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पुलिस मुख्यालय, उ0प्र0, लखनऊ में यातायात निदेशालय, उ०प्र० एवं इन्स्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजूकेशन, (IRTE) फरीदाबाद, हरियाणा के सहयोग से 02 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

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लखनऊ/ उत्तर प्रदेश

मुख्यालय पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश

पुलिस मुख्यालय, उ0प्र0, लखनऊ में यातायात निदेशालय, उ०प्र० एवं इन्स्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजूकेशन, (IRTE) फरीदाबाद, हरियाणा के सहयोग से 02 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

 मा0 मुख्यमंत्री उ0प्र0 श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं एवं उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम स्तर पर लाने हेतु दिये गये निर्देशों के क्रम में पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 श्री राजीव कृष्ण के मार्गदर्शन में यातायात निदेशालय, उत्तर प्रदेश द्वारा निरंतर सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा करते हुए उनकी प्रभावी रोकथाम हेतु योजनाबद्ध एवं सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। इसी क्रम में पुलिस मुख्यालय, उ0प्र0, लखनऊ स्थित अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद प्रेक्षागृह में यातायात निदेशालय, उ0प्र0 एवं इन्स्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजूकेशन (IRTE), फरीदाबाद, हरियाणा के सहयोग से आज दिनांक 07-02-2026 को दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया गया।

 यह कार्यशाला प्रदेश में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित की गयी है, जिसमें सड़क सुरक्षा के पाँच मूलभूत स्तम्भ-एजुकेशन, एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग, इमरजेंसी केयर एवं इनवायरमेन्ट पर विशेष बल दिया गया है। सड़क दुर्घटना में होनी वाली मृत्यु को न्यूनतम स्तर पर लाने हेतु महात्वाकाक्षी योजना जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) की शुरूआत माह नवम्बर में की गयी थी, जिसके प्रथम चरण में 20 जनपदों के 242 क्रिटिकल थानों में 89 क्रिटिकल कॉरिडोर एवं 3233 क्रिटिकल क्रैश लोकेशन का चिन्हांकन कर सुनियोजित ढ़ग से की गयी कार्यवाही के परिणाम स्वरूप सार्थक एवं सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।

 प्रथम चरण के सकारात्मक परिणामों के दृष्टिगत ZFD कार्यक्रम के द्वितीय चरण में प्रदेश के शेष 55 जनपदों में सर्वाधिक दुर्घटना वाले 245 क्रिटिकल थानों का चिन्हांकन किया गया है। इस 02 दिवसीय कार्यशाला में उक्त 55 जनपदों के 44 राजपत्रित अधिकारी यातायात, 55 निरीक्षक/उपनिरीक्षक यातायात तथा 55 क्रिटिकल कॉरिडोर टीम प्रभारी (उपनिरीक्षक यातायात पुलिस) द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है, जिन्हें डा0 रोहित बलूजा, अध्यक्ष इन्स्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजूकेशन (IRTE), फरीदाबाद हरियाणा एवं उनकी विशेषज्ञ टीम द्वारा सड़क दुर्घटना जॉच/विवेचना की नवनीतम पद्धति के बारे में जानकारी प्रदान की जायेगी।

 इस 02 दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर पुलिस महानिदेशक उ0प्र0 श्री राजीव कृष्ण ने अपने उद्बोधन में सड़क दुर्घटनाओं में कमी के लिए निरंतर जन-जागरूकता और प्रभावी प्रवर्तन को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नवंबर के ‘यातायात माह’ तक सीमित रहने के बजाय जागरूकता अभियान पूरे वर्ष चलने चाहिए। नगर निगमों के सहयोग से ब्लैक स्पॉट्स पर स्थायी होर्डिंग्स लगाने और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार को उन्होंने जीवन रक्षा के लिए आवश्यक बताया।

 उन्होंने अलीगढ़-बुलंदशहर, कानपुर-हमीरपुर और लखनऊ-सीतापुर मार्गों पर चलाए गए ZFD कार्यक्रम के पायलट प्रोजेक्ट की सफलता साझा की, जहाँ केंद्रित पेट्रोलिंग और दुर्घटना के कारणों की गहन जांच सुनिश्चित करने से मात्र 02 महीनों में दुर्घटनाओं में 30 प्रतिशत से 58 प्रतिशत तक कमी आई है।

 उन्होंने बल दिया कि भारी जुर्माने से अधिक जरूरी यह है कि हर उल्लंघन पर दंड मिले, जिससे नियमों के प्रति जवाबदेही बने। तकनीकी पहल के तहत ‘ज़ीरो फैटलिटी कॉरिडोर’ के प्रभावी क्रियान्वयन, ओवर-स्पीडिंग पर मोबाइल अलर्ट तथा एआई कैमरों व ऑटोमैटिक चालान व्यवस्था को और व्यावहारिक बनाने की बात कही।

 अंत में उन्होंने अधिकारियों से इस प्रशिक्षण को अपने जिलों में निष्ठापूर्वक लागू करने का आह्वान किया, ताकि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि को न्यूनतम किया जा सके।

 कार्यक्रम कें दौरान डा0 रोहित बलूजा, अध्यक्ष इन्स्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजूकेशन (IRTE), फरीदाबाद हरियाणा ने सड़क दुर्घटना जांच में पुलिस और परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जांच वैज्ञानिक, तथ्य-आधारित और तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए; केवल “तेज रफ्तार” या “लापरवाही” जैसे शब्द पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (ठछै) को मोटर व्हीकल एक्ट से जोड़कर मजबूत कानूनी केस बनाने का सुझाव दिया।

 उन्होंने तकनीक के उपयोग पर कहा कि एआई और कैमरे उपयोगी हैं, लेकिन वास्तविक प्रभाव मानव क्षमता पर निर्भर करता है, इसलिए अधिकारियों की क्षमता-विकास जरूरी है।

 अंत में उन्होंने ‘ज़ीरो फैटलिटी’ लक्ष्य के लिए मुरादाबाद पुलिस अकादमी की तर्ज पर “ट्रेनर्स को ट्रेन” मॉडल अपनाने का सुझाव दिया।

  निदेशक/अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात एवं सड़क सुरक्षा) श्री ए0 सतीश गणेश द्वारा कार्यशाला में आये प्रतिभागियों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के उपायों के सम्बन्ध में विस्तारपूर्वक एवं जागरूकतापूर्ण जानकारी दी गयी।

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