



कानपुर। एमएमए जौहर फैन्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हयात ज़फर हाशमी के नेतृत्व में पिछले 15 वर्षों से मनाए जा रहे “जश्ने आमद-ए-रसूल सप्ताह” के अंतर्गत तीसरा कार्यक्रम आज़ाद पार्क, बेनाझाबर भट्टा में बेनाझाबर युवा समिति के अध्यक्ष अज़ीज़ुल हसन कुरैशी के संयोजन में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष हयात ज़फर हाशमी ने की, जबकि मुख्य वक्ता हज़रत अल्लामा मौलाना हस्सान कादरी नक्शबंदी, प्रिंसिपल मदरसा फैज़ान-ए-सिद्दीक-ए-अकबर रहे। संचालन संयोजक अज़ीज़ुल हसन कुरैशी ने किया। कार्यक्रम में हाफ़िज़ व क़ारी आमिर अज़हरी ने नात-ए-नबी ﷺ पेश की।
मुख्य वक्ता मौलाना हस्सान कादरी नक्शबंदी ने “हम पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ की सुन्नत और आदर्शों पर कैसे चलें?” विषय पर खिताब करते हुए कहा कि रसूल-ए-अकरम ﷺ की सुन्नत केवल इबादत का तरीका नहीं, बल्कि पूरी ज़िंदगी को बेहतर बनाने का मुकम्मल रास्ता है। हमें अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आपके ﷺ के अख़लाक, किरदार, रहम-दिली, सच्चाई, इंसाफ और इंसानियत को अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नबी-ए-करीम ﷺ ने हमेशा सच बोलने, वादा पूरा करने, माता-पिता का सम्मान करने, पड़ोसियों के साथ अच्छा व्यवहार करने, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने तथा हर इंसान के साथ मोहब्बत और इंसाफ का व्यवहार करने की शिक्षा दी। आज अगर हम इन शिक्षाओं को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लें तो समाज में नफरत, हिंसा, झूठ, बेईमानी और आपसी दूरी को कम किया जा सकता है।
मौलाना हस्सान कादरी नक्शबंदी ने कहा कि सुन्नत पर चलने का मतलब केवल बाहरी तौर-तरीकों को अपनाना नहीं, बल्कि अपने किरदार को भी नबी ﷺ के बताए हुए आदर्शों के मुताबिक ढालना है। हमारे कारोबार में ईमानदारी, रिश्तों में मोहब्बत, बातचीत में नरमी, व्यवहार में शालीनता और समाज के प्रति जिम्मेदारी दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने नौजवानों से अपील करते हुए कहा कि वह सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ का अध्ययन करें और अपने जीवन में एक-एक सुन्नत को अपनाने का संकल्प लें। सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीक के दौर में नौजवान पीढ़ी को अच्छे किरदार, अच्छे विचार और सकारात्मक सोच की सबसे अधिक जरूरत है।
अध्यक्षीय संबोधन में हयात ज़फर हाशमी ने कहा कि जश्ने आमद-ए-रसूल सप्ताह का मकसद केवल जश्न मनाना नहीं, बल्कि रसूल-ए-पाक ﷺ की सीरत और तालीमात को आम करना तथा समाज में मोहब्बत, अमन, भाईचारे और इंसानियत का संदेश पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने नबी ﷺ की शिक्षाओं पर अमल करें तो हमारा परिवार, समाज और देश बेहतर दिशा में आगे बढ़ सकता है।
कार्यक्रम में जावेद मोहम्मद खान, मोईन खान, मोहम्मद ईशान, मोहम्मद रोहान कादरी, अफलास मुन्ना भाई, शकील भाई, हाफ़िज़ हसीब, फैसल वारसी बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे। अंत में देश में अमन, भाईचारे, खुशहाली और तरक्की के लिए विशेष दुआ की गई।



