बस्ती में फर्जी OSD का भंडाफोड़: इनोवा पर लाल-नीली बत्ती और सरकारी लोगो लगाकर झाड़ रहा था रौब, शातिर जालसाज गिरफ्तार।
उत्तर प्रदेश सरकार का ओएसडी (OSD) बताकर अधिकारियों पर रौब जमाने वाले एक शातिर जालसाज को धर दबोचा है। आरोपी की पहचान मोहसिन खान के रूप में हुई है, जो लंबे समय से फर्जी पहचान के सहारे रौब झाड़ रहा था।
अजीत मिश्रा (खोजी)
लाल-नीली बत्ती का फरेब और सिस्टम की लाचारी: बस्ती में फर्जी OSD का पर्दाफाश
- सचिवालय का फर्जी अधिकारी बनकर ले रहा था VIP प्रोटोकॉल: बस्ती कोतवाली और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम ने दबोचा।
- 15 हजार रुपए मासिक पर ड्राइवर रखकर चलता था फर्जी OSD: कार से वॉकी-टॉकी, आईफोन और फर्जी विजिटिंग कार्ड बरामद।
- बस्ती पुलिस की बड़ी कार्रवाई: खुद को यूपी सरकार का OSD बताने वाले मोहसिन खान पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज।
- लाल-नीली बत्ती और फर्जी मोनोग्राम का खेल बेनकाब: बड़ेबन पुल के पास चेकिंग के दौरान हुआ चौंकाने वाला खुलासा।
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में जो खेल बेनकाब हुआ है, वह सिर्फ एक शातिर अपराधी की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि हमारे प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र पर लगा एक करारा तमाचा है। बड़ेबन पुल के नीचे चेकिंग के दौरान कोतवाली और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम ने जिस सफेद इनोवा कार (UP32HW2225) पर उत्तर प्रदेश शासन की लाल-नीली बत्ती और फर्जी सरकारी लोगो के साथ मोहसिन खान को दबोचा, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश में ‘VIP कल्चर’ और चमक-धमक का रौब कितना खतरनाक रूप ले चुका है।

फर्जीवाड़े की हदें: सचिवालय का ‘अदृश्य’ अधिकारी
खुद को लखनऊ सचिवालय का OSD (Officer on Special Duty) बताकर घूमने वाला मोहसिन खान कोई आम ठग नहीं, बल्कि वीआईपी संस्कृति का फायदा उठाने वाला शातिर खिलाड़ी था।
- रौब और धौंस: गाड़ी पर लाल-नीली बत्ती, लखनऊ के पॉश पते (51/ए, दारुलशफा) का फर्जी विजिटिंग कार्ड और हाथ में दो-दो वॉकी-टॉकी।
- कमाई का जरिया: इन हथकंडों के दम पर टोल टैक्स की चोरी, सरकारी दफ्तरों में वीआईपी एंट्री और भोले-भाले आम नागरिकों तथा अधिकारियों को अपने झांसे में लेना।
- ठगी का जाल: अधिकारियों से काम करवाने के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठना और खुद को सरकार का खास नुमाइंदा बताकर रौब झाड़ना इसका पेशा बन चुका था।
सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक लाल-नीली बत्ती और सरकारी लोगो का यह छलावा आम आदमी की आंखों में धूल झोंकता रहेगा?
सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
यह घटना प्रशासनिक चौकसी पर बड़े सवाल खड़े करती है। जब तक पुलिस ने शक के आधार पर गाड़ी को रोककर गहनता से पूछताछ नहीं की, तब तक यह फर्जी OSD बेखौफ होकर सड़क पर दौड़ रहा था। क्या हमारे टोल प्लाजा, सरकारी दफ्तरों के गेट और सुरक्षा चौकियां इतनी कमजोर हैं कि एक फर्जी कार्ड और बत्ती देखकर हर कोई रास्ता छोड़ देता है?
यह मामला सिर्फ एक मोहसिन खान का नहीं है, बल्कि इस मानसिकता का प्रतीक है जहां पद, प्रतिष्ठा और रुतबे की हनक पाने के लिए लोग कानून की धज्जियां उड़ाने से नहीं डरते। 15,000 रुपये महीने पर ड्राइवर रखकर अपनी गाड़ी में ‘सरकारी शान’ दिखाने वाले ऐसे लोग लोकतंत्र की गरिमा को कुचलते हैं।
पुलिस की सराहनीय कार्रवाई और चेतावनी
इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करने वाली संयुक्त पुलिस टीम में निम्नलिखित अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे:
बृजानन्द सिंह (कोतवाल, कोतवाली बस्ती)
कुलदीप त्रिपाठी (प्रभारी यातायात)
जितेन्द्र सिंह (चौकी प्रभारी, बड़ेबन)
रमाकांत यादव व कृष्णानन्द पाण्डेय (हेड कांस्टेबल)
अभिषेक कुमार (हेड कांस्टेबल)
रितिक पाण्डेय, कुंज बिहारी व राजू यादव (कांस्टेबल)
लेकिन जरूरत इस बात की है कि:
- ऐसी फर्जी गाड़ियों और बत्तियों के खिलाफ राज्यभर में विशेष अभियान चलाया जाए।
- वीआईपी संस्कृति के नाम पर मिलने वाली छूट और प्रोटोकॉल की आड़ में पलने वाले अपराधियों पर नकेल कसी जाए।
जब तक आम जनता और प्रशासन मिलकर इस ‘दिखावे की संस्कृति’ पर चोट नहीं करेंगे, तब तक ऐसे मोहसिन खान कानून की आंखों में धूल झोंकते रहेंगे। बस्ती पुलिस की यह कार्रवाई एक चेतावनी है कि फर्जीवाड़े का यह खेल अब ज्यादा दिन नहीं टिकेगा।









