

चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार की सख्ती का असर अब दिखाई देने लगा है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के मुताबिक, चीनी का एक्स-मिल भाव यानी थोक कीमत करीब 18 फीसदी घटकर 55 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है। आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट की संभावना जताई गई है।
हालांकि, मिल भाव में आई गिरावट का असर अभी खुदरा बाजार में पूरी तरह दिखाई नहीं दिया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, 24 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक भाव 58.29 रुपये और खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम था। विशेषज्ञों के मुताबिक आमतौर पर मिल और खुदरा कीमतों के बीच करीब 7-8 रुपये प्रति किलो का अंतर रहता है।
पिछले सप्ताह 67 रुपये तक पहुंचा था मिल भाव
चीनी की एक्स-मिल कीमतें पिछले सप्ताह बढ़कर करीब 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थीं। सरकार ने मिलों की ओर से कीमत बढ़ाने के प्रयासों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए। खाद्य सचिव ने कहा कि कीमतों में उछाल किसी बुनियादी कमी के कारण नहीं आया है और देश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
सरकार के अनुसार, विपणन वर्ष 2025-26 में चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटकर करीब 306 लाख टन रह गया है। इसके बावजूद घरेलू मांग करीब 285 लाख टन है और देश में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी
चीनी की कीमतों में तेजी के बाद सरकार ने पिछले सप्ताह 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही थोक खरीदारों के लिए भंडारण सीमा भी लागू की गई।
खुदरा बाजार पर असर अभी सीमित
मिल भाव में गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में इसका असर अभी सीमित है। मंगलवार को चीनी की खुदरा कीमत करीब 64 रुपये प्रति किलो रही, जबकि एक दिन पहले औसत खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलो था।
सरकार की ओर से उम्मीद जताई जा रही है कि मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट का असर आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। इससे आम उपभोक्ताओं को चीनी की कीमतों में राहत मिलने की संभावना है।





