
खाकी की मुस्तैदी या सिस्टम की ढिलाई? सिद्धार्थनगर में जहरीले कारोबार का पर्दाफाश!
- दिल्ली से गोरखपुर और संत कबीर नगर तक फैला था जाल: राम प्रताप प्रजापति (गोरखपुर), दीपक जायसवाल (दिल्ली) और जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव (संत कबीर नगर) के रूप में हुई आरोपियों की शिनाख्त।
- सराहनीय कार्य पर पुलिस टीम पुरस्कृत: अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद ने खुलासे करने वाली संयुक्त टीम को 20,000 रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया।
सिद्धार्थनगर: जिले में अवैध अंग्रेजी शराब और स्प्रिट के काले कारोबार का एक बार फिर भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस, एसओजी, सर्विलांस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने मिलकर एक ऐसे गिरोह को दबोचा है जो डबल डेकर बसों के सहारे अवैध शराब और उसे बनाने की सामग्री का परिवहन कर रहा था। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कैसे बेखौफ तस्कर प्रदेश की सीमाओं को पार कर कानून की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
बांसी कोतवाली क्षेत्र के डुमरियागंज रोड पर प्रतापपुर के पास संयुक्त टीम ने चेकिंग के दौरान एक डबल डेकर बस को रोका। तलाशी लेने पर बस के भीतर से अवैध शराब बनाने की भारी मात्रा में सामग्री बरामद हुई।
गिरफ्तार अभियुक्तों की फेहरिस्त:
- राम प्रताप प्रजापति (गुलरिया, गोरखपुर)
- दीपक जायसवाल (उत्तम नगर, दिल्ली)
- जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव (महुली, संत कबीर नगर)
यह अंतरराज्यीय नेटवर्क इस बात का जीता-जागता सबूत है कि कैसे दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों तक फैला यह नेक्सस आम जनता की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहा था।
बरामदगी का पूरा विवरण
संयुक्त टीम ने डबल डेकर बस की तलाशी के दौरान कुल मिलाकर निम्न सामग्री बरामद की—
- 35,740 नकली ढक्कन — IB, Old Monk, RS, Iconic, BP एवं McDowell’s कंपनी के।
- 4,900 QR कोड वाले सील रैपर।
- 281 बोतल अंग्रेजी शराब, हरियाणा प्रदेश निर्मित — OC Blue एवं RS कंपनी की, प्रत्येक 375 मिलीलीटर।
- 20 लीटर स्प्रिट अल्कोहल।
- शराब बनाने में प्रयुक्त सेंट की 06 शीशियां।
- 65 नई खाली बोतलें — RS, IB एवं Iconic कंपनी की।
- 01 डबल डेकर स्लीपर बस संख्या UP 17 AT 6415, जिसका इस्तेमाल घटना में किया जा रहा था।
- 03 मोबाइल फोन, विभिन्न कंपनियों के।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ थाना बाँसी में मु0अ0सं0 148/26 के तहत धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस तथा धारा 60, 63, 72 आबकारी अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, अलग-अलग राज्यों और जनपदों से जुड़ा है कनेक्शन
संयुक्त टीम ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राम प्रताप प्रजापति उर्फ गुरु प्रजापति, दीपक जायसवाल और जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के रूप में हुई है।
राम प्रताप प्रजापति उर्फ गुरु प्रजापति
राम प्रताप प्रजापति उर्फ गुरु प्रजापति पुत्र स्वर्गीय बल्ली प्रजापति, निवासी जंगल एकला नंबर-2, टोला बेनीगंज, थाना गुलरिया, जनपद गोरखपुर का रहने वाला है।
पुलिस के अनुसार राम प्रताप थाना बाँसी में पहले से दर्ज मु0अ0सं0 146/2026, धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस तथा धारा 60/64 आबकारी अधिनियम में वांछित अभियुक्त था।
दीपक जायसवाल
दीपक जायसवाल पुत्र राजेंद्र जायसवाल, निवासी B-1/17-182, भरत बिहार, राजापुरी, थाना डाबरी मोड़, जिला उत्तम नगर, नई दिल्ली का निवासी है।
पुलिस पूछताछ में दीपक ने अवैध शराब के कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी है, जिसके आधार पर जांच टीम नेटवर्क की अन्य कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव
जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव पुत्र स्वर्गीय शिव सागर लाल श्रीवास्तव, निवासी लाला फरेंदिया, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर का रहने वाला है।
पुलिस के अनुसार जितेंद्र का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ थाना ढेबरुआ में मु0अ0सं0 69/22120-B, 467, 468, 471 BNS, 63बी कॉपीराइट एक्ट तथा 60, 64, 72 आबकारी अधिनियम से संबंधित मामला दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
पूछताछ में सामने आई अवैध शराब के नेटवर्क की कहानी
गिरफ्तार अभियुक्त दीपक जायसवाल से पुलिस ने विस्तृत पूछताछ की। पूछताछ में दीपक ने बताया कि वह पूर्व में गांजा तस्करी के एक मामले में जनपद देवरिया जेल में अभियुक्त प्रमोद यादव के साथ निरुद्ध रहा था।
पुलिस के मुताबिक जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद प्रमोद यादव के माध्यम से दीपक की पहचान गोरखपुर निवासी जितेंद्र जायसवाल से हुई। इसके बाद जितेंद्र के माध्यम से उसकी पहचान राम प्रताप उर्फ गुरु प्रजापति से हुई।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में यह बात सामने आई कि राम प्रताप उर्फ गुरु प्रजापति के माध्यम से अवैध शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाले नकली ढक्कन, स्प्रिट और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी। इन सामग्रियों को आसपास के जनपदों में बेचने का काम किया जाता था।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि बाद में दीपक ने हरियाणा से सस्ते दामों पर अंग्रेजी शराब खरीदकर दूसरे स्थानों पर अधिक कीमत में बेचने की योजना बनाई। इस कारोबार के जरिए अवैध आर्थिक लाभ कमाने का प्रयास किया जा रहा था।
प्राप्त सूचना के आधार पर 09/10 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि को संयुक्त टीम ने बाँसी-डुमरियागंज मार्ग पर प्रतापपुर के पास प्रभावी चेकिंग शुरू की। इसी दौरान टीम ने डबल डेकर स्लीपर बस संख्या UP 17 AT 6415 को रोककर उसकी तलाशी ली।
बस की तलाशी शुरू होते ही पुलिस टीम को बड़ी मात्रा में ऐसी सामग्री बरामद हुई, जिसका इस्तेमाल नकली अथवा मिश्रित अंग्रेजी शराब तैयार करने और उसे असली ब्रांड की शराब के रूप में प्रस्तुत करने में किया जा सकता था। तलाशी के दौरान बस में मौजूद तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
बस से बरामद हुई नामी कंपनियों के नकली ढक्कनों की बड़ी खेप
पुलिस के मुताबिक बस से सबसे बड़ी बरामदगी 35,740 नकली अंग्रेजी शराब के ढक्कनों की हुई है। इन ढक्कनों पर IB, Old Monk, RS, Iconic, BP और McDowell’s जैसी शराब कंपनियों के नाम से संबंधित ढक्कन शामिल हैं।
इसके अलावा 4,900 QR कोड वाले सील रैपर भी बरामद किए गए। पुलिस की प्रारंभिक जांच में इन सामग्रियों का इस्तेमाल नकली या मिश्रित शराब को नामी ब्रांड की बोतलों में भरकर उसे असली उत्पाद के तौर पर पेश करने के लिए किए जाने की आशंका जताई गई है।
इतनी बड़ी संख्या में नकली ढक्कन और QR कोड की बरामदगी ने अवैध शराब कारोबार के संभावित नेटवर्क को लेकर जांच को और गंभीर बना दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये नकली ढक्कन और सील रैपर कहां तैयार किए जाते थे, इन्हें किससे खरीदा जाता था और किन-किन क्षेत्रों में इनका इस्तेमाल किया जाना था।
हरियाणा निर्मित 281 बोतल अंग्रेजी शराब भी बरामद
संयुक्त टीम को बस की तलाशी में हरियाणा प्रदेश की 281 बोतल अंग्रेजी शराब भी मिली। बरामद शराब OC Blue और RS कंपनी की 375 मिलीलीटर क्षमता वाली बोतलों में थी।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि हरियाणा से अपेक्षाकृत कम कीमत पर शराब लाकर दूसरे राज्यों और जनपदों में अधिक कीमत पर बेचने की योजना बनाई गई थी। इसी क्रम में हरियाणा निर्मित शराब को दूसरे अवैध शराब निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री के साथ ले जाया जा रहा था।
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि बरामद शराब की खेप किस स्थान से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था।
20 लीटर स्प्रिट और शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाला सेंट बरामद
तलाशी के दौरान पुलिस ने 20 लीटर स्प्रिट अल्कोहल भी बरामद किया। इसके साथ ही शराब बनाने में प्रयुक्त होने वाले सेंट की छह शीशियां भी मिलीं।
इसके अलावा RS, IB और Iconic कंपनियों की 65 नई खाली बोतलें बरामद की गई हैं। पुलिस के मुताबिक खाली बोतलें, नकली ढक्कन, QR कोड वाले सील रैपर, स्प्रिट और सेंट जैसी सामग्री की एक साथ बरामदगी अवैध शराब तैयार करने और उसकी पैकिंग से जुड़े नेटवर्क की जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जांच टीम अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद सामग्री का इस्तेमाल किस स्थान पर और किस स्तर पर किया जाना था तथा इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
मऊ, गोरखपुर और सिद्धार्थनगर होते हुए लखनऊ ले जाई जा रही थी सामग्री
पुलिस पूछताछ के अनुसार हरियाणा निर्मित अंग्रेजी शराब और शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को मऊ, गोरखपुर और सिद्धार्थनगर होते हुए लखनऊ ले जाया जा रहा था।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बस्ती वाला रूट बंद होने के कारण उन्होंने फरेंदा होते हुए सिद्धार्थनगर की तरफ से लखनऊ जाने वाला रास्ता चुना था।
इसी दौरान डबल डेकर स्लीपर बस बाँसी-डुमरियागंज मार्ग पर प्रतापपुर के पास पहुंची, जहां पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर चेकिंग के दौरान बस को रोक लिया। तलाशी में भारी मात्रा में अवैध सामग्री बरामद होने के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
प्रशासनिक कार्रवाई और पुरस्कार
इस बड़े खुलासे को अंजाम देने वाली संयुक्त टीम में प्रभारी निरीक्षक मृत्युंजय पाठक, आबकारी निरीक्षक दिनेश कुमार पासवान व मोनी शुक्ला, एसओजी प्रभारी चंद्रकांत पांडेय और सर्विलांस प्रभारी हरेंद्र चौहान शामिल रहे।
प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस क्षेत्राधिकारी (आईपीएस) विश्वजीत शौरयान और सीओ बांसी शिवेंद्र सिंह ने पूरे मामले का खुलासा किया। इस उल्लेखनीय सफलता पर अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद ने गिरफ्तार करने वाली टीम को 20,000 रुपये के नगद पुरस्कार से सम्मानित किया है।
सवाल: कब तक पलता रहेगा यह अवैध धंधा?
पुलिस की यह कार्रवाई काबिल-ए-तारीफ है, लेकिन इसके साथ ही यह कई गंभीर सवाल भी छोड़ जाती है:
- क्या दिल्ली से गोरखपुर और संतकबीरनगर तक का सफर बिना किसी मिलीभगत के तय हो जाता है?
- रास्ते में पड़ने वाली अनगिनत पुलिस चौकियों और टोल प्लाजा पर इन तस्करों की गाड़ियां क्यों नहीं पकड़ी गईं?
- क्या प्रशासन सिर्फ तभी जागेगा जब कोई बड़ी जहरीली शराब त्रासदी किसी परिवार का चिराग बुझा देगी?
अवैध शराब का यह कारोबार सिर्फ राजस्व को चूना नहीं लगाता, बल्कि यह सीधे तौर पर इंसानी जिंदगियों पर एक खुला प्रहार है। पुलिस ने अभियुक्तों को जेल की सलाखों के पीछे भेजकर राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन जब तक इस सिंडिकेट की जड़ें यानी इसके असली सरगना तक हाथ नहीं पहुंचेंगे, तब तक इस तरह के तस्करों के हौसले बुलंद ही रहेंगे। जरूरत इस बात की है कि इस चेन को पूरी तरह से ध्वस्त किया जाए, ताकि खाकी के इकबाल का खौफ इन सौदागरों के दिलों में हमेशा के लिए बैठ जाए।








