
संवाददाता अखिलेश विश्वकर्मा ✅ गढ़वा जिले में श्री बंशीधर नगर ग्रामीण क्षेत्रों में जलमीनार के नाम पर कैसे खेल हो रहा है, देखना है तो गढ़वा आइए। यह हम नहीं, बल्कि गढ़वा जिले के ग्रामीण इलाकों की बेबस तस्वीरें और अधूरे पड़े सरकारी दावे चीख-चीख कर कह रहे हैं। गढ़वा जिले के कई गांवों में शान से जलमीनार (वॉटर टावर) तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन उनमें पानी पहुंचाने की कोई समुचित व्यवस्था नजर नहीं आती। ऐसे में अब यह बड़ा सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इन आलीशान जलमीनारों में पानी आएगा कहां से?
ग्राउंड रिपोर्ट: कधवन गांव के भुईयां टोला में अधूरी व्यवस्थासोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो गढ़वा जिले के श्री बंशीधर नगर प्रखंड के अंतर्गत पंचायत कधवन के ‘भुईयां टोला’ का है। यहां जलमीनार का ढांचा तो पूरी तरह तैयार है, लेकिन जलापूर्ति (वॉटर सप्लाई) की व्यवस्था पूरी तरह अधूरी और ठप दिखाई देती है। स्थानीय ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि सिर्फ लोहे और कंक्रीट की संरचना खड़ी कर देने से हमारी प्यास नहीं बुझेगी। समस्या का समाधान तब होगा, जब इन जलमीनारों में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
सिर्फ एक गांव नहीं, कई इलाकों का यही हाल चौंकाने वाली बात यह है कि यह बदहाली केवल कधवन या लकर गांव तक सीमित नहीं है। गढ़वा जिले के कई गांवों से लगातार ऐसी ही तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहां जलमीनारें सिर्फ शो-पीस बनकर रह गई हैं। एक तरफ सरकार की मंशा हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर योजनाओं को अधूरा छोड़कर सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा रहा है। यदि योजनाएं इसी तरह अधूरी रहीं, तो ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिलने वाला। प्रशासन और विभाग से सीधे सवाल अब सबसे बड़ा सवाल गढ़वा जिला प्रशासन और संबंधित पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से है कि आखिर बिना पूरी प्लानिंग और पाइपलाइन/बोरिंग की व्यवस्था के जलमीनारें क्यों खड़ी की गईं इन अधूरी योजनाओं के लिए जिम्मेदार संवेदकों (ठेकेदारों) और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी गढ़वा उपायुक्त (DC Garhwa) और विभाग इन जलमीनारों को पूरी तरह चालू कर ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कब तक ठोस कदम उठाएंगे ग्रामीणों को अब भी उम्मीद है कि इस खबर के बाद प्रशासन जागेगा और उनके हलक तक पानी पहुंचेगा।
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