

अपराधियों की अब खैर नहीं! बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस के बेड़े में शामिल हुई हाईटेक ‘चलता-फिरता फॉरेंसिक लैब’
बलौदाबाजार:
फिल्मों और वेब सीरीज में आपने देखा होगा कि कैसे फॉरेंसिक टीम पलक झपकते ही घटनास्थल से सबूत जुटाकर केस सॉल्व कर देती है। अब बिल्कुल ऐसा ही हाई-टेक नजारा छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा में भी देखने को मिलने वाला है!
जिले की पुलिस को अब एक ऐसी अत्याधुनिक ‘मोबाइल फॉरेंसिक वैन’ मिल गई है, जो सीधे वारदात वाली जगह पर पहुंचकर ‘ऑन द स्पॉट’ वैज्ञानिक जांच शुरू कर देगी। यानी अब सबूतों के लिए लैब की रिपोर्ट का हफ्तों इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि घटनास्थल ही लैब में तब्दील हो जाएगा।
एसपी ओ.पी. शर्मा ने दिखाई हरी झंडी
शनिवार (23 मई 2026) को पुलिस लाइन बलौदाबाजार में एक शानदार कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक (SP) श्री ओ.पी. शर्मा ने इस हाईटेक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर उनके साथ एडिशनल एसपी श्री अभिषेक सिंह, वैज्ञानिक अधिकारी श्री राजीव कुमार, रक्षित निरीक्षक उषा ठाकुर और साइबर सेल प्रभारी प्रणाली वैद्य सहित पूरा पुलिस अमला मौजूद रहा।
क्या है इस ‘सुपर वैन’ की खासियत?
यह वैन सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि पहियों पर दौड़ती एक मॉडर्न साइंटिफिक लैब है। इसमें अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने के लिए एक से बढ़कर एक टूल्स दिए गए हैं:
ऑन-द-स्पॉट टेस्टिंग: गंभीर अपराधों और मर्ग जैसे मामलों में अब घटनास्थल पर ही सैंपलिंग और टेस्टिंग तुरंत हो जाएगी।
बायोलॉजिकल साक्ष्य सुरक्षित: खून के धब्बे, डीएनए सैंपल या अन्य जैविक साक्ष्यों की क्वालिटी खराब होने से पहले उन्हें सुरक्षित कर लिया जाएगा।
तीसरी आंख से भी तेज कैमरे: वैन में अत्याधुनिक कैमरे और माइक्रोस्कोप (सूक्ष्मदर्शी) लगे हैं, जो बारीक से बारीक सबूत को भी पकड़ लेंगे।
डाटा रिट्रीव और एनालिसिस: डिजिटल क्राइम के इस दौर में डेटा एनालिसिस और डिलीटेड डेटा को रिकवर (रिट्रीव) करने की सुविधा भी इस वैन में मौजूद है।
अपराधियों को सजा दिलाने में बनेगा ‘मील का पत्थर’
अक्सर वैज्ञानिक साक्ष्यों (Scientific Evidence) की कमी या देरी की वजह से शातिर अपराधी बच निकलते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। पुलिस का मानना है कि इस नई तकनीक से न सिर्फ जांच की रफ्तार दोगुनी होगी, बल्कि सबूतों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
क्राइम सीन पर अब खेल खत्म! बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस की यह नई ‘तीसरी आंख’ अपराधियों के पसीने छुड़ाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाली है।









