

मदर्स डे पर बच्चों ने प्राकृतिक चीजों से उकेरी माँ की ममता, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
भभुआ। अंतरराष्ट्रीय मदर्स डे के अवसर पर रविवार को नगर पालिका मध्य विद्यालय भभुआ परिसर में संचालित उर्दू प्राथमिक विद्यालय में एक भावनात्मक और रचनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व आर्ट ऑफ गिविंग के बिहार ब्रांड एंबेसडर शिवम कुमार ने किया, जिसमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने आंधी-पानी में गिरे पीपल के पत्तों, कनैल और अरहूल के फूलों की सहायता से माँ की आकर्षक आकृति तैयार की। “एक संदेश माँ के नाम” थीम पर आधारित इस आयोजन में बच्चों ने अपनी माँ के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता को अनोखे अंदाज में प्रस्तुत किया। प्राकृतिक सामग्री से बनाई गई यह कलाकृति लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।
इस मौके पर शिवम कुमार ने कहा कि माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन का आधार हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों ने चित्र, संदेश और प्रकृति से जुड़ी वस्तुओं के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि माँ और प्रकृति दोनों ही जीवनदायिनी हैं और पत्तों व फूलों से माँ की आकृति बनाकर बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया है।
कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधान शिक्षिका राजिया परवीन, शिक्षक सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अरुण कुमार चंद्रवंशी, समीन खान, सुदर्शन प्रसाद रजक और बिलकीश परवीन समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
इस दौरान “माई मदर माई हीरो विद सेल्फी”, “माँ की कहानी मेरी जुबानी”, “एक पेड़ माँ के नाम”, हाथ से लिखे पत्र, पेंटिंग, कविता, कहानी और ग्रीटिंग कार्ड जैसे कई रचनात्मक अभियानों की भी जानकारी दी गई। शिवम कुमार ने कहा कि डिजिटल दौर में हाथ से लिखा गया पत्र माँ के लिए सबसे अनमोल उपहार बन सकता है।
उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य माँ के योगदान को सम्मान देना, समाज में भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाना तथा नई पीढ़ी को संवेदनशील बनाना है। अभियान में बिहार के विभिन्न जिलों, गांवों और शहरों से छात्र-छात्राएं, एनएसएस स्वयंसेवक, एनसीसी कैडेट, शिक्षक, समाजसेवी और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मदर्स डे को पूरी तरह माँ को समर्पित दिवस बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि माँ ममता, त्याग और स्नेह की प्रतिमूर्ति होती हैं। उनके आशीर्वाद और प्यार से ही जीवन आगे बढ़ता है। यह अभियान लोगों के बीच माँ के महत्व को समझाने और इस खास दिन को यादगार बनाने की एक सराहनीय पहल साबित हुआ।
( कैमुर से अफसार आलम की रिपोर्ट)










