उत्तर प्रदेशबस्ती

बार-बार जेल, फिर भी बेखौफ! बस्ती में आदतन चोर गिरफ्तार, क्या पुलिसिया शिकंजा नाकाफी?

"जब तक आदतन अपराधियों के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई की बजाय ऐसी नजीर पेश नहीं की जाएगी, जिससे उनके भीतर कानून का खौफ पैदा हो, तब तक इस तरह के छोटे-बड़े खुलासे समाज में सुरक्षा का वास्तविक अहसास नहीं करा सकते।"

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती में अपराध का अंतहीन सिलसिला: बार-बार कानून को ठेंगा दिखाने वाले शातिर चोरों पर कब कसेगा ठोस शिकंजा?

  • महज़ 16,568 रुपये की बरामदगी और अपराधों की लंबी फेहरिस्त: कलवारी पुलिस के हत्थे चढ़ा शातिर बीरेन्द्र कुमार
  • खाकी की पीठ थपथपाएं या लाचारी पर रोएं? गंभीर धाराओं के मुल्जिमों का इस तरह घूमना व्यवस्था पर बड़ा तंज
  • चोरी, पॉक्सो और आर्म्स एक्ट के आरोपी पर संयुक्त कार्रवाई: आखिर कब खत्म होगा अपराधियों का यह चक्रव्यूह?
  • चमनगंज से दबोचा गया शातिर चोर: महज कागजी खुलासों से आगे बढ़कर सख्त कार्रवाई की दरकार

बस्ती: जनपद में पुलिस और एंटी-थैफ्ट टीम द्वारा चमनगंज से चोरी के मामले में वांछित शातिर अभियुक्त बीरेन्द्र कुमार की गिरफ्तारी और उसके पास से महज 16,568 रुपये की बरामदगी को भले ही खाकी अपनी एक और सफलता के रूप में पेश कर रही हो, लेकिन यह घटना कानून व्यवस्था और अपराधियों के मनोबल पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

​महज़ एक खानापूर्ति या न्याय व्यवस्था की लाचारी?

​सवाल यह है कि क्या कुछ हजार रुपये की बरामदगी और गिरफ्तारी से आम जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर सकती है? गिरफ्तार अभियुक्त बीरेन्द्र कुमार का आपराधिक इतिहास इस बात का जीता-जागता सबूत है कि कानून का डर अपराधियों के दिलों से पूरी तरह गायब हो चुका है।

    • अपराधों की लंबी फेहरिस्त: वर्ष 2024 से लेकर 2026 तक नगर, कलवारी और हर्रैया जैसे थानों में जिस शख्स पर एक के बाद एक कई मुकदमे दर्ज हों, वह बार-बार कानून की गिरफ्त से छूटकर फिर से वारदातों को कैसे अंजाम दे रहा है?
    • गंभीर धाराओं के बावजूद बेखौफ: अभियुक्त के खिलाफ दर्ज मामलों में केवल चोरी ही नहीं, बल्कि आर्म्स एक्ट और पॉक्सो एक्ट जैसी गंभीर धाराएं भी शामिल हैं। इसके बावजूद उसका खुलेआम घूमना और वारदातों को दोहराना पुलिसिया कार्यप्रणाली और प्रशासनिक सुस्ती पर बड़ा तंज है।

“जब तक आदतन अपराधियों के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई की बजाय ऐसी नजीर पेश नहीं की जाएगी, जिससे उनके भीतर कानून का खौफ पैदा हो, तब तक इस तरह के छोटे-बड़े खुलासे समाज में सुरक्षा का वास्तविक अहसास नहीं करा सकते।”

 

​पुलिस की पीठ थपथपाने से आगे की जरूरत

​बेशक, प्रभारी निरीक्षक कलवारी संतोष कुमार और एंटी-थैफ्ट टीम के प्रभारी भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए अभियुक्त को दबोच लिया है, जिसके लिए वे प्रशंसा के पात्र हैं। परंतु, जनता को सिर्फ ‘गिरफ्तारी के आंकड़ों’ से मतलब नहीं है, बल्कि उन्हें स्थायी शांति और सुरक्षा चाहिए।

​यदि ऐसे शातिर और आदतन अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट, रासुका या सख्त जिला बदर जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई समय रहते नहीं की गई, तो यह चक्र यूं ही चलता रहेगा—पुलिस चोर को पकड़ेगी, और शातिर अपराधी कुछ दिनों बाद फिर से समाज में खुलेआम तांडव मचाने के लिए लौट आएगा। अब समय आ गया है कि पुलिस महकमा केवल खुलासों तक सीमित न रहे, बल्कि अपराधियों की जड़ों पर कड़ा प्रहार करे।

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