
भीलवाड़ा , 05 मार्च | जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधु के निर्देशानुसार जिले में राजस्थान ग्रामीण आजीविका मिशन (राजीविका) द्वारा आयोजित “राज सखी मेले 2025” का भव्य शुभारंभ
06 मार्च से होने जा रहा है। यह मेला ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार से जोड़ने का एक अनूठा मंच प्रदान करेगा।
राजस्थान से 20 जिलों की लगभग 100 महिला स्वयं सहायता समूहों /कारीगरों और उद्यमियों को अपने हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित और बेचने का अवसर मिलेगा। साथ ही, उन्हें व्यवसायिक प्रशिक्षण, विपणन के नए अवसरों और आर्थिक विकास की संभावनाओं से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यशालाएँ भी आयोजित की जाएंगी।
राज सखी मेला महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम साबित होगा| राजीविका का यह मेला राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह न केवल स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को एक मजबूत बाजार उपलब्ध कराएगा, बल्कि उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का भी अवसर देगा।
मेले में प्रदर्शन और बिक्री के लिए उपलब्ध प्रमुख उत्पाद:
हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्र – ब्लॉक प्रिंटिंग, बंधेज, लहरिया, जूट और कपड़े से बने उत्पाद
हस्तनिर्मित आभूषण और घरेलू सजावटी सामान – लाख, टेराकोटा, बीड्स, मिट्टी और लकड़ी की कलाकृतियाँ
जैविक कृषि उत्पाद और हर्बल उत्पाद – देसी मसाले, हर्बल सौंदर्य प्रसाधन, जैविक खाद्य सामग्री
परंपरागत गृहस्थ उपयोगी वस्तुएँ – हस्तनिर्मित बर्तन, परंपरागत रसोई के सामान और अन्य घरेलू उपयोगी वस्तुएँ
राज सखी मेले में राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने के लिए लोक नृत्य, संगीत और पारंपरिक कला की शानदार प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की जाएंगी।
मुख्य आकर्षण:
✅ राजस्थानी लोक नृत्य और संगीत – घूमर, कालबेलिया, भवई नृत्य और लोकगीत
✅ पारंपरिक कठपुतली शो और लोककथाएँ – बच्चों और बड़ों के लिए मनोरंजन और संस्कृति से जुड़ाव
✅ पारंपरिक वेशभूषा और फैशन शो – महिला SHGs द्वारा निर्मित वस्त्रों का प्रदर्शन
✅ कबड्डी प्रतियोगिता और कला प्रदर्शनी – स्थानीय शिल्पकारों के उत्कृष्ट कार्यों की प्रदर्शनी
राजस्थानी व्यंजनों का विशेष आयोजन
राजस्थानी संस्कृति के स्वाद को जीवंत बनाए रखने के लिए मेले में पारंपरिक व्यंजनों के विशेष स्टॉल भी लगाए गए हैं, जहाँ आगंतुक दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी, मिर्ची बड़ा, कचौरी और अन्य पारंपरिक मिठाइयों का आनंद ले सकेंगे।
राज सखी मेला महिलाओं के आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। यह मेला न केवल उत्पादों की बिक्री और विपणन का अवसर देगा, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने और नई व्यापारिक संभावनाओं से जुड़ने का भी मंच प्रदान करेगा। राजीविका और राजस्थान सरकार के इस प्रयास से गांवों की महिलाएँ आत्मनिर्भर बनेंगी और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त होगा।






