
राजकीय स्कूलों में मीडिया के प्रवेश पर रोक, अभिभावकों-जनप्रतिनिधियों ने जताई आपत्ति,
शिक्षा विभाग का आदेश वायरल, कहा – पारदर्शिता पर लगेगा अंकुश
जयपुर।राज्य के राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, गरिमा और निजता के नाम पर शिक्षा विभाग ने मीडिया सहित बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं। निदेशक माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर द्वारा 16 अगस्त 2026 को जारी परिपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने इस पर सवाल उठाए हैं।विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। इसके साथ ही छात्रों, शिक्षकों या विद्यालय गतिविधियों की फोटो, वीडियो, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीमिंग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। आदेश में इसका उल्लंघन करने पर POCSO एक्ट और IT एक्ट के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
कांग्रेस ने कहा – चौथे स्तम्भ पर अंकुश ठीक नहीं
इस आदेश को लेकर ओबीसी प्रकोष्ट के जयपुर जिला देहात ईस्ट कांग्रेस उपाध्यक्ष मेवाराम यादव ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि “मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। विद्यालय जैसी सार्वजनिक संस्था में मीडिया के प्रवेश पर रोक लगाना व्यवस्था की खामियों को छिपाने जैसा है। बच्चों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन पारदर्शिता के नाम पर मीडिया को रोका जाना ठीक नहीं है।”
अभिभावकों का भी कहना है कि स्कूलों में अव्यवस्था, शिक्षकों की अनुपस्थिति और अन्य खामियों को उजागर करने में मीडिया की भूमिका अहम रही है। ऐसे में इस तरह के आदेश से आमजन तक सच्चाई नहीं पहुंच पाएगी।
*विभाग का तर्क – बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि*
शिक्षा विभाग के राजपुर वास ताला राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य व पीईईओ रमेश चंद सामरिया का कहना है कि “In Loco Parentis” सिद्धांत के तहत सरकार का दायित्व है कि वह स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा और निजता सुनिश्चित करे। आदेश में विजिटर रजिस्टर, अनुमति के बिना क्लास में प्रवेश पर रोक और छात्रों की जानकारी प्रकाशित न करने जैसे बिंदु भी शामिल हैं।शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह आदेश केवल मीडिया के लिए नहीं, बल्कि सभी बाहरी व्यक्तियों के लिए है ताकि बच्चों का शोषण और निजता का उल्लंघन रोका जा सके। जिससे विद्यालय प्रबन्धन व शैक्षणिक कार्य प्रभावित न हो।फिलहाल आदेश को लेकर अभिभावकों और पत्रकार संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है।



