

नई दिल्ली, 21 दिसंबर 2025।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ के मुस्लिम विरोधी होने के आरोपों पर बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। रविवार को उन्होंने कहा कि आरएसएस मुस्लिम विरोधी नहीं है और इस तरह की बातें पूरी तरह गलत धारणाओं पर आधारित हैं।
मोहन भागवत ने कहा, “जो लोग आरएसएस को समझना चाहते हैं, वे स्वयं आकर देख सकते हैं। संघ का दरवाज़ा हमेशा खुला रहा है और आगे भी रहेगा।” उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संघ का उद्देश्य समाज को तोड़ना नहीं, बल्कि जोड़ना है।
समाज में समरसता ही संघ का लक्ष्य
सरसंघचालक ने कहा कि आरएसएस की विचारधारा राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ किसी भी धर्म, समुदाय या वर्ग के खिलाफ नहीं है।
भागवत ने यह भी कहा कि संघ के बारे में भ्रम फैलाने वाले लोग उसके कार्यों और सामाजिक योगदान को समझे बिना आरोप लगाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पूर्वाग्रह छोड़कर संघ की गतिविधियों को नज़दीक से समझें।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बयान की चर्चा
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब आरएसएस को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहसें तेज़ रहती हैं। उनके इस बयान को संघ की समावेशी सोच और खुली कार्यशैली के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।















