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आईटीआई मशीन खरीद घोटाला: विधायक की शिकायत पर सरकार सख्त, सहायक निदेशक निलंबित

यूपी: आईटीआई में मशीन खरीद में करोड़ों का खेल, सहायक निदेशक पर गिरी गाज भ्रष्टाचार पर योगी सरकार का प्रहार: आईटीआई मशीन खरीद मामले में सहायक निदेशक निलंबित

अजीत मिश्रा (खोजी)

आईटीआई मशीन खरीद घोटाला: विधायक अजय सिंह की शिकायत पर शासन सख्त, सहायक निदेशक निलंबित

ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती/लखनऊ

  • आईटीआई घोटाला: शिकायत के बाद शासन ने की बड़ी कार्रवाई
  • मशीन खरीद में धांधली: सहायक निदेशक धीरेंद्र कुमार निलंबित
  • जांच के घेरे में आईटीआई की टेंडर प्रक्रिया, विभागीय जांच शुरू
  • विधायक अजय सिंह की शिकायत पर एक्शन: आईटीआई में मशीन खरीद के खेल का खुलासा
  • टेंडर में मनमानी और कमीशनखोरी का आरोप: आईटीआई के सहायक निदेशक निलंबित

​उत्तर प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में मशीनों और उपकरणों की खरीद में हुए कथित बड़े घोटाले पर योगी सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। हर्रैया विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजय सिंह की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए शासन ने प्रशिक्षण निदेशालय के सहायक निदेशक धीरेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

​इस कार्रवाई के बाद विभागीय गलियारों में हड़कंप मच गया है। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच शुरू कर दी है और जांच अधिकारी की भी नियुक्ति कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

इस विवाद की नींव हर्रैया विधायक अजय सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए उस शिकायत पत्र से पड़ी, जिसमें उन्होंने निदेशालय स्तर पर टूल और मशीनों की खरीद में व्यापक भ्रष्टाचार और मिलीभगत का आरोप लगाया था। विधायक का आरोप था कि सरकारी खरीद की निविदा प्रक्रिया (टेंडर) को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि चुनिंदा कंपनियों को अनुचित लाभ मिल सके।

​विधायक ने अपनी शिकायत में प्रमुखता से उठाया था कि तकनीकी समिति द्वारा उठाई गई आपत्तियों को दरकिनार कर अयोग्य कंपनियों को योग्य घोषित किया गया। यही नहीं, यह धांधली एक या दो टेंडर तक सीमित न रहकर कई खरीद प्रक्रियाओं में दोहराई गई, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचा। उन्होंने पिछले एक माह में हुई समस्त खरीद और तकनीकी मूल्यांकन की निष्पक्ष जाँच की मांग की थी।

निलंबन और आरोपों की फेहरिस्त

व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सहायक निदेशक धीरेंद्र कुमार पर न केवल खरीद में अनियमितता, बल्कि वित्तीय भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। उन पर लगे प्रमुख आरोपों में शामिल हैं:

  • भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी: बजट आवंटन के बदले कथित तौर पर कमीशन की मांग करना।
  • टेंडर में पक्षपात: कुछ विशेष कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए निविदा शर्तों में हेरफेर।
  • प्रशासनिक दुराचार: अधीनस्थ कर्मचारियों पर दबाव बनाना, स्थानांतरण में अनियमितता और विभागीय कार्यों में लापरवाही।
  • अनुशासनहीनता: वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों और सरकारी नियमों की अनदेखी।

जांच के घेरे में विभागीय प्रक्रियाएं

शासन ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। निलंबन की अवधि के दौरान धीरेंद्र कुमार को देवीपाटन मंडल से संबद्ध किया गया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे ‘मशीन खरीद घोटाले’ की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं।

​इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योगी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर कायम है। आईटीआई जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में तकनीकी गुणवत्ता के साथ समझौता करने वालों के खिलाफ अब विभाग सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।

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