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टूरिज्म या बर्बादी?, आखिर कब तक Uttarakhand सहेगा ये बोझ

पंकज कथूरिया संवाददाता बहादराबाद हरिद्वार

        (उत्तराखंड)

हालिया समय में आपने उत्तराखंड(Uttarakhand) में सड़कों पर रेंगती गाड़ियां, लोगों और गाड़ियों के हुजूम के चलते टैफीक तो आपने देखा ही होगा। बढ़ती गर्मी और चारधाम यात्रा की वजह से उत्तराखंड टूरिस्ट्स से भरा पड़ा है। जो आए दिन यहां के स्थानीय लोगों को तो परेशान कर ही रही हैं। साथ ही आने वाले वक्त में हमारे पहाड़ों पर खतरनाक आपदा का न्यौता भी है।

एक मुसीबत से जूझ रहा Uttarakhand

उत्तराखंड इन दिनों एक मुसीबत से जूझ रहा है, जिसका नाम है ओवर टूरिज्म। टूरिज्म जो हमारी इकोनॉमी में 15 प्रतिशत का योगदान देता है। उसी के ज्यादा बढ़ने से अब यही पहाड़ों के लिए बोझ बनता जा रहा है। जिसे ओवर टूरिज्म कहते हैं। उत्तराखंड जो छोटे-छोटे हिल स्टेशन चंद हज़ार लोगों के लिए बने थे। वहां लाखों की भीड़ झोंकी जा रही है। बिना ये सोचे की एक छोटा सा पहाड़ी राज्य, जिसके रिसोर्सेज सीमित हैं, वो इतनी बड़ी भीड़ को कैसे संभालेगा।

रोजाना 10 हजार से ज्यादा गाड़िया आ रही

लिहाज़ा, नतीजा सामने है, घंटों के ट्रैफिक जाम, स्थानीय लोगों को परेशानी, बढ़ता प्रदूषण, अंधाधुंध कंस्ट्रक्शन, कचरे के ढेर। मीडिया रिपोर्स्ट की मानें तो चारधाम यात्रा मार्गों पर रोजाना 10 हजार से ज्यादा गाड़ियां पहुंच रही हैं। मसूरी में 4-5 हजार से ज्यादा, नैनीताल भवाली रामगढ़ बेल्ट में 3-4 हजार। तो वहीं रामनगर कॉर्बेट इलाके में हर रोज 1-2 हजार ज्यादा टूरिस्ट गाड़ियां पहुंच रही हैं।

भारी दबाव आपदाओं को न्योता

हिमालय जैसी नाजुक भौगोलिक परिस्थितियों में इतना भारी दबाव सीधे-सीधे आपदाओं को भी न्योता दे रहा है। स्थानीय लोग इस ओवर टूरिज्म से काफी वक्त से परेशान हैं। कहीं ऐंबुलेंस इस ट्रैफिक जाम में घंटों फंसे रहती है। जिससे लोगों की मौत तक हो जाती है। कहीं बच्चे स्कूल-कॉलेज वक्त पर नहीं पहुंच पाते। कहीं लोगों को अपने ऑफिस जाने में घंटों लग जाते हैं।

ओवर टूरिज्म पहाड़ों पर आपदाओं को न्योता

स्थानीय समस्याओं के अलावा एक्सपर्ट्स की मानें तो ओवर टूरिज्म सीधे सीधे पहाड़ों में आपदाओं को भी न्योता दे रहा है। इतने ज्यादा टूरिस्ट्स को संभालने के लिए राज्य में हर जगह पेड़ों को काटकर, पहाड़ों की छाती छलनी करके कंस्ट्रक्शन किया जा रहा है। यहां तक की लोग नदीयों के ऊपर भी होटल रिजॉर्ट बनाने में भी नहीं कतरा रहे हैं। यहां तक की हमारे पर्यटन मंत्री ही जब NGT के नियम ताक पर रखकर गधेरे के ऊपर ही निर्माण कर रहे हैं तो किसी और से क्या ही उम्मीद की जाए।

पर्यटकों की संख्या में इजाफा, चिंता का विषय

टूरिज्म से पैसा आता है रोजगार मिलता है ये बात बिल्कुल सही है। लेकिन किस कीमत पर आ रहा है ये भी हमें सोचना चाहिए। पिछले कुछ सालों में पर्यटकों की संख्या में जो इजाफा हुआ है, वो सच में चिंता का विषय है। आंकड़े बताते हैं कि पीक सीजन में कुछ जगहों पर तो पर्यटकों की संख्या स्थानीय आबादी से कई गुना ज्यादा हो जाती है।

रौद्र रुप दिखाएगी प्रकृति!

पहाड़ों में इस ओवर टूरिज्म को बैलेंस करने के लिए सरकार को कहीं ना कहीं नई नितीयां बनानी होंगी। क्योंकि अगर आज हम इस तरह प्रकृती का दोहन करेंगे तो जिस दिन प्रकृति अपना रौद्र रुप दिखाएगी उस दिन केदारनाथ और धराली जैसी आपदाओं को आम होता देर नहीं लगेगा।

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