उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती में अपराध का नया जाल: पुलिस के रडार पर 7 नए गिरोह और 29 शातिर बदमाश!

सवाल यह है कि आखिर ये नए चेहरे अपराध की दुनिया में इतनी तेजी से दाखिल कैसे हो गए? जब 'ए' श्रेणी के अपराधी धड़ल्ले से जाली करेंसी और गो-तस्करी जैसे अपराधों में संलिप्त पाए जा रहे हैं, तो यह स्थानीय खुफिया तंत्र (Intelligence) की नाकामी की ओर भी इशारा करता है।

अजीत मिश्रा (खोजी)

खाकी की सख्ती या अपराधियों का दुस्साहस? बस्ती में 7 नए गिरोहों का पर्दाफाश

  • खाकी की सख्ती या इंटेलिजेंस की नाकामी? बस्ती में जनवरी से जुलाई तक सक्रिय रहे 7 नए आपराधिक गिरोह बेनकाब।
  • गो-तस्करी से लेकर जाली करेंसी तक: बस्ती पुलिस के हत्थे चढ़े संगठित अपराध के नए चेहरे, 29 सक्रिय सदस्यों की सूची तैयार।
  • बस्ती पुलिस का बड़ा प्रहार: अब अपराधियों की खैर नहीं, 29 बदमाशों की संपत्तियों और बैंक खातों पर कसेगा शिकंजा।
  • अपराध की दुनिया में बढ़ता दायरा: बस्ती में चिह्नित हुए 7 नए गिरोह, पुलिस की माइक्रो-लेवल निगरानी शुरू।

​जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर बस्ती पुलिस ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस साल जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच पुलिस ने सात नए आपराधिक गिरोहों को चिह्नित करते हुए 29 सक्रिय सदस्यों की एक लंबी फेरिस्त तैयार की है। यह कार्रवाई भले ही पुलिस महकमे की सक्रियता को दर्शाती हो, लेकिन साथ ही यह गंभीर सवाल भी खड़े करती है कि आखिर पुलिस की नाक के नीचे इन नए गिरोहों ने अपनी जड़ें इतनी गहरी कैसे कर लीं?

​अपराध का काला चिट्ठा: किस गिरोह में कितने चेहरे?

​पुलिस द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार, इन गिरोहों का दायरा बेहद खतरनाक अपराधों तक फैला हुआ है:

  • गोवध और गो-तस्करी गिरोह: कुल 10 सक्रिय सदस्य चिह्नित। इनमें 7 आरोपी ‘ए’ श्रेणी और 3 आरोपी ‘बी’ श्रेणी में रखे गए हैं।
  • जाली करेंसी गिरोह: कुल 5 सक्रिय सदस्य चिह्नित, और हैरानी की बात यह है कि सभी के सभी ‘ए’ श्रेणी के हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए सीधा खतरा हैं।
  • डकैती, चोरी और नकबजनी गिरोह: सबसे बड़ा नेटवर्क, जिसमें कुल 14 सक्रिय सदस्य शामिल हैं—4 ‘ए’ श्रेणी, 3 ‘बी’ श्रेणी, 5 ‘सी’ श्रेणी और 2 ‘D’ श्रेणी के बदमाश।

​क्या सिर्फ कागजी निगरानी से थमेगा अपराध?

“अपराधियों की सूची तैयार करना और उनकी माइक्रो लेवल पर निगरानी करना पहला कदम हो सकता है, मंजिल नहीं।”

 

​बस्ती की जनता अब सिर्फ यह सुनना नहीं चाहती कि कितने गिरोह चिह्नित हुए। सवाल यह है कि आखिर ये नए चेहरे अपराध की दुनिया में इतनी तेजी से दाखिल कैसे हो गए? जब ‘ए’ श्रेणी के अपराधी धड़ल्ले से जाली करेंसी और गो-तस्करी जैसे अपराधों में संलिप्त पाए जा रहे हैं, तो यह स्थानीय खुफिया तंत्र (Intelligence) की नाकामी की ओर भी इशारा करता है।

​अब संपत्तियों पर वार की है दरकार

​राहत की बात यह है कि पुलिस अब केवल बदमाशों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी संपत्तियों और बैंक खातों की जांच भी कर रही है। संगठित अपराध की रीढ़ उसकी अवैध कमाई होती है। जब तक इन अपराधियों की अवैध रूप से खड़ी की गई संपत्तियों को मिट्टी में नहीं मिलाया जाएगा, तब तक अपराधियों के दिलों में कानून का डर पैदा करना मुमकिन नहीं होगा।

​बस्ती की जनता अब आश्वासनों के पुलिन से थक चुकी है। आवश्यकता इस बात की है कि पुलिस इन 29 सक्रिय सदस्यों के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंके, ताकि शहर में अमन-चैन और कानून का राज पूरी सख्ती के साथ स्थापित हो सके।

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