
क्या ‘लोकतंत्र’न्याय के लिय सरकारसे लढणा जरुरी है। ? हम विश्व की सबसे बढी ‘लोकतंत्र’देश है,सबसे अधिक, धर्म,पंत,विविध भाषा,विवीध संस्कृती से हमारी पूरे विश्व मे हमारी पहचान थी। पर अब क्यो नही। ? क्या हम सही मायने मे मुर्त स्वरुप से लोकतंत्र दे रह चुके है। ? तो अपने हक के लिये ,शिक्षा प्रणाली इतनी जटील,तथा अविश्वसनीय क्यो। ?जाती,धरम,राजकारण हमे भलेही अपनो से कुछ समय के लिय दुर कर सकता है,पर हमेशा के लिये नही। ? हमारी निव इतनी कमजोर हो सकती है। ?जितना की यह राज कियपक्ष समझते है। ? जवाब है नही। क्यो की हमारे देश मे कुछ दोगले राजकिय पक्ष जिन्होंने जाती,धरम के नाम पर हमको बाट दिया था। विद्यार्थीयोंमे कट्टरता का बिज भी बोया था। पर यह कायम कब रहने वाला था। ? यह बिते दिनों मे अपनेही देश मे हमारा सरकार द्वारा देश राजकारण के नाम पर अतिरेक हो रहा था। पर मा.अभिजित दिपके द्वारा “काकरोज” नामक पार्टी बनाकर,नवयुवक को साथ मे लेकर,अपना हम मांगने अपने राजधानी मे जंतर-मंतर पर शांतीपूर्ण प्रोटेस्ट कीया, निट,टिईटी,जैसै परिक्षा मे जो धांदली हुयी थी.उसकी नैतिक जवाबदेही स्विकारने के लिये भ्रष्ट शिक्षामंत्री जितेंद्र प्रधान,तथा सरकार को राजीनाम देने के लिए मजबुर किया। आखिरकार एक महीने के प्रोटेस्ट को सफलता मिली। पर सवाल यह उठता है,पुरी जनता जानती थी परीक्षा में धांदली हुयी थी।परिक्षा मे पेपर लिक के कारण 25 विद्यार्थीयोंने आत्महत्या कीया, पर सरकार माणने के लिये तयार क्यो नही थी। क्या जनता,’संविधान’से उपर है,मंत्री,सरकारे।? जी बिलकुल नही,हम जनता को हरबार सजक रहकर सत्ता,मंत्री से सवाल करना होगा। सरकार को अपनी मनमानी करने का मौका नही देना चाहिये। हमे पक्ष,प्रतिपक्ष भुलकर एकसाथ सरकार प्रशासन से सवाल करते रहना चाहिए. यह सच्चा ‘लोकतंत्र ‘अबाधित रख पायेंगे…..! जो की आज की “काकरोच” जनता पार हिं ने सरकार को झुकाकर साबित किया। जय हिंद,जय भारत,जय संविधान’, जय जवान,जय किसान। जय जनता जनार्दन।












