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कप्तानगंज में दरिंदगी की इंतिहा: स्कूल से लौटती किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म, विरोध पर मामा को उतारा मौत के घाट!

बस्ती में खाकी और कानून को ठेंगा: पांच दरिंदों ने रौंदी मासूम की अस्मत, सिस्टम सोया रहा... कोर्ट ने जगाया!

अजीत मिश्रा (खोजी)

बेटियां कब तक बनेंगी दरिंदों का निवाला? कप्तानगंज में शर्मसार हुई इंसानियत!

  • बेटियां कब होंगी आजाद? सरेराह उठा ले गए गुंडे, अस्मत लूटी और बचाने आए परिजन को दी लहूलुहान सजा! UP का ‘जंगलराज’? बस्ती में सामूहिक दुष्कर्म के बाद खूनी तांडव, क्या नामजद आरोपियों पर चलेगा योगी का चाबुक?
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  • कप्तानगंज सामूहिक दुष्कर्म: पांच नामजद, पूरा इलाका आक्रोश में! शर्मनाक! स्कूल से घर जाना भी हुआ दूभर, बस्ती में किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म। अदालत के आदेश पर जागी बस्ती पुलिस, दरिंदों के खिलाफ मुकदमा दर्ज।

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल उत्तर प्रदेश

बस्ती। उत्तर प्रदेश में जहाँ एक ओर कानून-व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं बस्ती जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र से आई एक रूह कंपा देने वाली खबर ने समाज के माथे पर कलंक लगा दिया है। एक मासूम किशोरी, जो स्कूल से अपने सुनहरे भविष्य के सपने लेकर घर लौट रही थी, उसे रास्ते में ही पांच दरिंदों ने अपनी हवस का शिकार बना डाला। यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे सुरक्षा तंत्र और सामाजिक नैतिकता की खुली विफलता है।

दुस्साहस: विरोध पर मामा को मारा चाकू

इन अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने न केवल सामूहिक दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया, बल्कि जब पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया, तो न्याय मांगने पर किशोरी के मामा को चाकू मारकर लहूलुहान कर दिया गया। सरेआम जान से मारने की धमकी दी गई। सवाल यह उठता है कि क्या अपराधियों के मन में पुलिस और प्रशासन का रत्ती भर भी खौफ नहीं बचा है?

नामजद आरोपी: क्या अब चलेगा न्याय का डंडा?

घटना के संबंध में अश्वनी कुमार, अक्षय कुमार, पवन कुमार, संतराय और जैशराम समेत तीन अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। स्थानीय पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश के बाद की गई है। यहाँ विचारणीय प्रश्न यह है कि पीड़ित परिवार को प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए भी अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ा? क्या पुलिस की संवेदनशीलता इतनी शून्य हो चुकी है कि ऐसे जघन्य मामलों में भी बिना आदेश के ‘सिस्टम’ नहीं जागता?

सत्ता और प्रशासन से तीखे सवाल:

  • स्कूल जाती बेटियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ और ‘मिशन शक्ति’ धरातल पर कहाँ हैं?
  • क्या कप्तानगंज पुलिस इन दरिंदों के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई करेगी जो नजीर बने, या फिर फाइलें धूल फांकेंगी?
  • पीड़ित परिवार को मिल रही धमकियों के बीच उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

बस्ती की यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि बेटियां आज भी असुरक्षित हैं। पॉक्सो एक्ट और तमाम धाराओं में केस दर्ज होना महज कागजी प्रक्रिया है; असली न्याय तब होगा जब इन दरिंदों को उनके किए की ऐसी सजा मिले कि फिर कोई किसी मासूम की तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत न कर सके।

बस्ती प्रशासन और सरकार से जनता की सीधी मांग है—दोषियों को पाताल से भी ढूंढकर निकालो और उन्हें सलाखों के पीछे नहीं, बल्कि उनके अंजाम तक पहुँचाओ!

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