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यूपी के शिक्षामित्र सबसे बदहाल,न मानदेय वृद्धि न स्थाई पद

 

*यूपी के शिक्षामित्र सबसे बदहाल,न मानदेय वृद्धि न स्थाई पद* 👇👇

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उत्तर प्रदेश-बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में दो दशक से अधिक समय से बच्चों को पढ़ा रहे, (1,43,450) शिक्षामित्र अपनी तकदीर पर रो रहे हैं । ये शिक्षामित्र दस हजार रूपये प्रतिमाह के मानदेय पर कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाने पर विवश हैं, जबकि इन्हीं के साथ पढ़ा रहे शिक्षक उसी काम के लिए कई गुना अधिक वेतन पा रहे हैं ।

*शिक्षामित्रों का दर्द है कि*👇

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👉सरकार इन्हें कभी शिक्षक तो कभी संविदा कर्मी मानती है लेकिन मानदेय मजदूर से भी कम देती है । केंद्रीय श्रम मंत्रालय के अनुसार अकुशल मजदूर को 18500 रुपए और सकुशल को 24500 रूपये प्रतिमा मिलना चाहिए लेकिन इन पढ़े लिखे कामगारों के बारे में कोई नहीं सोच रहा है । 👇👇

*अन्य राज्यों की अपेक्षा यूपी के शिक्षा मित्रों की दशा सबसे दयनीय*👇👇

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👉वर्तमान में सभी राज्यों को देखें तो सबसे दयनीय दशा उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्र की ही है । सर्व शिक्षा अभियान के तहत दो दशक पहले पूरे देश में लगभग 7.5 लाख संविदा शिक्षक शिक्षामित्र रखे गए थे. इस दौरान कई राज्यों में ये संविदा शिक्षक पूर्ण शिक्षक बन गए तो तमाम राज्यों में इनका मानदेय बढ़ गया है ।लेकिन यूपी के शिक्षामित्र साल में 11 महीने केवल दस हजार रूपये मानदेय पर पढ़ा रहे हैं ।

*आठ साल में नही हुई कोई मानदेय वृद्धि*👇

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👉 सुप्रीम कोर्ट से 25 जुलाई 2017 को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन निरस्त होने के बाद सरकार ने शिक्षामित्र का मानदेय 3500 से बढ़कर दस हजार रूपये तो कर दिया,लेकिन उसके बाद तकरीबन 8 साल में इनके मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई ।

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*वेतन मानदेय में दस गुना का आया अंतर*

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👉पिछली ढाई दशक में परिषदीय प्राथमिक स्कूलों के सहायक अध्यापकों के वेतन और शिक्षामित्रों के मानदेय में दस गुना का अंतर आया है । 2001 में सहायक अध्यापक का वेतन 46 00 रूपये और शिक्षामित्र का मानदेय 2250 रुपए था । उस समय शिक्षक के वेतन और शिक्षामित्र के मानदेय में मात्रा दोगुने का अंतर था । आज 2001 में नियुक्त उसी शिक्षक को लगभग एक लाख रुपए मिल रहे हैं जबकि शिक्षामित्र को मात्र दस हजार रूपये मिल रहे हैं । 2018 में नियुक्त सहायक अध्यापक का वेतन 37 हजार था और शिक्षामित्र को मात्र दस हजार मिल रहा था आज 2018 में नियुक्त इसी शिक्षक को 67000 रूपये वेतन मिल रहा है जबकि शिक्षा मित्र को आज भी दस हजार रूपये में जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है । 👇👇

*आखिरकार कारण क्या है कि दोनों कमेटी की रिपोर्ट अभी तक न तो सार्वजनिक की गई*

*न ही शिक्षा मित्रों की समस्याओं का निदान हुआ*
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👉2018 से सहायक अध्यापकों के वेतन में 30 हजार रुपए की बढ़ोतरी हुई है.शिक्षामित्रों का कहना है कि समायोजन निरस्त होने के बाद शिक्षामित्रों नें आंदोलन किया तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए हाई पावर कमेटी गठित की थी.उसके बाद नवंबर 2023 में शिक्षामित्रों की समस्याओं के निदान हेतु बेसिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में चार सदस्य टीम की कमेटी गठित की गई थी. कमेटी ने शिक्षामित्र नेताओं के साथ फरवरी 2024 में बैठक की थी.आखिरकार कारण क्या है की दोनों कमेटी की रिपोर्ट अभी तक ना तो सार्वजनिक की गई और ना ही समस्याओं का निदान हुआ ।

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