था, परंपरा और सामुदायिक एकता का एक अनुपम संगम है। जिसे पण्डार के रूप में भी जाना जाता है। प्रत्येक वर्ष यह पूजा सुखजोरा व आस पास के क्षेत्र के लोगों के लिए एक नई ऊर्जा व उत्साह लेकर आता है। सुखजोरा में स्थित नाग बाबा की कृपा से यह पवित्र परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक अपनी महत्ता बनाए रखेगी।

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