
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
नक्सलियों के नाम पर लोगों में डर और दहशत फैलाने की कोशिश करने वाले 2 लोगों को गडचिरोली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी पिपली बुर्गी थाना क्षेत्र में लाल रंग के बैनर और पर्चे लगाकर नक्सली गतिविधियों का झूठा माहौल बना रहे थे। पुलिस ने शनिवार को इस बात की जानकारी दी। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
क्या था पूरा मामला
गडचिरोली जिले में पुलिस के “ऑपरेशन अंतिम प्रहार” के तहत लगातार कार्रवाई के कारण नक्सली गतिविधियां लगभग खत्म हो चुकी हैं। इसी बीच 12 जुलाई को पिपली बुर्गी से करीब 5 किलोमीटर दूर जिजावंडी टोला मार्ग के मोड़ के पास कुछ अज्ञात लोगों ने लाल रंग के कपड़े के बैनर और पर्चे लगाकर ग्रामीणों में डर पैदा करने की कोशिश की।
गांव के दिशा सूचक बोर्ड के नीचे लगाए गए बैनर और पास में रखे पर्चों पर दहशत फैलाने वाला लिखा हुआ था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के मार्गदर्शन में जांच शुरू की गई।
14 जुलाई को पिपली बुर्गी पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता, गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया।
कैसे पकड़े गए आरोपी
तकनीकी सबूतों और गोपनीय जानकारी के आधार पर पुलिस ने पता लगाया कि शिवा अनिल मिस्त्री (48, निवासी तरुणनगर, तह. पाखांजूर, जिला कांकेर, छत्तीसगढ़) और रोहित रणजित मल्लीक (25, निवासी वटेली, तह. एटापल्ली, जिला गडचिरोली) ने खुद को नक्सली बताकर ये बैनर और पर्चे लगाए थे।
पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। इस साजिश में शामिल अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
पुलिस अधीक्षक की अपील
इस कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक ने जांच टीम की सराहना की। साथ ही उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों, बहकावे या दहशत फैलाने वाले किसी भी कृत्य में न आएं।
उन्होंने चेतावनी दी कि समाज में डर का माहौल बनाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।











