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बड़ी मछली मलाई खाए, छोटा ‘कोचिया’ जेल जाए!4 हजार की महुआ शराब के लिए लकेश्वर नापा गया, ‘सिस्टम’ की नजरें बड़े मगरमच्छों पर कब इनायत होंगी?*

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तेंदुभाठा का ‘लकेश्वर’ बना आबकारी का शिकार, सीडी डिलक्स और महुआ शराब जब्त!

आभास शर्मा

बलौदाबाजार / कसडोल:
कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन अमूमन ये हाथ सिर्फ छोटे और गरीब जेब कतरों या ‘छोटे कोचियों’ के गिरेबान तक ही पहुंच पाते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा शुक्रवार को कसडोल वृत्त में देखने को मिला। जिला आबकारी की ‘तीसरी आंख’ ने एक ऐसे बड़े “अपराधी” को दबोचा है, जिसके पास से न तो लाखों की विदेशी शराब मिली और न ही कोई लग्जरी कार। मिला तो बस— 20 लीटर हाथभट्ठी की कच्ची महुआ शराब और एक पुरानी सीडी डिलक्स मोटरसाइकिल!
जिले के बड़े-बड़े रसूखदार कोचिए, जो मलाई चाट रहे हैं और जिनके ठिकानों पर ‘साहबों’ को भरपूर “मिठाई” (प्रसाद) पहुंचती है, वे तो चैन की बंसी बजा रहे हैं। लेकिन तंत्र का पूरा जोर दिखा ग्राम तेंदुभाठा के रहने वाले 35 वर्षीय लकेश्वर यादव पर।
कार्रवाई का पूरा लेखा-जोखा: क्या-क्या हुआ जब्त?
कलेक्टर कुलदीप शर्मा और जिला आबकारी अधिकारी के कड़े (और चुनिंदा!) निर्देशों के बाद आबकारी की भारी-भरकम टीम गश्त पर निकली थी। गिरौदपुरी चौकी के पास टीम को यह ‘बड़ी कामयाबी’ हाथ लगी:
जब्त माल: 20 बल्क लीटर हाथभट्ठी कच्ची महुआ शराब (बाजार मूल्य: ₹4,000)
जब्त वाहन: मोटरसाइकिल सीडी डिलक्स संख्या सीजी 022 पी 5583 (बाजार मूल्य: ₹30,000)
आरोपी: लकेश्वर यादव, पिता गोविंद (उम्र 35 वर्ष, ग्राम तेंदुभाठा)
कानून का शिकंजा: गरीब कोचिया लकेश्वर के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(2) और 59(क) के तहत गैर-जमानती मामला दर्ज कर लिया गया है। अब लकेश्वर जेल की सलाखों के पीछे अपनी किस्मत और सिस्टम के ‘दोहरे मापदंड’ को कोसेगा।
इस ‘महा-मिशन’ को अंजाम देने वाले शूरवीर!
4 हजार की शराब पकड़ने के लिए विभाग ने अपने आला अफसरों की पूरी फौज मैदान में उतार दी थी। इस कार्रवाई में इन अधिकारियों और आरक्षकों ने अपनी “महत्वपूर्ण” भूमिका निभाई:
जलेश कुमार सिंह (सहायक जिला आबकारी अधिकारी)
विनोद बांधे (आबकारी उपनिरीक्षक)
अभिषेक कुमार राठौर व हेमंत कुमार वर्मा (आबकारी आरक्षक)
कोमल निषाद व प्रकाश कुमार (आबकारी आरक्षक)
राजकुमारी पैकरा व दुर्गा ध्रुव (नगर सैनिक)

*जनता का कड़वा सवाल…*
इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग दबी जुबान में कह रहे हैं कि साहब! छोटे कोचियों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपाना और वाहवाही लूटना तो आसान है, लेकिन उन सफेदपोश सिंडिकेट्स पर हाथ डालने की हिम्मत आबकारी टीम कब दिखाएगी, जिनकी छत्रछाया में असली अवैध शराब का ‘मलाईदार’ कारोबार फल-फूल रहा है?
खैर, फिलहाल तो आबकारी विभाग के खाते में एक और ‘शानदार’ कामयाबी दर्ज हो चुकी है!

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