
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨बस्ती पुलिस की ‘महा-सर्जिकल स्ट्राइक’: 38 पाउच में सिमटा शराब माफिया!🚨
- एडीजी की नजर, डीआईजी का डर और बरामद हुए सिर्फ 38 ‘क्वार्टर’।
- बस्ती पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: झोले में सिमटा अवैध शराब का कारोबार।
- गुड वर्क की अनोखी मिसाल: 38 पाउच पकड़कर पुलिस ने उखाड़ दी शराब माफिया की जड़ें!
- जब रसूखदार ‘ट्रक’ डकार गए, तब खाकी ने ‘पाउच’ पकड़कर पीठ थपथपाई।
- फुटकर कार्रवाई में ‘थोक’ का शोर: हरैया पुलिस का पाउच छाप एनकाउंटर।
- वाह रे बहादुरी! 38 पाउच के साथ ‘डॉन’ गिरफ्तार, बस्ती मंडल में अब चैन ही चैन।
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
बस्ती। प्रदेश में जब ‘जीरो टॉलरेंस’ की गूंज हो और आला अफसरान की पैनी नजर हो, तो खाकी का इकबाल बुलंद होना लाजिमी है। इसी ‘इकबाल’ का ताजा नमूना पेश किया है बस्ती जनपद की हरैया पुलिस ने। पुलिस ने एक ऐसी ‘ऐतिहासिक’ सफलता हासिल की है, जिसे सुनकर शराब माफियाओं की रूह तो नहीं कांपी होगी, लेकिन शायद उन्हें हंसी का दौरा जरूर पड़ गया होगा।
🚨पुलिस की इस ‘बड़ी कार्रवाई’ का कुल वजन है— 38 पाउच अवैध शराब! ### बड़ी कार्रवाई या सिर्फ खानापूर्ति?
जी हां, आपने सही पढ़ा। जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया से लेकर एडीजी जोन गोरखपुर और डीआईजी रेंज बस्ती तक अवैध कारोबार की जड़ें खोदने का निर्देश दे रहे हैं, वहीं हरैया पुलिस ने अपनी ‘तेज-तर्रार’ नजरों से एक ऐसे ‘खतरनाक’ अपराधी को दबोचा है, जो झोले में 38 पाउच शराब छिपाए ‘साम्राज्य’ चला रहा था।
हैरत की बात यह है कि इस नन्हीं सी बरामदगी को ‘बड़ी सफलता’ और ‘बड़ी कार्रवाई’ जैसे भारी-भरकम शब्दों के लपेटे में पेश किया जा रहा है। शायद पुलिस की डिक्शनरी में ‘बड़ा’ शब्द अब पाउच की गिनती से तय होने लगा है।
🚨साहब! जब व्हेल खुलेआम तैर रही हों, तब ‘झींगा’ ही हाथ आता है
पूरे क्षेत्र में चर्चा है कि जब बड़े सिंडिकेट और ट्रक के ट्रक खपाने वाले रसूखदार ‘सफेदपोश’ पुलिस की रडार से बाहर रहते हैं, तब ऐसे ’38 पाउच’ वाले प्यादे ही पुलिस की साख बचाते हैं।
- क्या 38 पाउच पकड़ लेने से अवैध शराब का धंधा बंद हो जाएगा?
- क्या उन भट्ठियों तक पुलिस के हाथ पहुंचेंगे जहां जहर उबाला जा रहा है?
- या फिर रजिस्टर में ‘कार्रवाई’ का कॉलम भरने के लिए किसी राहगीर या छोटे फुटकरिया को पकड़कर ‘गुड वर्क’ की फोटो खिंचा लेना ही असली उपलब्धि है?
🔔जनता से अपील और पुलिस का खेल
पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे अवैध गतिविधियों की सूचना दें। लेकिन सवाल यह है कि जब जनता सूचना देती है, तो क्या पुलिस उन ‘मगरमच्छों’ पर हाथ डालती है जिनके संरक्षण में यह खेल चलता है? या फिर सूचना देने वाले को ही गवाहों के चक्कर में उलझा दिया जाता है?
एडीजी जोन और डीआईजी के पर्यवेक्षण में अगर ‘रिकवरी’ का स्तर केवल पाउच तक सीमित है, तो फिर समझ लीजिए कि शराब माफिया कितनी बेखौफ नींद सो रहे होंगे। हरैया पुलिस की इस ‘मेहनत’ पर तो बस यही कहा जा सकता है— “खोदा पहाड़, और निकली 38 पाउच वाली चुहिया!”
विधिक कार्रवाई जारी है, और उम्मीद है कि अगली बार पुलिस कम से कम एक पेटी तो पकड़ ही लेगी, ताकि उसे ‘बड़ी कार्रवाई’ कहते हुए खुद शर्म न आए।

















