
।। वंदेभारतलाइवटीव न्युज, बुधवार 25 अगस्त 2026 ।।
नागपुर/महाराष्ट्र–:: रक्षाबंधन/राखी का पवित्र त्योहार भाई बहन के स्नेह, ममता, विश्वास, और एक दूसरे की उन्नति सलामती से जुड़ा हुआ त्योहार है। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपनी भाईयों की कलाई पर रक्षासूत्र/ राखी बांधकर उनकी लंबी आयु,सूख समृद्धि की कामना किया करतीं हैं, और भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेतें हैं। इस वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का यह पर्व 28 अगस्त शुक्रवार के दिन मनाया जायेगा। पंचांग के अनुसार श्रावण मास पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त गुरूवार को सुबह 09:07 बजे होगा, और इसका समापन 28 अगस्त शुक्रवार को सुबह 09:49 बजे होगा। हिंदू धर्मानुसार कोई भी त्योहार पर्व उदयातिथि के अनुसार मनाया जाता है, इस हिसाब से इस बार रक्षाबंधन का यह पवित्र त्योहार 28 अगस्त शुक्रवार के दिन मनाया जायेगा, पंचांग अनुसार 28 अगस्त शुक्रवार को राखी बांधने का सबसे अधिक शुभ मुहूर्त सुबह 05:57बजे से लेकर सुबह 09:48 बजे तक रहेगा। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। रक्षाबंधन का यह त्योहार प्रतिवर्ष श्रावण मास पूर्णिमा तिथि पर मनाई जाती है।.रक्षाबंधन पर बहनें पूजा की थाली सजाकर अपने भाई को तिलक लगातीं हैं, आरती भी उतारती हैं, और राख/ रक्षासूत्र बांधकर मिठाई खिलातीं हैं। भाई अपनी बहन को उपहार देते हुए जीवन भर उनकी सुरक्षा का वचन लेतें हैं। रक्षाबंधन पर सबसे जरूरी यह होता है कि आपके अपने ईष्टदेव को पहले रक्षासूत्र बांधना चाहिए और ईश्वर से प्रार्थना कर फिर अपने भाईयों को राखी बांधना चाहिए, क्योंकि हमारे आपके घरों में जो ईष्टदेव ईश्वर विराजमान हैं,उनका प्रसाद स्वरूप लेकर फिर राखी बांधने की परंपरा है,जिससे कि जिस भी कामना से बहनें रक्षासूत्र,राखी बांधतीं हैं वह कामना फलीभूत हो और बहनों का भाई आयुष्मान, दीर्घायु, हो इसी शुभ मंगल कामना के साथ राखी बांधी जाती है। रक्षाबंधन का यह पवित्र त्योहार केवल भाई बहनों के पवित्र रिश्तों तक ही सीमित नहीं है, यह भावनाओं, विश्वास, आत्मिक रक्षा,के उस पवित्र धागे का नाम होता है जो कि काल और परिस्थितियों से परे होता है। ऐसी मान्यता है कि जिन बहनों के सगे भाई नहीं होतें हैं,वे जगत के पालनहार भगवान श्रीकृष्ण को अपना भाई मानकर उनहें रक्षासूत्र बांध सकतीं हैं। सामान्यत: यदि कोई सगा भाई न हो तो फिर चचेरे भाई आदि को भी राखी बांधी जा सकती है। हमारे पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं में रक्षाबंधन का विशेष महत्व भी बतलाया गया है। रक्षाबंधन त्योहार से जुड़ी हुई कई कथाएं प्रचलित हैं,इन्ही में एक कथा भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से संबंधित है, ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध किया तब चोट लगने से उनकी उंगली से रक्त बहनें लगा था, जिसे देखकर द्रौपदी नें अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया था, जिसके बाद द्रौपदी के भाव को देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को यह वचन दिया था कि समय आने पर वह उनके इस कर्ज का भार जरूर उतारेंगे,और कौरवों की सभा में द्रौपदी के चीरहरण के दौरान श्रीकृष्ण नें इस वचन को निभाया भी था। रक्षाबंधन पर यह रक्षासूत्र पुरोहित भी अपने यजमानों को उनके जीवन की शुभ मंगल कामना के लिए बांधतें हैं। रक्षाबंधन पर पर कलाई पर बांधा जाने वाला यह धागा केवल एक धागा ही नहीं होता, बल्कि यह विश्वास, प्रेम, त्याग, समर्पण का बंधन, प्रतीक भी होता है। एक बहन जब अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधतीं हैं , तो वह केवल भाई की कलाई ही नहीं बांधतीं,बल्कि अपने विश्वास, को भी बांधतीं हैं, और जब भाई उस रक्षासूत्र को स्वीकार करता है तो वह सिर्फ एक धागा ही नहीं रहता , बल्कि बहन की रक्षा,सम्मान, और जीवन की हर परिस्थिति में साथ निभाने का संकल्प भी स्वीकार करता है। रक्षाबंधन का यह त्योहार हम सबको यह संदेश देता है कि रक्षा सिर्फ शरीर भर की नहीं होती, रिश्तों की रक्षा होती है, केवल सुख में ही नहीं ,दुख संकट में भी सच्चे रिश्ते वही होतें हैं जो कि समय आने पर अपने एक एक वचन का कर्ज चुकातें हैं। यही कारण है है कि सदियों बीतनें के बाद आज भी श्रीकृष्ण और द्रपदी का रिश्ता हमें यह याद दिलाता है कि राख/ रक्षासूत्र का यह धागा भले ही छोटा जरूर होता है, परंतु यह उसमें बंधा हुआ विश्वास प्रेम, समर्पण से बड़ा जरूर होता है। हममें से अधिकतर लोगों के लिए रक्षाबंधन का मतलब होता है कि बहन का भाई को राखी बांधना,मिठाई खिलाना,उपहारों का आदान प्रदान, परंतु रक्षाबंधन के इस पवित्र त्योहार की गहराई में एक गुप्त, सुंदर आध्यात्मिक संदेश भी छुपा होता है- हर आत्मा के अंदर एक गहरी चाहत है, “सच्ची सुरक्षा और स्थाई सुख पाने की”।रक्षाबंधन का यह पावन पर्व बड़े ही प्रेम, स्नेह से से गहरा प्रश्न सोचने का अवसर देता है- आखिरकार हमारी सच्ची रक्षा कौन करता है? और हमें स्थाई सुख शांति कहां से प्राप्त होती है? रक्षासूत्र इस बात का भी प्रतीक होता है कि हम जीवन में सद्गुणों, धर्म के मार्ग पर चलनें का संकल्प लें।.पुराने समय की बात है , रक्षाबंधन के दिन एक सद्गुण ब्राह्मण हर घर जाकर रक्षासूत्र बांधा करता था, यह रक्षासूत्र सिर्फ भाईयों को ही नहीं ,बल्कि पूरे परिवार के सभी सदस्यों को रक्षासूत्र बांधता था।।.समय के साथ साथ आज समाज बदला, परंपराएं बदलती गई, और यह पावन सूत्र धीरे धीरे सिर्फ भाई बहनों तक ही सीमट कर रह गई।.आज के परिवेश में अक्सर भाई दूर रहता है,या फिर अपनी ही जिंदगी की उलझनों में रहता है,ऐसे में रक्षाबंधन की भावना तो बनी रहती हैं,किंतु हमारे असली रक्षा बनतें हैं – परमात्मा, वे जो कि कभी भी हमारा साथ नहीं छोड़तें हैं। रक्षाबंधन की यह पवित्र विधि एक ऐसा आध्यात्मिक सुरक्षा कवच बन जाती है जो कि हमें परम पिता परमात्मा की याद और आत्म- अभिमानी जीवनशैली के माध्यम से हमारे सूक्ष्म दुश्मनों- नकारात्मक विचारों, व्यर्थ भावनाओं, आत्म हिनता से बचातें हैं। राखी बांधना केवल कर्मों की पवित्रता ही नहीं,बल्कि विचारों और भावनाओं की शुद्धता का संकल्प बन जाता है। राखी केवल एक पहननें वाली चीज नहीं, यह एक मीठा प्यारा अनुभव भी बन जाती है। रक्षाबंधन पर जहां एक ओर मिठाईयां बांटी जाती है , वहीं असली मिठास होती है – हमारी बातों में नम्रता व्यवहार में कौमलता, विचारों में शुभकामनाओं की ।. “” सभी माताओं,बहनों , भाईयों को श्रावणी पूर्णिमा और रक्षाबंधन की हार्दिक हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं” ।।



