
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
चंद्रपुर महानगर पालिका के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से एक पत्रकार की बेशकीमती ज़मीन हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि चंद्रपुर में मेन रोड पर स्थित पत्रकार मुन्ना तावड़े की निजी संपत्ति पर कब्ज़ा करने के लिए साजिशन ‘श्री हनुमान अखाड़ा’ नामक एक फर्जी संस्था का गठन किया गया है।
इस पूरे प्रकरण में महानगर पालिका के उच्च अधिकारियों की चुप्पी और कथित राजनीतिक संरक्षण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य बिंदु: कैसे रची गई ज़मीन हड़पने की साज़िश?
फर्जी संस्था का गठन: ज़मीन पर स्थायी कब्ज़ा जमाने के लिए ‘श्री हनुमान अखाड़ा’ नाम की संस्था बनाई गई। पंजीकरण (Registration) के समय संस्था के पास कोई ज़मीन नहीं थी।
झूठा हलफनामा: संस्था के उपाध्यक्ष प्रभु पुरण दडेल ने धर्मदाय आयुक्त कार्यालय में लिखित में दिया था कि “संस्था के कार्यालय के लिए मैं अपने घर का एक कमरा दे रहा हूँ।” लेकिन इसके विपरीत, बोर्ड मुन्ना तावड़े की निजी ज़मीन पर लगा दिया गया।
धार्मिक भावना का दुरुपयोग: ज़मीन हड़पने के लिए इस अवैध कब्ज़े को एक ‘धार्मिक संस्था’ का रूप दे दिया गया, ताकि स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर दबाव बनाया जा सके और असली मालिक अपनी ही ज़मीन से बेदखल रहे।
पुलिस जांच में पदाधिकारियों के बयानों से खुली पोल
जब ज़मीन पर अवैध कब्ज़े की शिकायत पुलिस तक पहुँची और पुलिस ने संस्था के पदाधिकारियों के बयान दर्ज किए, तो इस फर्जीवाड़े की पूरी सच्चाई सामने आ गई:
संस्था के अन्य सदस्य, जिनमें विनोद झाड़े (सचिव), शिवम संजू देशवाले, नीलेश घनश्याम कोलापुरे (मनपा अग्निशमन विभाग) और महेश उर्फ बाबा बंडू जाफराबादी (कोषाध्यक्ष) शामिल हैं, ने पुलिस को बताया कि उन्हें इस संस्था के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
सदस्यों ने स्वीकार किया कि उनसे केवल हस्ताक्षर लिए गए थे। उन्हें न तो किसी मासिक बैठक की जानकारी है और न ही संस्था के किसी प्रस्ताव की।
इन बयानों से स्पष्ट हो गया है कि यह संस्था केवल मुन्ना तावड़े की ज़मीन हड़पने के लिए एक “डमी” या बोगस संस्था के रूप में खड़ी की गई थी।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
यह ज़मीन महानगर पालिका से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न करना उनकी संलिप्तता या दबाव को दर्शाता है।
कानूनी पेंच और राजनीतिक दबाव: जानकारों का मानना है कि चंद्रपुर महानगर पालिका के अधिकारी धार्मिक दबाव और बड़े राजनीतिक रसूख के आगे घुटने टेक चुके हैं।
सामाजिक अन्याय: मुन्ना तावड़े अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से आते हैं। पिछले 12 वर्षों से उनके साथ यह आर्थिक और सामाजिक अन्याय हो रहा है।
आगे क्या?
पत्रकार मुन्ना तावडे ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों और अवैध कब्ज़ाधारियों में हड़कंप मच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी अब कानूनी पेंच खंगालने के लिए बड़े वकीलों की शरण ले रहे हैं।
- अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संस्था का अधिकृत कार्यालय प्रभु दडेल के घर पर पंजीकृत है, तो मुन्ना तावड़े की जगह पर ‘श्री हनुमान अखाड़ा’ का बोर्ड कैसे और किसकी शह पर लगा? शहर के नागरिक अब प्रशासन और मनपा आयुक्त से इस मामले में निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।






