उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती: सुकरौली में सागौन के अवैध कटान पर एक्शन, भूस्वामी और ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज; 12 पेड़ निकले अवैध

यदि जिला प्रशासन और उच्चाधिकारी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए वाल्टरगंज पुलिस की निष्क्रियता और वन दरोगा अजय कुमार भारती की भूमिका की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच नहीं कराते, तो बस्ती में वन संपदा की यह लूट यूं ही बेखौफ जारी रहेगी।

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती में ‘हरे सोने’ का चीरहरण: सुकरौली में सागौन की अवैध कटान और खाकी-खादी की संदेहास्पद चुप्पी

  • हरी-भरी संपदा का चीरहरण: परमिट की आड़ में चल रहा था सागौन तस्करी का खेल, वन विभाग ने कसी कमर
  • ‘हरा सोना’ लूटने वालों पर शिकंजा: सुकरौली कांड में वन दरोगा की संलिप्तता उजागर, वाल्टरगंज पुलिस की संदिग्ध चुप्पी पर खड़े हुए बड़े सवाल
  • फाइलों में कागजी खेल, धरातल पर उजड़ रहे जंगल: लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद, क्या खाकी-खादी की मिलीभगत से फल-फूल रहा है अवैध कारोबार?

गौर, बस्ती: जनपद के गौर ब्लॉक अंतर्गत रामनगर वन रेंज के सुकरौली गांव में पर्यावरण और कानून की धज्जियां उड़ाते हुए ‘हरे सोने’ यानी बेशकीमती सागौन के पेड़ों का अवैध कटान किया गया है। यह मामला सिर्फ पेड़ों की चोरी का नहीं, बल्कि वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों और पुलिस प्रशासन की साठगांठ का एक जीता-जागता उदाहरण है, जिसने व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।

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​कागजों की आड़ में अवैध कटान का खेल

  • परमिट की आड़ में धांधली: कुल 33 सागौन के पेड़ों की अंधाधुंध कटान की गई, जिसमें से केवल 21 पेड़ों के लिए परमिट लिया गया था, जबकि शेष 12 पेड़ों को पूरी तरह अवैध तरीके से काट दिया गया।
  • किस पर हुई कार्रवाई: रामनगर रेंजर सोनल वर्मा द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद, जमीन मालिक सर्वजीत चौधरी (पुत्र श्री राम आसरे) और लकड़ी ठेकेदार अखिलेश/अशोक कुमार सिंह (पुत्र सीता राम सिंह) के खिलाफ वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 4/10 के तहत केस संख्या 25/2026-27 दर्ज किया गया है।
  • लकड़ी की तस्करी: मीडिया की पड़ताल में सामने आया कि अवैध रूप से काटी गई इस लकड़ी को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लादकर दुबौला के पास एक ईंट भट्ठे पर ठिकाने लगाया गया है।

​महकमे के भीतर का काला सच: वन दरोगा और पुलिस पर गंभीर सवाल

​इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान संभव है?

  • वन दरोगा की संलिप्तता: शुरुआती जांच में हल्का वन दरोगा अजय कुमार भारती की सीधी मिलीभगत सामने आ रही है, जिनके क्षेत्र में यह अवैध कटान धड़ल्ले से जारी रही। आज भी कई कटे-खड़े पेड़ उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
  • वाल्टरगंज पुलिस की संदिग्ध भूमिका: सबसे शर्मनाक पहलू वाल्टरगंज थाने की कार्यप्रणाली का है। जहां एक ओर वन विभाग ने मामला दर्ज कर लिया है, वहीं वाल्टरगंज पुलिस ने इस चोरी और अवैध कटान के गंभीर मामले में अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है। स्थानीय स्तर पर चर्चाएं आम हैं कि पुलिस इस मामले में ‘लेन-देन’ कर इसे पूरी तरह से रफा-दफा करने की जुगत में लगी हुई है।

​निष्कर्ष और प्रशासनिक चेतावनी

​सोशल मीडिया पर जब यह मामला वायरल हुआ, तब जाकर रामनगर रेंजर सोनल वर्मा ने अपनी नींद तोड़ी और कार्रवाई की। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ कागजी कार्रवाई से लकड़ी माफियाओं और उनके संरक्षक भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले पस्त हो जाएंगे?

​यदि जिला प्रशासन और उच्चाधिकारी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए वाल्टरगंज पुलिस की निष्क्रियता और वन दरोगा अजय कुमार भारती की भूमिका की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच नहीं कराते, तो बस्ती में वन संपदा की यह लूट यूं ही बेखौफ जारी रहेगी। अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस सिंडिकेट पर कठोर शिकंजा कसता है या फिर मामले को फाइलों में दफना दिया जाता है।

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